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डीएलएड : खोजे नहीं मिल रहे छात्र, 25 से ज्यादा कॉलेज मान्यता छोड़ने को तैयार
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परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए डीएलएड कोर्स से ज्यादातर छात्र दूर होते जा रहे हैं। एक भी प्रवेश न होने से गौतमबुद्धनगर, आगरा, उन्नाव, कानपुर समेत अन्य जिलों के 25 से ज्यादा प्राइवेट कॉलेजों ने मान्यता खत्म करने के लिए आवेदन किया है।
इस वर्ष प्रदेश में एक लाख से ज्यादा सीटों के खाली रहने का अनुमान है। इसके अलावा कई और कॉलेज हैं जहां पर एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया। नए सत्र वर्ष 2026 के आंकड़ों की बात की जाए तो प्रदेश में डीएलएड की कुल 2,39,500 सीटें हैं जिसमें महज 1,70,332 अभ्यर्थियों ने एडमिशन के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें भी 18130 अभ्यर्थियों ने फीस नहीं जमा की जिससे 1,52,202 अभ्यर्थी ही बचे हैं।
इस स्थिति में करीब एक लाख सीटों पर दाखिला नहीं हो पाएगा। इन आंकड़ों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्रों को डीएलएड कोर्स नहीं भा रहा है। दरअसल, पहले बीटीसी करने के बाद प्राथमिक विद्यालयाें में शिक्षक बनना आसान होता था। मौजूदा समय में प्रदेश भर में लाखों की संख्या में छात्र डीएलएड करने के बाद नौकरी की राह देख रहे हैं।
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पहले की अपेक्षा डीएलएड में कम छात्र प्रवेश ले रहे हैं। यही कारण है कि करीब 25 डीएलएड कॉलेज संचालकों ने आवेदन कर काॅलेज से इस कोर्स की मान्यता खत्म करने की बात कही है। -राजेंद्र प्रताप, सचिव, उप्र परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज
पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं 1.43 लाख सीटें
वर्ष 2025 में भी यही स्थिति रही। पिछले वर्ष 2,39,500 सीटों के सापेक्ष 1,38, 860 लोगों ने आवेदन किए थे। इसमें 1.25 लाख अभ्यर्थियों ने फीस जमा किए थे लेकिन महज 95,769 अभ्यर्थी ही रहे जिन्होंने कॉलेज में प्रवेश लिया। ये सभी प्रवेश प्रदेश के कुल 3103 प्राइवेट कॉलेज, 66 डायट व राजकीय कॉलेज और 253 अल्पसंख्यक कॉलेजों में हुए थे।
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इस वर्ष प्रदेश में एक लाख से ज्यादा सीटों के खाली रहने का अनुमान है। इसके अलावा कई और कॉलेज हैं जहां पर एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया। नए सत्र वर्ष 2026 के आंकड़ों की बात की जाए तो प्रदेश में डीएलएड की कुल 2,39,500 सीटें हैं जिसमें महज 1,70,332 अभ्यर्थियों ने एडमिशन के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें भी 18130 अभ्यर्थियों ने फीस नहीं जमा की जिससे 1,52,202 अभ्यर्थी ही बचे हैं।
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इस स्थिति में करीब एक लाख सीटों पर दाखिला नहीं हो पाएगा। इन आंकड़ों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्रों को डीएलएड कोर्स नहीं भा रहा है। दरअसल, पहले बीटीसी करने के बाद प्राथमिक विद्यालयाें में शिक्षक बनना आसान होता था। मौजूदा समय में प्रदेश भर में लाखों की संख्या में छात्र डीएलएड करने के बाद नौकरी की राह देख रहे हैं।
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पहले की अपेक्षा डीएलएड में कम छात्र प्रवेश ले रहे हैं। यही कारण है कि करीब 25 डीएलएड कॉलेज संचालकों ने आवेदन कर काॅलेज से इस कोर्स की मान्यता खत्म करने की बात कही है। -राजेंद्र प्रताप, सचिव, उप्र परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज
पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं 1.43 लाख सीटें
वर्ष 2025 में भी यही स्थिति रही। पिछले वर्ष 2,39,500 सीटों के सापेक्ष 1,38, 860 लोगों ने आवेदन किए थे। इसमें 1.25 लाख अभ्यर्थियों ने फीस जमा किए थे लेकिन महज 95,769 अभ्यर्थी ही रहे जिन्होंने कॉलेज में प्रवेश लिया। ये सभी प्रवेश प्रदेश के कुल 3103 प्राइवेट कॉलेज, 66 डायट व राजकीय कॉलेज और 253 अल्पसंख्यक कॉलेजों में हुए थे।