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करोड़ों रुपये बहे, नहीं सुधर सकी संगमनगरी की बिजली व्यवस्था
Mon, 19 Jul 2021 06:46 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 19 Jul 2021 06:46 AM IST
सार
- पांच साल में बिजली आपूर्ति में सुधार पर 413 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी हालात बदतर
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विस्तार
करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी शहर की बिजली आपूर्ति में रत्ती भर सुधार नहीं आ सका है। ओवरलोडिंग, ट्रिपिंग और अंडरग्राउंड केबलों के जलने से सिविल लाइंस से लेकर पुराने शहर की सघन बस्तियों तक हर रोज घंटों बत्ती गुल हो रही है। एक तरफ केबल जोड़ी जाती है और दूसरी ओर ओवरलोडिंग से तार सुलग जा रहा है। कहा जा रहा है कि घटिया और क्षमता विहीन केबल डाले जाने और ट्रांसफारमरों का लोड न बढ़ाए जाने की वजह से ऐसी नौबत आई है। अगर इस मामले की जांच कराई जाए तो कई अफसरों को गला नपने से इंकार नहीं किया जा सकता।
पिछले पांच वर्षों में शहर की विजली व्यवस्था में सुधार के नाम पर 413 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। टाटा पॉवर कंपनी को शहर में अंडरग्राउंड केबल डालने और ट्रांसफारमरों की क्षमता बढ़ाने का काम दिया गया था। यूपीपीसीएल के कांस्ट्रक्शन डिवीजन की ओर से इस काम को कराया जाना था, लेकिन रकम खर्च होने के बाद भी स्थिति जस की तस रह गई।
इसके बाद कुंभ -2019 के दौरान अंडरग्राउंड केबल बिछाने और शहर की बिजली आपूर्ति में सुधार लाने के लिए अलग-अलग कंपनियों से फिर 90 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड केबल बिछाने का काम कराया गया, लेकिन इसमें भी क्षमता विहीन केबिलें बिछाई गईं और नतीजा यह हुआ कि करेली, करेलाबाग, कैंट से लेकर कल्याणी देवी तक हर दूसरे दिन अंडरग्राउंड केबल जल रही है और फाल्ट बनने में कभी 24 घंटे तो कभी 48 घंटे से भी अधिक समय लग जा रहा है।
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इसी तरह पीडीए की ओर से स्मार्ट सिटी योजना के तहत बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 28 करोड़ और नगर निगम की ओर से तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन बिजली आपूर्ति को लेकर शहरवासियों की दिक्कतें जैसी पहले थीं, वैसी ही अब भी बनी हुई हैं। कहा जा रहा है कि अंडरग्राउंड केबल लोड नहीं संभाल पा रही है। शहर के ज्यादातर ट्रांसफारमर ओवरलोडेड हैं। इंसुलेटर भी घटिया किस्म के लगाए गए हैं। ऐसे में जनता को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
अलग-अलग कंपनियों की ओर से शहर में कराए जा रहे निर्माण कार्यों की वजह से केबल कटने से फाल्ट हो रहा है। इसके अलावा ओवरलोडिंग भी एक कारण है। ओवरलोड ट्रांसफारमरों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू करा दिया जाएगा। वीके गंगवार, मुख्य अभियंता।
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पिछले पांच वर्षों में शहर की विजली व्यवस्था में सुधार के नाम पर 413 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। टाटा पॉवर कंपनी को शहर में अंडरग्राउंड केबल डालने और ट्रांसफारमरों की क्षमता बढ़ाने का काम दिया गया था। यूपीपीसीएल के कांस्ट्रक्शन डिवीजन की ओर से इस काम को कराया जाना था, लेकिन रकम खर्च होने के बाद भी स्थिति जस की तस रह गई।
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इसके बाद कुंभ -2019 के दौरान अंडरग्राउंड केबल बिछाने और शहर की बिजली आपूर्ति में सुधार लाने के लिए अलग-अलग कंपनियों से फिर 90 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड केबल बिछाने का काम कराया गया, लेकिन इसमें भी क्षमता विहीन केबिलें बिछाई गईं और नतीजा यह हुआ कि करेली, करेलाबाग, कैंट से लेकर कल्याणी देवी तक हर दूसरे दिन अंडरग्राउंड केबल जल रही है और फाल्ट बनने में कभी 24 घंटे तो कभी 48 घंटे से भी अधिक समय लग जा रहा है।
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इसी तरह पीडीए की ओर से स्मार्ट सिटी योजना के तहत बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 28 करोड़ और नगर निगम की ओर से तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन बिजली आपूर्ति को लेकर शहरवासियों की दिक्कतें जैसी पहले थीं, वैसी ही अब भी बनी हुई हैं। कहा जा रहा है कि अंडरग्राउंड केबल लोड नहीं संभाल पा रही है। शहर के ज्यादातर ट्रांसफारमर ओवरलोडेड हैं। इंसुलेटर भी घटिया किस्म के लगाए गए हैं। ऐसे में जनता को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
अलग-अलग कंपनियों की ओर से शहर में कराए जा रहे निर्माण कार्यों की वजह से केबल कटने से फाल्ट हो रहा है। इसके अलावा ओवरलोडिंग भी एक कारण है। ओवरलोड ट्रांसफारमरों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू करा दिया जाएगा। वीके गंगवार, मुख्य अभियंता।