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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Crowds are just a count, make them tourists too, fewer people are reaching historical sites.

Prayagraj : भीड़ तो बस गिनती है, इन्हें पर्यटक भी बनाइए, ऐतिहासिक स्थलों तक कम ही पहुंच रहे लोग

Sat, 07 Feb 2026 04:11 PM IST
विनोद सिंह योगेश नारायण दीक्षित, प्रयागराज
योगेश नारायण दीक्षित, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 Feb 2026 04:11 PM IST
सार

Prayagraj News : प्रयागराज में लेटे हनुमानजी, मनकामेश्वर और द्वादश माधव के दर्शन करने आम दिनों में भी आसपास के जिलों तक के श्रद्धालु आते हैं। शृंगवेरपुर धाम भी रामभक्त श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। लेकिन, धार्मिक स्थलों पर आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ प्रयागराज के ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों तक कम ही पहुंच पा रही है। जबकि यहां आजादी की लड़ाई के केंद्र में रहीं ऐसी धरोहरें हैं जिन्हें देखकर नई पीढ़ी गर्व का अनुभव करेगी। 

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Crowds are just a count, make them tourists too, fewer people are reaching historical sites.
साइबेरियन को देखने के लिए घाट और गंगा किनारे जुटते हैं लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीर्थराज प्रयाग फिर चर्चा में है। यहां 2025 के महाकुंभ का ज्वार उतरा नहीं था कि 2026 के माघ मेले में उमड़ी भीड़ ने नया कीर्तिमान रच दिया। जनवरी की भरी सर्दी में एक माह तक चले मेले के प्रमुख स्नान पर्वों पर जमकर श्रद्धालु उमड़े। फरवरी के पहले तीन दिन भी संगम स्नान करने वालों का तांता लगा रहा। माघी पूर्णिमा का स्नान पहली फरवरी को हुआ और इसी के बाद कल्पवासी संगम से लौट

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चुके हैं। प्रशासनिक दावों में श्रद्धालुओं की संख्या का आंकड़ा 21 करोड़ के पार हो गया है। अभी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का स्नान बाकी है। इस स्नान के लिए भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का अनुमान है।
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इतने बड़े आयोजन और इतनी भीड़ ने प्रयागराज को देशभर में सुर्खियों में रखा। लेकिन, इस शहर के कारोबार जगत और पर्यटक स्थलों के लिए यह भीड़ सिर्फ गिनती के लिए है। सैलानी बढ़ने जैसी उपलब्धि हासिल करने से संगमनगरी अब भी दूर है। प्रयागराज के कारोबारी और होटल व्यवसायी इस भीड़ को पर्यटन उद्योग का हिस्सा मानने से हिचकते हैं।
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जिस मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज समेत अन्य घाटों पर 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं के पवित्र डुबकी लगाने का दावा मेला प्रशासन की ओर से किया जा रहा था, उस दिन शहर के 40 फीसदी होटलों में आधी भरावट भी नहीं थी। सिविल लाइंस के आसपास के होटल और गेस्ट हाउस आठ-दस सैलानियों का मुंंह ताक रहे थे। यही हाल शहर के बाजारों का रहा। चारों तरफ लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों और उससे पैदा हुए जाम ने लगभग हर बड़ी बाजार से ग्राहकों को बाहर कर दिया।


काम कठिन नहीं, इच्छाशक्ति की जरूरत

सिविल लाइंस के व्यापारी नेता और बड़े कारोबारी सुशील खरबंदा का मानना है कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारा जाए और ऐतिहासिक स्थलों को जाम के जाल से निजात मिले तो प्रयागराज पुराना गौरव पा सकेगा। इससे प्रयागराज को धार्मिक नगरी के साथ पर्यटन नगरी भी बनाया जा सकेगा। फिर यहां का हर कारोबार चमकेगा और रोजगार के अवसर बढ़ सकेंगे। यह काम कठन नहीं है, बस राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।

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