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किसान की हत्या, थानेदार समेत पुलिसवालों की पिटाई
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 02 Apr 2017 02:10 AM IST
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Murder
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शंकरगढ़ क्षेत्र के अकौड़िया गांव में छह दिन से लापता किसान महेंद्र प्रताप सिंह का शव शनिवार सुबह खेत में मिलने पर भड़के लोगों ने खूब बवाल किया। कत्ल की आशंका जताने पर भी पुलिस ने कार्रवाई की बजाय इसे सुसाइड करार देने की कोशिश की थी, जिससे आक्रोशित लोगों ने पुलिस दल पर ही हमला कर दिया। थानेदार और दरोगा समेत एक सिपाही को घेरकर पीट दिया। किसी तरह बचकर भागे पुलिसवालों ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। अफसरों ने दरोगा और सिपाही को निलंबित करने का भरोसा दिया तब जाकर पुलिस शव उठा सकी। पुलिस ने कत्ल में संदिग्ध एक महिला को हिरासत में लिया है।
अकौड़िया गांव निवासी 50 वर्षीय किसान महेंद्र प्रताप सिंह 25 मार्च की रात करीब आठ बजे घर से खलिहान के लिए निकले। दूसरे दिन सुबह घर नहीं लौटने पर उनकी तलाश की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। तीसरे रोज बेटे विनय सिंह ने शंकरगढ़ थाने में अपहरण की तहरीर दी, मगर पुलिस ने गुमशुदगी लिखी। 27 की शाम तक महेंद्र के मोबाइल पर रिंग होती रही, लेकिन कॉल नहीं रिसीव हुई। परिजन पुलिस चौकी का चक्कर लगाते रहे। शनिवार सुबह करीब आठ बजे खेत में सरसों की फसल काट रहे मजदूरों को बदबू का अहसास हुआ। संशकित होकर मजदूर खेत के भीतर गए तो वहां महेंद्र प्रताप का शव दिखा। खबर फैली तो परिजनों के साथ ही गांव के लोग जुट गए।
खबर पाकर शंकरगढ़ थानाध्यक्ष संतोष शर्मा, उपनिरीक्षक इश्तहाक अहमद पुलिस बल के साथ पहुंच गए। मारे गए किसान के परिवार के लोग गुस्से से उबल रहे थे। उनमें इस बात की नाराजगी थी कि शिकायत के बाद पांच रोज में पुलिस ने कुछ नहीं किया, वरना कातिल अब तक पकड़ लिए जाते। पुलिसवालों ने एक और करतूत यह कर दी कि महेंद्र के कपड़ों की तलाशी के दौरान जेब में मिले निमंत्रण पत्र को सुसाइड नोट बता दिया, मगर जब लोगों ने खुद उसे देखा तो पता चला कि वह हकीकत में निमंत्रण पत्र है।
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इस पर भीड़ ने पुलिसवालों को घेरकर अपशब्द कहते हुए धक्कामुक्की शुरू कर दी। एक सिपाही के साथ ही थानेदार और दरोगा को भीड़ ने पीट दिया। किसी तरह पुलिसवाले वहां से जान बचाकर भागे। वायरलेस पर सूचना प्रसारित होने पर एसपी यमुनापार अशोक कुमार वहां सीओ बारा केजी सिंह, एसडीएम राजकुमार द्विवेदी तथा कई कई थानों की फोर्स के साथ पहुंच गए। किसी तरह भीड़ को नियंत्रित कर पुलिस ने किसान महेंद्र प्रताप का शव कब्जे में लेने की कोशिश की, लेकिन तीखे विरोध के कारण कामयाबी नहीं मिली। आखिरकार शाम साढ़े पांच बजे एडीएम प्रशासन ने आकर भरोसा दिया कि दरोगा इश्तेहाक अहमद और सिपाही शिवकुमार पटेल को निलंबित किया जाएगा तब जाकर पुलिस शव को सीलकर पोस्टमार्टम हाउस भेज सकी।
