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आग में कांच गोदाम स्वाहा, मालिक की गई जान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 05 Nov 2015 01:40 AM IST
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इलाहाबाद। शाहगंज के पानदरीबा मुहल्ले में बुधवार दोपहर कूड़े के ढेर से छिटकी चिंगारी ने कांच के गोदाम में आग लगा दी। कुछ ही देर में गोदाम लपटों से घिर गया। खबर पाकर फायर ब्रिगेड की टीम ने आकर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। करीब घंटे भर के भीतर गोदाम में रखा कांच का सारा माल स्वाहा हो गया। खबर पाकर जार्जटाऊन से आए गोदाम मालिक 68 वर्षीय कन्हैयालाल अग्रवाल को भारी नुकसान के चलते दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल ले जाते वक्त उनका देहांत हो गया। इस घटना से कारोबारी परिवार में भारी मातम छाया हुआ है।
जार्जटाउन इलाके में मेडिकल चौराहा के निकट रहने वाले कन्हैयालाल अग्रवाल कांच (ग्लास) का कारोबार करते थे। उनकी जानसेनगंज में दुकान है जिसे वह अपने एक पुत्र के साथ संभालते थे। उनके दो बेटे शहर से बाहर रहते हैं। दुकान से करीब पौन किलोमीटर दूर पान दरीबा मुहल्ले में उन्होंने गोदाम ले रखा है। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे दुकान से धुआं उठता देख आसपास के लोगों ने शोर मचाया। वहां भीड़ लग गई। कंट्रोल रूम को सूचना मिली तो कुछ में दमकल दस्ता वहां पहुंच गया। शटर उठाने पर गोदाम में भीषण आग लगी दिखी। पूरा गोदाम लपटों से घिरा था। गोदाम में रखे कागज के गत्ते और लकड़ी की पेटियां धू-धूकर जल रही थीं।
दमकल दस्ते के काफी प्रयास के बावजूद करीब घंटे भर के भीतर गोदाम में रखा सब कुछ जलकर नष्ट हो गया। इस अग्निकांड की जानकारी पाकर बुजुर्ग कन्हैयालाल घर से आए तो वहां तबाही का मंजर नहीं सह सके। उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह फर्श पर गिर गए। उनकी नाक और मुंह से खून निकल आया। उन्हें फौरन उठाकर अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी सांस थम चुकी थी। अग्निकांड में लाखों रुपये के नुकसान के बाद कन्हैयालाल के आकस्मिक निधन ने परिवार को दोहरा झटका दिया।
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जार्जटाउन इलाके में मेडिकल चौराहा के निकट रहने वाले कन्हैयालाल अग्रवाल कांच (ग्लास) का कारोबार करते थे। उनकी जानसेनगंज में दुकान है जिसे वह अपने एक पुत्र के साथ संभालते थे। उनके दो बेटे शहर से बाहर रहते हैं। दुकान से करीब पौन किलोमीटर दूर पान दरीबा मुहल्ले में उन्होंने गोदाम ले रखा है। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे दुकान से धुआं उठता देख आसपास के लोगों ने शोर मचाया। वहां भीड़ लग गई। कंट्रोल रूम को सूचना मिली तो कुछ में दमकल दस्ता वहां पहुंच गया। शटर उठाने पर गोदाम में भीषण आग लगी दिखी। पूरा गोदाम लपटों से घिरा था। गोदाम में रखे कागज के गत्ते और लकड़ी की पेटियां धू-धूकर जल रही थीं।
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दमकल दस्ते के काफी प्रयास के बावजूद करीब घंटे भर के भीतर गोदाम में रखा सब कुछ जलकर नष्ट हो गया। इस अग्निकांड की जानकारी पाकर बुजुर्ग कन्हैयालाल घर से आए तो वहां तबाही का मंजर नहीं सह सके। उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह फर्श पर गिर गए। उनकी नाक और मुंह से खून निकल आया। उन्हें फौरन उठाकर अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी सांस थम चुकी थी। अग्निकांड में लाखों रुपये के नुकसान के बाद कन्हैयालाल के आकस्मिक निधन ने परिवार को दोहरा झटका दिया।
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