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मेले में श्रद्धालु की मौत, हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Fri, 23 Jan 2015 12:51 AM IST
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इलाहाबाद। माघ मेले में बृहस्पतिवार को एक श्रद्धालु की मौत हो जाने के बाद जमकर हंगामा हुआ। हंगामा कर रहे हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि श्रद्धालु की मौत उखड़ी पड़ी चकर्ड प्लेट में फंसकर हुई जबकि मेला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का दावा है श्रद्धालु की मौत हार्ट अटैक से हुई। उसे खरोंच तक नहीं आई है। फिलहाल पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए श्रद्धालु का शव उसके परिजनों को सौंप दिया।
बिहार के पश्चिम चंपारन जिले के तिरछा पट्टी गांव निवासी भारत शाह (60 वर्ष) परिजनों संग संगम में डुबकी लगाने आए थे। बताया जा रहा है कि पैदल लौटते वक्त काली सड़क पर अचानक गिर पड़े। आननफानन में परिजन उन्हें एंबुलेंस में लेकर मेला क्षेत्र स्थित अस्पताल पहुंचे लेकिन तब तक भारत की सांसें थम चुकी थीं। इस बीच वहां हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया।
कार्यकर्ताओं का आरोप था कि वहां चकर्ड प्लेट उखड़ी पड़ी थी, जिससे फंसकर भारत गिर गए और उनकी मौत हो गई। हंगामे की खबर पाकर मौके पर परिजनों से मिलने पहुंचे डीएम भवनाथ सिंह, एडीएम सिटी एसके शर्मा, प्रभारी अधिकारी माघ मेला अरुण कुमार सिंह एवं अन्य अफसरों को कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव परिजनों को सौंप दिया। डीएम भवनाथ सिंह का कहना है कि आरोप सरासर गलत है। यह मेला प्रशासन को बदनाम करने की साजिश है। वहीं, मेला अस्पताल के डॉ. बीएन सिंह का कहना है कि भारत को जब अस्पताल लाया गया तो उसकी मौत हो चुकी थी लेकिन उसके शरीर पर कहीं कोई चोट का निशान नहीं था।
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बिहार के पश्चिम चंपारन जिले के तिरछा पट्टी गांव निवासी भारत शाह (60 वर्ष) परिजनों संग संगम में डुबकी लगाने आए थे। बताया जा रहा है कि पैदल लौटते वक्त काली सड़क पर अचानक गिर पड़े। आननफानन में परिजन उन्हें एंबुलेंस में लेकर मेला क्षेत्र स्थित अस्पताल पहुंचे लेकिन तब तक भारत की सांसें थम चुकी थीं। इस बीच वहां हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया।
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कार्यकर्ताओं का आरोप था कि वहां चकर्ड प्लेट उखड़ी पड़ी थी, जिससे फंसकर भारत गिर गए और उनकी मौत हो गई। हंगामे की खबर पाकर मौके पर परिजनों से मिलने पहुंचे डीएम भवनाथ सिंह, एडीएम सिटी एसके शर्मा, प्रभारी अधिकारी माघ मेला अरुण कुमार सिंह एवं अन्य अफसरों को कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव परिजनों को सौंप दिया। डीएम भवनाथ सिंह का कहना है कि आरोप सरासर गलत है। यह मेला प्रशासन को बदनाम करने की साजिश है। वहीं, मेला अस्पताल के डॉ. बीएन सिंह का कहना है कि भारत को जब अस्पताल लाया गया तो उसकी मौत हो चुकी थी लेकिन उसके शरीर पर कहीं कोई चोट का निशान नहीं था।
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