शव के निरीक्षण में पता चला कि महेंद्र प्रताप के सिर, पेट पर चाकू से वार किए गए थे। चेहरा और शरीर झुलसा था। आशंका है कि तेजाब डालकर शिनाख्त मिटाने की कोशिश की गई थी। मौके पर सरसों की फसल काफी हद तक कुचली थी जिससे शक है कि महेंद्र प्रताप का कत्ल वहीं किया गया। कातिलों से महेंद्र का काफी संघर्ष हुआ था। घटनास्थल पर खोजी कुत्ते को लाया गया तो वह करीब आधा किलोमीटर दूर वहां पहुंचा जहां एक लेडीज चप्पल पड़ा था। परिजनों ने एक किलोमीटर दूर बसहरा उपहरहार गांव की शबनम पर शक जताया। सीओ बारा ने बताया कि महिला को हिरासत में लेकर घटना की जांच की जा रही है।
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अकौड़िया गांव निवासी 50 वर्षीय किसान महेंद्र प्रताप सिंह 25 मार्च की रात करीब आठ बजे घर से खलिहान के लिए निकले। दूसरे दिन सुबह घर नहीं लौटने पर उनकी तलाश की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। तीसरे रोज बेटे विनय सिंह ने शंकरगढ़ थाने में अपहरण की तहरीर दी, मगर पुलिस ने गुमशुदगी लिखी। 27 की शाम तक महेंद्र के मोबाइल पर रिंग होती रही, लेकिन कॉल नहीं रिसीव हुई। परिजन पुलिस चौकी का चक्कर लगाते रहे। शनिवार सुबह करीब आठ बजे खेत में सरसों की फसल काट रहे मजदूरों को बदबू का अहसास हुआ। संशकित होकर मजदूर खेत के भीतर गए तो वहां महेंद्र प्रताप का शव दिखा। खबर फैली तो परिजनों के साथ ही गांव के लोग जुट गए।
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खबर पाकर शंकरगढ़ थानाध्यक्ष संतोष शर्मा, उपनिरीक्षक इश्तहाक अहमद पुलिस बल के साथ पहुंच गए। मारे गए किसान के परिवार के लोग गुस्से से उबल रहे थे। उनमें इस बात की नाराजगी थी कि शिकायत के बाद पांच रोज में पुलिस ने कुछ नहीं किया, वरना कातिल अब तक पकड़ लिए जाते। पुलिसवालों ने एक और करतूत यह कर दी कि महेंद्र के कपड़ों की तलाशी के दौरान जेब में मिले निमंत्रण पत्र को सुसाइड नोट बता दिया, मगर जब लोगों ने खुद उसे देखा तो पता चला कि वह हकीकत में निमंत्रण पत्र है।
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इस पर भीड़ ने पुलिसवालों को घेरकर अपशब्द कहते हुए धक्कामुक्की शुरू कर दी। एक सिपाही के साथ ही थानेदार और दरोगा को भीड़ ने पीट दिया। किसी तरह पुलिसवाले वहां से जान बचाकर भागे। वायरलेस पर सूचना प्रसारित होने पर एसपी यमुनापार अशोक कुमार वहां सीओ बारा केजी सिंह, एसडीएम राजकुमार द्विवेदी तथा कई कई थानों की फोर्स के साथ पहुंच गए। किसी तरह भीड़ को नियंत्रित कर पुलिस ने किसान महेंद्र प्रताप का शव कब्जे में लेने की कोशिश की, लेकिन तीखे विरोध के कारण कामयाबी नहीं मिली। आखिरकार शाम साढ़े पांच बजे एडीएम प्रशासन ने आकर भरोसा दिया कि दरोगा इश्तेहाक अहमद और सिपाही शिवकुमार पटेल को निलंबित किया जाएगा तब जाकर पुलिस शव को सीलकर पोस्टमार्टम हाउस भेज सकी।
शव के निरीक्षण में पता चला कि महेंद्र प्रताप के सिर, पेट पर चाकू से वार किए गए थे। चेहरा और शरीर झुलसा था। आशंका है कि तेजाब डालकर शिनाख्त मिटाने की कोशिश की गई थी। मौके पर सरसों की फसल काफी हद तक कुचली थी जिससे शक है कि महेंद्र प्रताप का कत्ल वहीं किया गया। कातिलों से महेंद्र का काफी संघर्ष हुआ था। घटनास्थल पर खोजी कुत्ते को लाया गया तो वह करीब आधा किलोमीटर दूर वहां पहुंचा जहां एक लेडीज चप्पल पड़ा था। परिजनों ने एक किलोमीटर दूर बसहरा उपहरहार गांव की शबनम पर शक जताया। सीओ बारा ने बताया कि महिला को हिरासत में लेकर घटना की जांच की जा रही है।