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कर निर्धारण की तिथि न बढ़ी तो होगा उत्पीड़न
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 29 Aug 2016 02:16 AM IST
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इलाहाबाद। वाणिज्य कर विभाग में वित्तीय वर्ष 2013-14 के मामलों का कर निर्धारण सितंबर तक करने के लिए मुख्यालय से जारी फरमान व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गया है। वर्तमान में विभाग में अफसरों के तबादलों का दौर चल रहा है। डिप्टी कमिश्नर के तबादले की सूची जारी हो चुकी है, लेकिन असिस्टेंट कमिश्नर और वाणिज्य कर अधिकारी (सीटीओ) के तबादले अभी नहीं हुए हैं। तबादले के बाद अफसर कब ज्वाइनिंग करेंगे और कब काम शुरू कर करेंगे, इसे लेकर व्यापारी असमंजस में हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में कर निर्धारण के बजाए नोटिस जारी किया जाएगा, जिससे व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ेगा। इस समस्या को देखते हुए व्यापारी कर निर्धारण के लिए पर्याप्त समय देने की मांग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति समेत कई व्यापारियों संगठन इस संबंध में जल्द वाणिज्य कर कमिश्नर से भी मुलाकात करेंगे।
पूरे प्रदेश में इन दिनों वाणिज्य कर विभाग वित्तीय वर्ष 2013-14 के मामलों में कर निर्धारण कर रहा है। एक्ट के तहत इस वित्तीय वर्ष का कर निर्धारण 31 मार्च 2017 तक होना है, लेकिन मुख्यालय ने सभी मामले सितंबर तक निपटाने का फरमान जारी कर दिया है, जबकि वर्तमान में विभाग में तबादलों का दौर चल रहा है। अभी असिस्टेंट कमिश्नर, सीटीओ की सूची नहीं जारी हुई है। सूची जारी होने के बाद उनकी ज्वाइनिंग में हफ्ता-दस दिन लगेगा। ऐसे में सितंबर तक का समय बीतने पर आ जाएगा सो ज्वाइनिंग के तुरंत बाद मुख्यालय के फरमान के क्रम में नए अफसर व्यापारियों का पक्ष जानने के बजाए नोटिस जारी कर एक पक्षीय कर निर्धारण कर देंगे। फिर व्यापारियों को न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति से उनका अनावश्यक उत्पीड़न बढ़ेगा।
इस समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा ने कमिश्नर मुकेश मेश्राम को पत्र लिखकर कर निर्धारण के लिए सितंबर तक की बाध्यता खत्म करने की मांग की है। समिति, गल्ला तिलहन व्यापार मंडल समेत प्रदेश भर के अन्य संगठनों के प्रतिनिधि इस मामले में जल्द लखनऊ में कमिश्नर से भी मुलाकात करेंगे।
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पूरे प्रदेश में इन दिनों वाणिज्य कर विभाग वित्तीय वर्ष 2013-14 के मामलों में कर निर्धारण कर रहा है। एक्ट के तहत इस वित्तीय वर्ष का कर निर्धारण 31 मार्च 2017 तक होना है, लेकिन मुख्यालय ने सभी मामले सितंबर तक निपटाने का फरमान जारी कर दिया है, जबकि वर्तमान में विभाग में तबादलों का दौर चल रहा है। अभी असिस्टेंट कमिश्नर, सीटीओ की सूची नहीं जारी हुई है। सूची जारी होने के बाद उनकी ज्वाइनिंग में हफ्ता-दस दिन लगेगा। ऐसे में सितंबर तक का समय बीतने पर आ जाएगा सो ज्वाइनिंग के तुरंत बाद मुख्यालय के फरमान के क्रम में नए अफसर व्यापारियों का पक्ष जानने के बजाए नोटिस जारी कर एक पक्षीय कर निर्धारण कर देंगे। फिर व्यापारियों को न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति से उनका अनावश्यक उत्पीड़न बढ़ेगा।
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इस समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा ने कमिश्नर मुकेश मेश्राम को पत्र लिखकर कर निर्धारण के लिए सितंबर तक की बाध्यता खत्म करने की मांग की है। समिति, गल्ला तिलहन व्यापार मंडल समेत प्रदेश भर के अन्य संगठनों के प्रतिनिधि इस मामले में जल्द लखनऊ में कमिश्नर से भी मुलाकात करेंगे।
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