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जिला अधिवक्ता संघ का शताब्दी समारोह
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:33 PM IST
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जिला अधिवक्ता संघ के शताब्दी समारोह के मौके पर रविवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने अधिवक्ताओं से आह्वान किया है वह जनता के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा करें। अधिवक्ताओं को अपने दायित्व की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि यदि अधिवक्ता सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी लेना बंद कर देंगे तो लोग गुंडे-माफिया के पास न्याय मांगने जाने लगेंगे। शताब्दी वर्ष समारोह की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने अधिवक्ताओं को व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के दौर में भी पेशे की नैतिकता से समझौता नहीं करने की नसीहत दी।
बताया कि भारत में अनादिकाल से चतुष्पदीय न्याय प्रणाली विकसित थी। यह आरोप गलत है कि हमने ब्रिटिश न्याय व्यवस्था को अपनाया है। वस्तुत: दूसरे देशों ने भारतीय न्याय प्रणाली की नकल की है। वकालत के पेशे में आ रही गिरावट को इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभी हम ज्यादती भी करते हैं। अधिवक्ता संघ का गरिमामयी इतिहास है, इसे बनाए रखना वकीलों की जिम्मेदारी हैं। राज्यपाल केशरीनाथ ने अवकाश और सुविधाओं की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अधिवक्ता मेहनतकश समाज है। इनको काम करने के लिए बेहतर वातावरण देना जरूरी है। वर्किंग कंडीशन में सुधार होना चाहिए। उन्होंने जिला अदालतों में छुट्टियां बढ़ाए जाने की मांग का भी समर्थन किया।
मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चंद्रचूड ने मानद अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित करते हुए न्यायपालिका की उपलब्धियां गिनाईं। पूरा वक्तव्य हिंदी में देते हुए उन्होंने कहा कि किसी संस्था को बाहर से देखने और भीतर से देखने में फर्क होता है। एक वर्ष पहले हाईकोर्ट में नौ लाख से अधिक मुकदमे लंबित थे। इसके अलावा एक वर्ष की अवधि में दो लाख 77 हजार नए मुकदमे दाखिल हुए। 17 दिसंबर 2014 तक हमने नए दाखिल मुकदमों सहित पहले से लंबित 80 हजार मुकदमों का निस्तारण कर दिया। जिला अदालतों में लंबित मुकदमों की निस्तारण में प्रगति हुई है। छह दिसंबर को आयोजित लोक अदालत में दो करोड़ दस लाख मुकदमों का निस्तारण किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि न्यायपालिका के डिजिटलाइजेशन के लिए 80 करोड़ रुपये मिले हैं। अधिवक्ताओं को नसीहत दी वह समस्याओं के समाधान के लिए हड़ताल की जगह संवाद का सहारा लें। अधिवक्ताओं को अपनी सोच आधुनिक बनाने की आवश्यकता है।
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जिला न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक जज न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा मुख्य न्यायाधीश जिला अदालतों की कार्यप्रणाली के सुधार में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। अदालत के कंप्यूटरीकरण का कार्य तेज हुआ है। वादकारियोें को इंटरनेट के माध्यम से फैसलों और कॉल लिस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कचहरी के दो नए भवनों का निर्माण इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। इससे 49 नए न्याय कक्ष, विश्राम कक्ष और वादकारियों तथा महिला अधिवक्ताओं के लिए कक्ष उपलब्ध होंगे। न्यायकक्षों को वातानुकूलित बनाने का प्रयास किया जाएगा। लघु आपराधिक मामलों में फाइन सीधे बैंक में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। उन्होंने जिला अधिवक्ता संघ के प्रयासों की सराहना की।
अतिथियों का स्वागत करते हुए जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र ने आयोजन को सफल बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं का आभार जताया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को सीधे संबोधित करते हुए अपनी समस्याएं भी गिनाई। बताया कि इलाहाबाद में कई ऐसे त्यौहार हैं जिनमें अधिक अवकाश चाहिए। उन्होंने गर्मियों के दिनों में वकीलों को होने वाली परेशानी का जिक्र करते हुए न्यायकक्षों को एअरकंडीशन करने की मांग की।
संघ के मंत्री देवेेंद्र मिश्र नगहरा ने भी अतिथियों का स्वागत करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। बताया कि उनके कार्यकाल में अधिवक्ता कल्याण के लिए कोष गठित किया गया है, जिससे वकीलोें को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। परिसर में साफ सफाई का इंतजाम बेहतर किया गया है। हड़ताल पर हमने काबू पाया है और मौजूदा कार्यकारिणी के कार्यकाल में गिनती की ही हड़तालें हुई हैं। अतिथियों का स्वागत पूर्व अध्यक्ष जगत पाल सिंह और नरेंद्र देव पांडेय ने भी किया। राज्यपाल, मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक जज को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अंगवस्त्रम भेंट किए गए। समारोह का संचालन पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास्तव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन जिला जज डीएस त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में हाईकोर्ट के महानिबंधक प्रत्यूश कुमार, सांसद फूलपुर केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व मंत्री नंदगोपाल, जिलाधिकारी भवनाथ, बार कौंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष आईके चतुर्वेदी, हाईकोर्ट बार के महासचिव सीपी उपाध्याय, उपाध्यक्ष एके ओझा, पूर्व महासचिव प्रभाशंकर मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, अनिल कुमार तिवारी, केबी सिंह, कुश कुमार पांडेय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे।
