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High Court: ग्रेच्युटी वसूली मामले में डीएम ने हाईकोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, नई रिकवरी प्रक्रिया होगी शुरू
Fri, 03 Jul 2026 05:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 03 Jul 2026 05:58 PM IST
सार
ग्रेच्युटी की बकाया राशि की वसूली से जुड़े मामले में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेघा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगी।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
ग्रेच्युटी की बकाया राशि की वसूली से जुड़े मामले में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेघा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगी। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने महेंद्र दत्त शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए नई रिकवरी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही सभी संबंधित याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। आदेश का पालन न करने के मामले में हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को तलब किया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत याची के करीब सात लाख रुपये तथा उस पर देय ब्याज की वसूली के लिए 13 जून 2024 को तिलक एक्सपोर्ट्स के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया था।
हालांकि, कंपनी के दिए गए पते पर कुछ नहीं मिलने से वसूली की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। जांच में पता चला कि तिलक एक्सपोर्ट्स का अधिग्रहण उमा मेडिकेयर लिमिटेड ने कर लिया है लेकिन नई कंपनी के नाम से रिकवरी सर्टिफिकेट जारी न होने और उसे पक्षकार न बनाए जाने के कारण कार्रवाई बाधित रही। बाद में याचिकाकर्ता ने नई कंपनी को पक्षकार बनाने का आवेदन दिया।
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अदालत में राज्य सरकार और जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नया रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद नियमानुसार प्रभावी वसूली सुनिश्चित की जाएगी। हाईकोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को आवेदन पर विधिसम्मत कार्रवाई कर नया रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया।
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इसके साथ ही सभी संबंधित याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। आदेश का पालन न करने के मामले में हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को तलब किया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत याची के करीब सात लाख रुपये तथा उस पर देय ब्याज की वसूली के लिए 13 जून 2024 को तिलक एक्सपोर्ट्स के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया था।
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हालांकि, कंपनी के दिए गए पते पर कुछ नहीं मिलने से वसूली की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। जांच में पता चला कि तिलक एक्सपोर्ट्स का अधिग्रहण उमा मेडिकेयर लिमिटेड ने कर लिया है लेकिन नई कंपनी के नाम से रिकवरी सर्टिफिकेट जारी न होने और उसे पक्षकार न बनाए जाने के कारण कार्रवाई बाधित रही। बाद में याचिकाकर्ता ने नई कंपनी को पक्षकार बनाने का आवेदन दिया।
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अदालत में राज्य सरकार और जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नया रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद नियमानुसार प्रभावी वसूली सुनिश्चित की जाएगी। हाईकोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को आवेदन पर विधिसम्मत कार्रवाई कर नया रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया।