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High Court : अनजाने में आरक्षण की गलत श्रेणी दर्ज होने पर अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित करना गलत
Sun, 28 Jun 2026 06:44 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 28 Jun 2026 06:44 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन फॉर्म में अनजाने से आरक्षण की गलत श्रेणी दर्ज होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन फॉर्म में अनजाने से आरक्षण की गलत श्रेणी दर्ज होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। गलती को समय रहते आयोग को सूचित कर देता है और अनुचित लाभ नहीं मिला है तो उसे परीक्षा में शामिल होने का पूरा अधिकार है।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने उप्र लोक सेवा आयोग(यूपीपीएससी) की सहायक लोक अभियोजन अधिकारी (एपीओ)-2025 परीक्षा की अभ्यर्थी मनीषा गौर को परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है। उसका परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखा जाएगा, जो कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन होगा।
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याची ने एपीओ की प्रारंभिक परीक्षा का आवेदन भरते वक्त अनजाने में स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित उप-श्रेणी का चयन कर लिया था। अपनी गलती का पता चलने पर उन्होंने प्रवेश पत्र जारी होने के तुरंत बाद 13 मार्च 2026 को आयोग को लिखित सूचना दे दी थी। हालांकि, मुख्य परीक्षा के आवेदन में भी त्रुटि के कारण आयोग ने उनकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी थी। इसके खिलाफ उन्हाेंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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