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तंगहाली ने ले ली रामरती की जान
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Tue, 03 Jan 2017 01:20 AM IST
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कोरांव तहसील के ग्राम पूरा दत्तू के मजरा खौरिया गोबरा में तंगहाली ने महिला की जान ले ली। भीषण ठंड में उसके घर में एक कम्बल तक नहीं था। कोटे का राशन भी नहीं मिलता था। तंगहाली के कारण अक्सर भूखे पेट सोना पड़ता था। चर्चा है कि भूख और ठंड से उसकी मौत हुई। घटना की सूचना मिलने के बाद तहसील प्रशासन ने इसकी जांच शुरू करा दी है।
ग्राम सभा पूरा दत्तू के मजरा खौरिया गोबरा में पिज्जू लाल का घर कोठरी में सीमित है। वह मजदूरी करके अपना और अपनी पत्नी रामरती (40) का पेट पालता था। रामरती की रविवार रात मौत हो गई। घर में खाने की कोई सामग्री नहीं थी। बिस्तर न होने की वजह से दोनों पुआल डालकर सोते थे। आधी रात को रामरती की सांसें थम गईं। पिज्जू सुबह होने का इंतजार करने लगा। सुबह उसने गांव के लोगों को रामरती की मौत के बारे में बताया।
गांव वालों की मदद से पिज्जू ने घर के पास ही रामरती का अंतिम संस्कार कर दिया। गृहस्थी के नाम पर घर में पांच रुपये का नमक का पैकेट, एक डिब्बे में मिट्टी का तेल, पुराना खाली बक्सा, टूटा ताला, एक लोटा, एक थाली, एक करछुल और कुछ बर्तन मिले। पिज्जू कहा कहना है कि वह और उसकी पत्नी तंगहाली में जीवन बिता रहे थे। सरकार की ओर से कम्बल बंटा लेकिन उन्हें नहीं मिला। कोटे का राशन भी कभी नहीं मिला। मामले में कोरांव के एसडीएम कुलदेव सिंह का कहना है कि तहसीलदार को जांच का निर्देश दिए गए हैं। लेखपाल से जांच कराकर आर्थिक स्थिति के आधार पर सरकारी सहायता पीड़ित परिवार को दी जाएगी।
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ग्राम सभा पूरा दत्तू के मजरा खौरिया गोबरा में पिज्जू लाल का घर कोठरी में सीमित है। वह मजदूरी करके अपना और अपनी पत्नी रामरती (40) का पेट पालता था। रामरती की रविवार रात मौत हो गई। घर में खाने की कोई सामग्री नहीं थी। बिस्तर न होने की वजह से दोनों पुआल डालकर सोते थे। आधी रात को रामरती की सांसें थम गईं। पिज्जू सुबह होने का इंतजार करने लगा। सुबह उसने गांव के लोगों को रामरती की मौत के बारे में बताया।
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गांव वालों की मदद से पिज्जू ने घर के पास ही रामरती का अंतिम संस्कार कर दिया। गृहस्थी के नाम पर घर में पांच रुपये का नमक का पैकेट, एक डिब्बे में मिट्टी का तेल, पुराना खाली बक्सा, टूटा ताला, एक लोटा, एक थाली, एक करछुल और कुछ बर्तन मिले। पिज्जू कहा कहना है कि वह और उसकी पत्नी तंगहाली में जीवन बिता रहे थे। सरकार की ओर से कम्बल बंटा लेकिन उन्हें नहीं मिला। कोटे का राशन भी कभी नहीं मिला। मामले में कोरांव के एसडीएम कुलदेव सिंह का कहना है कि तहसीलदार को जांच का निर्देश दिए गए हैं। लेखपाल से जांच कराकर आर्थिक स्थिति के आधार पर सरकारी सहायता पीड़ित परिवार को दी जाएगी।
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