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बताया कि भारत में अनादिकाल से चतुष्पदीय न्याय प्रणाली विकसित थी। यह आरोप गलत है कि हमने ब्रिटिश न्याय व्यवस्था को अपनाया है। वस्तुत: दूसरे देशों ने भारतीय न्याय प्रणाली की नकल की है। वकालत के पेशे में आ रही गिरावट को इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभी हम ज्यादती भी करते हैं। अधिवक्ता संघ का गरिमामयी इतिहास है, इसे बनाए रखना वकीलों की जिम्मेदारी हैं। राज्यपाल केशरीनाथ ने अवकाश और सुविधाओं की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अधिवक्ता मेहनतकश समाज है। इनको काम करने के लिए बेहतर वातावरण देना जरूरी है। वर्किंग कंडीशन में सुधार होना चाहिए। उन्होंने जिला अदालतों में छुट्टियां बढ़ाए जाने की मांग का भी समर्थन किया।
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मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चंद्रचूड ने मानद अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित करते हुए न्यायपालिका की उपलब्धियां गिनाईं। पूरा वक्तव्य हिंदी में देते हुए उन्होंने कहा कि किसी संस्था को बाहर से देखने और भीतर से देखने में फर्क होता है। एक वर्ष पहले हाईकोर्ट में नौ लाख से अधिक मुकदमे लंबित थे। इसके अलावा एक वर्ष की अवधि में दो लाख 77 हजार नए मुकदमे दाखिल हुए। 17 दिसंबर 2014 तक हमने नए दाखिल मुकदमों सहित पहले से लंबित 80 हजार मुकदमों का निस्तारण कर दिया। जिला अदालतों में लंबित मुकदमों की निस्तारण में प्रगति हुई है। छह दिसंबर को आयोजित लोक अदालत में दो करोड़ दस लाख मुकदमों का निस्तारण किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि न्यायपालिका के डिजिटलाइजेशन के लिए 80 करोड़ रुपये मिले हैं। अधिवक्ताओं को नसीहत दी वह समस्याओं के समाधान के लिए हड़ताल की जगह संवाद का सहारा लें। अधिवक्ताओं को अपनी सोच आधुनिक बनाने की आवश्यकता है।
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जिला न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक जज न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा मुख्य न्यायाधीश जिला अदालतों की कार्यप्रणाली के सुधार में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। अदालत के कंप्यूटरीकरण का कार्य तेज हुआ है। वादकारियोें को इंटरनेट के माध्यम से फैसलों और कॉल लिस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कचहरी के दो नए भवनों का निर्माण इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। इससे 49 नए न्याय कक्ष, विश्राम कक्ष और वादकारियों तथा महिला अधिवक्ताओं के लिए कक्ष उपलब्ध होंगे। न्यायकक्षों को वातानुकूलित बनाने का प्रयास किया जाएगा। लघु आपराधिक मामलों में फाइन सीधे बैंक में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। उन्होंने जिला अधिवक्ता संघ के प्रयासों की सराहना की।
अतिथियों का स्वागत करते हुए जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र ने आयोजन को सफल बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं का आभार जताया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को सीधे संबोधित करते हुए अपनी समस्याएं भी गिनाई। बताया कि इलाहाबाद में कई ऐसे त्यौहार हैं जिनमें अधिक अवकाश चाहिए। उन्होंने गर्मियों के दिनों में वकीलों को होने वाली परेशानी का जिक्र करते हुए न्यायकक्षों को एअरकंडीशन करने की मांग की।
संघ के मंत्री देवेेंद्र मिश्र नगहरा ने भी अतिथियों का स्वागत करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। बताया कि उनके कार्यकाल में अधिवक्ता कल्याण के लिए कोष गठित किया गया है, जिससे वकीलोें को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। परिसर में साफ सफाई का इंतजाम बेहतर किया गया है। हड़ताल पर हमने काबू पाया है और मौजूदा कार्यकारिणी के कार्यकाल में गिनती की ही हड़तालें हुई हैं। अतिथियों का स्वागत पूर्व अध्यक्ष जगत पाल सिंह और नरेंद्र देव पांडेय ने भी किया। राज्यपाल, मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक जज को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अंगवस्त्रम भेंट किए गए। समारोह का संचालन पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास्तव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन जिला जज डीएस त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में हाईकोर्ट के महानिबंधक प्रत्यूश कुमार, सांसद फूलपुर केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व मंत्री नंदगोपाल, जिलाधिकारी भवनाथ, बार कौंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष आईके चतुर्वेदी, हाईकोर्ट बार के महासचिव सीपी उपाध्याय, उपाध्यक्ष एके ओझा, पूर्व महासचिव प्रभाशंकर मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, अनिल कुमार तिवारी, केबी सिंह, कुश कुमार पांडेय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे।