{"_id":"5d2ca47d8ebc3e6ca302aaf0","slug":"decision-on-the-return-of-case-from-carvaria-brothers-safe-city-news-ald249485524","type":"story","status":"publish","title_hn":"करवरिया बंधुओं से केस वापसी पर निर्णय सुरक्षित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करवरिया बंधुओं से केस वापसी पर निर्णय सुरक्षित
विज्ञापन
Decision on the return of case from Carvaria brothers safe
जवाहर पंडित हत्याकांड
0000000000000000000
करवरिया बंधुओं से केस वापसी पर फैसला सुरक्षित
प्रयागराज। जवाहर पंडित हत्याकांड का मुकदमा करवरिया बंधुओं से वापस लेने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से लंबी बहस की गई। राज्य सरकार और उदयभान करवरिया की याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने की ।
इससे पूर्व अधीनस्थ न्यायालय ने मुकदमा वापसी सरकार की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि मुकदमे की सुनवाई अंतिम चरण में है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिदिन सुनवाई कर शीघ्र निर्णय लेने का आदेश दिया है। ऐसे में मुकदमा वापसी का औचित्य नहीं है। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और एजीए प्रथम एके संड ने सरकार का पक्ष रखा। सरकार का कहना है कि मुकदमा वापसी का निर्णय लोकहित है। इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, जिससे कि सजा हो सके। याचीगण पूर्व विधायक और पूर्व सांसद हैं। साक्ष्य के अभाव में सजा होने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।
वादी मुकदमा विजमा यादव की ओर से अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि सुनवाई लगभग पूरी हो चुकी है। सभी गवाहों के बयान हो चुके हैं। अभियुक्त गण का बयान भी दर्ज हो चुका है। मुकदमा अब निर्णय की स्थिति में। ऐसी स्थिति में वाद वापसी का निर्णय उचित नहीं है। इसमें कोई लोकहित नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
0000000000000000000
करवरिया बंधुओं से केस वापसी पर फैसला सुरक्षित
प्रयागराज। जवाहर पंडित हत्याकांड का मुकदमा करवरिया बंधुओं से वापस लेने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से लंबी बहस की गई। राज्य सरकार और उदयभान करवरिया की याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने की ।
इससे पूर्व अधीनस्थ न्यायालय ने मुकदमा वापसी सरकार की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि मुकदमे की सुनवाई अंतिम चरण में है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिदिन सुनवाई कर शीघ्र निर्णय लेने का आदेश दिया है। ऐसे में मुकदमा वापसी का औचित्य नहीं है। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और एजीए प्रथम एके संड ने सरकार का पक्ष रखा। सरकार का कहना है कि मुकदमा वापसी का निर्णय लोकहित है। इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, जिससे कि सजा हो सके। याचीगण पूर्व विधायक और पूर्व सांसद हैं। साक्ष्य के अभाव में सजा होने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।
विज्ञापन
वादी मुकदमा विजमा यादव की ओर से अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि सुनवाई लगभग पूरी हो चुकी है। सभी गवाहों के बयान हो चुके हैं। अभियुक्त गण का बयान भी दर्ज हो चुका है। मुकदमा अब निर्णय की स्थिति में। ऐसी स्थिति में वाद वापसी का निर्णय उचित नहीं है। इसमें कोई लोकहित नहीं है।
विज्ञापन