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विवेचक की भूमिका संदिग्ध : अशरफ के साले को क्लीन चिट देने के लिए ‘ज्योतिष’ बन गई धूमनगंज पुलिस

Mon, 02 Oct 2023 06:23 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 02 Oct 2023 06:23 AM IST
सार

माफिया अतीक अहमद के भाई पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ के साले अब्दुल समद उर्फ सद्दाम के मुकदमे की जांच करने वाले विवेचकों का रवैया काफी लचर रहा। सूत्रों की माने तो वह सद्दाम को बचाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने सद्दाम को न तो खोजा न ही खोजने की कोशिश ही की। 

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Dhumanganj police became 'astrologer' to give clean chit to Ashraf's brother-in-law
सद्दाम - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

माफिया खालिद अजीम उर्फ अशरफ के जिस साले सद्दाम को तीन दिन पहले गिरफ्तार किया गया, उसे क्लीन चिट देने के लिए धूमनगंज पुलिस ‘ज्योतिष’ बन गई। प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्द कहे जाने से संबंधित वीडियो वायरल करने के मामले में उस पर दर्ज मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाते हुए विवेचक ने हैरान कर देने वाली टिप्पणी अंकित की। लिखा कि तमाम प्रयासों के बावजूद उसका पता नहीं चला और न ही भविष्य में पता चलने की कोई उम्मीद है।

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सूत्राें का कहना है कि इस मुकदमे की विवेचना धूमनगंज थाने में तैनात रहे पांच विवेचकों ने की। इसके साथ ही मुकदमे में साइबर क्राइम सेल व सर्विलांस सेल से भी मदद ली गई। वादी का बयान के साथ ही गवाहों के भी बयान दर्ज किए गए। 30 सितंबर 2020 को मुकदमा दर्ज होने के बाद करीब 2.5 साल तक विवेचना चलती रही। इसके बावजूद विवेचक सद्दाम का पता नहीं लगा पाए। चौंकाने वाली बात यह कि पता न लगने के साथ ही उन्होंने यहां तक लिख दिया कि भविष्य में भी उसका पता चलने की कोई उम्मीद नहीं है।

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नाम व वल्दियत संग पता भी था दर्ज


सूत्रों का कहना है कि राजरूपपुर चौकी के तत्कालीन प्रभारी चंद्रभानु की ओर से लिखाए गए इस मुकदमे में न सिर्फ आरोपी का नाम था। बल्कि उसके पिता के नाम के साथ ही वर्तमान के अलावा स्थायी पता भी दर्ज था। वर्तमान पता राजरूपपुर जबकि स्थायी पता हटवा, पूरामुफ्ती लिखाया गया था। इसके बावजूद विवेचक उसका पता कैसे नहीं लगा पाए, यह बड़ा सवाल है।

निगरानी करने वालों की क्यों बंद रहीं आंखें

इस प्रकरण में विवेचक की भूमिका संदिग्ध है, तो पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों पर भी सवाल है। आखिर उन्होंने इस संबंध में विवेचक से पूछताछ क्यों नहीं की। या विवेचना में गड़बड़ी मिलने पर इसे सुधार के लिए वापस क्यों नहीं भेजा। जानकारों का कहना है कि निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से जांच हो तो सच्चाई सामने आ सकती है।

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प्रशासनिक आधार पर हो चुका है ट्रांसफर
 

इस मामले में जिस विवेचक इंस्पेक्टर वजीउल्लाह खान ने सद्दाम को क्लीन चिट दी, उसका प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर हो चुका है। उमेश पाल हत्याकांड के बाद जिले से एक दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों का प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर हुआ, उनमें वजीउल्लाह का नाम भी शामिल था। चर्चा रही थी कि अतीक गिरोह से साठगांठ की शिकायत मिलने पर गोपनीय जांच कराई गई। शिकायत सही मिलने पर ही इनका ट्रांसफर किया गया। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। हालांकि सवाल अन्य विवेचकों की कार्यप्रणाली को लेकर भी उठ रहे हैं।

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