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High Court : झूठा हलफनामा दाखिल करने पर नाराज कोर्ट ने हर्जाना लगाया, एक माह के भीतर देनी होगी राशि

Wed, 24 Dec 2025 02:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 24 Dec 2025 02:19 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में सजायाफ्ता अभियुक्तों की जमानत में झूठा हलफनामा दाखिल कर बाधा डालने पर शिकायतकर्ता मनीष राय पर ढाई लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।

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Displeased court imposes fine for filing false affidavit, amount to be paid within one month
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में सजायाफ्ता अभियुक्तों की जमानत में झूठा हलफनामा दाखिल कर बाधा डालने पर शिकायतकर्ता मनीष राय पर ढाई लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। यह राशि एक माह के अंदर अपीलार्थियों को देनी होगी। भुगतान न होने की स्थिति में आजमगढ़ के डीएम को वसूली कर राशि दिलाने का निर्देश दिया गया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ, न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा की खंडपीठ ने चंद्रशेखर उर्फ घुरहू सरोज और राजेंद्र प्रजापति की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए पारित किया। मामले में शिकायतकर्ता जमानत के विरोध में अर्जी दाखिल कर कहा कि बीमारी का फर्जी दस्तावेज पेशकर जमानत मांगी गई है। जांच में जेल प्रशासन की रिपोर्ट के बाद आरोप निराधार पाए गए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए हर्जाना लगाया। 

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आपराधिक अतिचार के आरोप में कार्रवाई से पहले नोटिस देना अनिवार्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक अतिचार के मामले में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसे नोटिस देना अनिवार्य है। इसके बिना भारतीय दंड संहिता की धारा-447 के तहत की गई कार्यवाही कानूनन सही नहीं है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी नेब्बू लाल उर्फ किशोरी लाल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। जबकि, अन्य धाराओं में मुकदमा जारी रखने की अनुमति दी है।

मामला प्रयागराज के मांडा थाना क्षेत्र का है। याची व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि मकान पर कब्जा करने की नीयत से याची ने जबरन प्रवेश किया गया। पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने समन जारी किया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 

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