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गल चुके कागज, धूल में सने रजिस्टर होंगे डिजिटिलाइज्ड

Sat, 29 Apr 2017 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 29 Apr 2017 02:46 AM IST
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Digitized paper will be stored in dust, dust
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
पुराने ढर्रे पर चल रहा माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अब 40 साल पुराने महत्वपूर्ण रजिस्टरों के रिकार्ड को सहेजने की तैयारी कर ली है। गल चुके कागजों के साथ धूल में सने इन रजिस्टरों का परिषद डिजिटिलाइजेशन कराने जा रहा है। पहले चरण में वर्ष 1960 से 1980 तक के रजिस्टरों को डिजिटिलाइज्ड किया जाएगा। इसके बाद वर्ष 1981 से 2000 तक के रजिस्टरों की बारी आएगी। परिषद बोर्ड की बैठक में इस पर सहमति बनने के बाद अब डिजिटिलाइजेशन के लिए शासन से बजट की मांग की गई है।
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कई सरकारी विभागों में पुराने और महत्वपूर्ण रजिस्टर, फाइलों आदि का डिजिटिलाइजेशन किया जा रहा है। इसमें खास तकनीक का प्रयोग होता है।  रजिस्टर, फाइल चाहे जितनी पुरानी हो, छूते ही उसके पन्ने फटते हों, उस पर खास तरह का लेप लगाकर स्कैनिंग की जाती है। इसके बाद उसे हमेशा के लिए कंप्यूटर में सुरक्षित कर दिया जाता है। यूपी बोर्ड में सबसे महत्वपूर्ण हाईस्कूल और इंटर के अंकों और प्रमाण पत्र के अनुक्रमांकवार रजिस्टर हैं। 40 वर्ष पुराने इन रजिस्टरों के जरिए ही अंक पत्रों की द्वितीय प्रतिलिपि तैयार की जाती है। हाईस्कूल और इंटर के छात्रों के अंक चढ़े इन रजिस्टरों को टैबुलेशन रजिस्टर (टीआर) कहा जाता है, जबकि प्रमाण पत्रों वाले रजिस्टर को सार्टिफिकेट फाइल (सीएफ) कहा जाता है। इन्हीं रजिस्टरों के जरिए पुराने मामलों में किसी का अंक पत्र या प्रमाण पत्र खो जाने पर द्वितीय प्रतिलिपि तैयार की जाती है।
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इसके अलावा सरकारी, गैरसरकारी नौकरी कर रहे लोगों की आयु के सत्यापन के लिए भी ये रजिस्टर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। लंबा समय बीतने के साथ इन रजिस्टरों में पन्नों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। वर्ष 1960 से 1970 तक के रजिस्टरों में पन्नों की हालत तो ऐसी हो गई है कि संभाल कर उसे न खोला तो उनके फटने, टुकड़े होने का डर रहता है। ऐसे में उसे हमेशा के लिए सुरक्षित करने के लिए डिजिटिलाइजेशन की योजना बनाई गई है।
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‘पहले चरण में वर्ष 1960 से 1980 तक के टीआर एवं सीएफ का डिजिटिलाइजेशन कराया जाएगा, क्योंकि उनकी स्थिति को देखते हुए सहेजना बेहद जरूरी है। इसके बाद 1980 से वर्ष 2000 तक के टीआर एवं सीएफ को संवारने की तैयारी होगी। बजट स्वीकृत होते ही इसके लिए विशेषज्ञ एंजेसी का चयन किया जाएगा। शैल यादव, सचिव यूपी बोर्ड


यूपी बोर्ड में समय के साथ धीरे-धीरे परिवर्तन हुआ है। कंप्यूटरीकृत अंकपत्र जारी करने की प्रक्रिया 1980 के बाद शुरू हुई हालांकि टीआर एवं सीएफ के रजिस्टर उसके बाद भी तैयार किए जाते थे लेकिन वर्ष 2000 के बाद से काम पूरी तरह से कंप्यूटर में होने लगा सो टीआर, सीएफ रजिस्टर की जरूरत भी खत्म होती चली गई।
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