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High Court : निजी विवाद में याचिका दाखिल करने पर नाराज कोर्ट ने लगाया 5,000 रुपये का जुर्माना
Fri, 30 Jan 2026 03:59 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 30 Jan 2026 03:59 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निजी कंपनी के खिलाफ रिट याचिका दाखिल करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निजी कंपनी के खिलाफ रिट याचिका दाखिल करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है। कहा है कि अनुच्छेद-226 के तहत मिलने वाले असाधारण उपचारों का उपयोग निजी बकाये की वसूली के लिए नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने दिया है।
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प्रयागराज की यूनियन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन नाम की ट्रांसपोर्ट कंपनी ने प्रतिवादी से अपना बकाया वसूलने के लिए याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रतिवादी संख्या एक (भारत संघ) का इस दावे से कोई लेनादेना नहीं था। याची के वकील ने भी स्वीकार किया कि राहत एक निजी कंपनी के खिलाफ मांगी जा रही थी।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अदालत का समय बर्बाद करती हैं और उन मामलों की सुनवाई में बाधा डालती हैं, जो वास्तव में विचारणीय हैं। हालांकि, अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी थी पर अदालत ने भविष्य में ऐसी याचिकाओं को हतोत्साहित करने के लिए 5,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी।
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