{"_id":"585ae7d94f1c1b1864e3b2b0","slug":"lee-tractor-near-uncontrollable-life-of-the-home-guard-station","type":"story","status":"publish","title_hn":"थाने के समीप बेकाबू ट्रैक्टर ने ली होमगार्ड की जान","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
थाने के समीप बेकाबू ट्रैक्टर ने ली होमगार्ड की जान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 22 Dec 2016 02:12 AM IST
विज्ञापन
accident
- फोटो : graphic
धूमनगंज इलाके में बुधवार सुबह जीटी रोड पर थाने से दस कदम की दूरी पर नो इंट्री में घुसे ट्रैक्टर ने ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड मनोज शुक्ला (32) को कुचल दिया। ट्रैक्टर ट्राली के नीचे आने से होमगार्ड की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया। दुर्घटना के बाद अफरातफरी मच गई। खबर पाकर टीआई, होमगार्ड कमांडेंट मौके पर पहुंचे। अनहोनी की खबर से होमगार्ड के घर कोहराम मचा है।
सरायइनायत में लीलापुर निवासी दुर्ग विजय शुक्ला आईटीआई से एमई के पद से रिटायर हैं। उनके तीन बेटों में बड़ा अरुण शुक्ला दुबई में नौक री करता है। जबकि छोटा बेटा पवन शुक्ला सेना में कैप्टन है और उसकी तैनाती पठानकोट में है। दूसरे नंबर का मनोज शुक्ला (32) ट्रैफिक होमगार्ड था। वह झूंसी के हवेलिया में परिवार रहता था। इन दिनों उसकी ड्यूटी धूमनगंज इलाके में थी। बुधवार सुबह वह ड्यूटी पर था। चौराहे पर जाम न लगे इसके लिए सवारी वाहनों को चौराहे से हटा रहा था। सुबह लगभग साढ़े नौ बजे धूमनगंज की तरफ से आए बालू लदे ट्रैक्टर ने मनोज को टक्कर मार दी। मनोज सड़क पर गिरा और ट्रैक्टर ट्राली के नीचे आ गया। ट्रैक्टर से कुचलकर होमगार्ड की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद जीटी रोड पर अफरातफरी मच गई। दुर्घटना की खबर पाकर एसपी ट्रैफिक निहारिका शर्मा, टीआई अशोक मिश्र, होमगार्ड कमांडेंट देवव्रत सिंह सिंह, प्लाटून कमांडर और साथी होमगार्ड घटनास्थल पर पहुंचे। धूमनगंज पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। स्थानीय लोगों और कारोबारियों में दुर्घटना को लेकर आक्रोश था। उनका आरोप था कि सुबह पांच बजे से रात 11 बजे तक नोइंट्री होने के बाद भी दिन भारी वाहन शहर की सीमा में घुसते रहते हैं। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत ही इस हादसे के लिए जिम्मेदार है। वसूली की आड़ में भारी वाहन शहर की सीमा में दिनभर प्रवेश करते रहते हैं।
विज्ञापन
होमगार्ड मनोज शुक्ला तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसके दोनो भाई बाहर रहते हैं। वह ही मां-बाप के साथ रहता था। बुधवार सुबह पुलिस ने अनहोनी की खबर मनोज के घरवालोें को दी तो कोहराम मच गया। घरवालों पिता दुर्गविजय तो यकीन नहीं कर पा रहे थे कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। मीना तो पति के मौत की खबर सुनकर अचेत हो गई। मां पदमा बेटे के गम में रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। बुधवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद मनोज का शव घर पहुंचा तो घरवालों का विलास सुनकर वहां जुटे लोगों की भी आंखें नम हो गई।
विज्ञापन
सरायइनायत में लीलापुर निवासी दुर्ग विजय शुक्ला आईटीआई से एमई के पद से रिटायर हैं। उनके तीन बेटों में बड़ा अरुण शुक्ला दुबई में नौक री करता है। जबकि छोटा बेटा पवन शुक्ला सेना में कैप्टन है और उसकी तैनाती पठानकोट में है। दूसरे नंबर का मनोज शुक्ला (32) ट्रैफिक होमगार्ड था। वह झूंसी के हवेलिया में परिवार रहता था। इन दिनों उसकी ड्यूटी धूमनगंज इलाके में थी। बुधवार सुबह वह ड्यूटी पर था। चौराहे पर जाम न लगे इसके लिए सवारी वाहनों को चौराहे से हटा रहा था। सुबह लगभग साढ़े नौ बजे धूमनगंज की तरफ से आए बालू लदे ट्रैक्टर ने मनोज को टक्कर मार दी। मनोज सड़क पर गिरा और ट्रैक्टर ट्राली के नीचे आ गया। ट्रैक्टर से कुचलकर होमगार्ड की मौके पर ही मौत हो गई।
विज्ञापन
हादसे के बाद जीटी रोड पर अफरातफरी मच गई। दुर्घटना की खबर पाकर एसपी ट्रैफिक निहारिका शर्मा, टीआई अशोक मिश्र, होमगार्ड कमांडेंट देवव्रत सिंह सिंह, प्लाटून कमांडर और साथी होमगार्ड घटनास्थल पर पहुंचे। धूमनगंज पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। स्थानीय लोगों और कारोबारियों में दुर्घटना को लेकर आक्रोश था। उनका आरोप था कि सुबह पांच बजे से रात 11 बजे तक नोइंट्री होने के बाद भी दिन भारी वाहन शहर की सीमा में घुसते रहते हैं। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत ही इस हादसे के लिए जिम्मेदार है। वसूली की आड़ में भारी वाहन शहर की सीमा में दिनभर प्रवेश करते रहते हैं।
विज्ञापन
होमगार्ड मनोज शुक्ला तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसके दोनो भाई बाहर रहते हैं। वह ही मां-बाप के साथ रहता था। बुधवार सुबह पुलिस ने अनहोनी की खबर मनोज के घरवालोें को दी तो कोहराम मच गया। घरवालों पिता दुर्गविजय तो यकीन नहीं कर पा रहे थे कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। मीना तो पति के मौत की खबर सुनकर अचेत हो गई। मां पदमा बेटे के गम में रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। बुधवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद मनोज का शव घर पहुंचा तो घरवालों का विलास सुनकर वहां जुटे लोगों की भी आंखें नम हो गई।