कैजुअल ड्रेस में गए डीएम प्रयागराज को समारोह से लौटाया
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प्रयागराज। हाईकोर्ट के समारोह में पहुंचे जिलाधिकारी प्रयागराज भानुचंद्र गोस्वामी को ड्रेस कोड का पालन न करना भारी पड़ा। जजों की आपत्ति के चलते न सिर्फ उनको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा बल्कि, समारोह से उनको लौटा दिया गया। बाद में ड्रेसकोड मेें वह पहुंचे ओर समारोह में शामिल हो पाए।
भानुचन्द्र गोस्वामी शनिवार को हाईकोर्ट में नए बने संग्रहालय भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे थे। नियमानुसार उनको आईएएस अधिकारियों के लिए तय ड्रेस कोड में जाना चाहिए था मगर, डीएम कैजुअल ड्रेस में पहुंच गए। समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के जज न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति विनीत सरन के अलावा मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और हाईकोर्ट के अधिकांश जज मौजूद थे।
जिलाधिकारी समारोह में सामान्य पैंट शर्ट पहन कर पहुंच गए। उनके पहनावे को ड्रेस कोड के विपरीत होने के कारण जजों ने आपत्ति की। उन्हें सही ड्रेस पहनकर आने को कहा गया। डीएम गोस्वामी को समारोह से वापस कर दिया गया और उन्हें तभी कार्यक्रम में शामिल होने दिया गया जब वह ड्रेस कोड के अनुसार टाई, कोट और पैंट में दुबारा आए।
हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार यहां वकीलों, जजों और न्यायिक अधिकारियोें के साथ ही कर्मचारियों के लिए भी ड्रेस कोड तो निर्धारित है ही, प्रथम श्रेणी अधिकारी, आईएएस, पीसीएस आदि के लिए भी ड्रेसकोड तय है। अधिकारियों के लिए बंद गले का कोट या फिर कोट-टाई लगाकर ही अदालत आना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर पूर्व में कुछ अधिकारियों पर अदालत जुर्माना भी लगा चुकी है।