High Court : दक्षिणांचल व पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण प्रस्ताव के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण प्रस्ताव के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में किए गए दावे धारणाओं पर आधारित हैं, रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण प्रस्ताव के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में किए गए दावे धारणाओं पर आधारित हैं, रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं है। हालांकि, याची को कानून के अनुसार उचित कार्यवाही करने की स्वतंत्रता दी गई है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने प्रयागराज के मेजा निवासी विजय प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की कंपनी में हिस्सेदारी कम करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि यूपीपीसीएल और चार कंपनियों का प्रबंधन पेशेवर तरीके से किया जाए। साथ ही कंपनी के बोर्ड में केवल तकनीकी योग्यता वाले व्यक्तियों को नियुक्त किया जाए और यूपीपीसीएल की कंपनी से अध्यक्ष का पद समाप्त किया जाए।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि यह कार्यवाही कंपनी अधिनियम की धाराओं का पालन किए बिना की गई थी। कोर्ट ने जनहित याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचियों ने निजीकरण से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए कभी भी प्रतिवादियों से संपर्क नहीं किया। 20 मार्च 2025 के एक पत्र में मुख्य अभियंता ने केवल यह संकेत दिया था कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की तकनीकी मूल्यांकन समिति ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में निजीकरण के लिए बोलीदाताओं की ओर से प्रस्तुत तकनीकी बोलियों का मूल्यांकन किया है। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं पाया और खारिज कर दी।