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एसटीएफ ने रीवां के ठेकेदार को अपहर्ताओं से बचाया, 40 लाख बरामद

Allahabad Bureau Updated Sun, 09 Sep 2018 02:09 AM IST
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एसटीएफ ने ठेकेदार को अपहर्ताओं से छुड़ाया, 40 लाख बरामद
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55 दिन पहले रीवा के ठेकेदार का किया गया था अपहरण, बिहार के मुजफ्फरपुर में रखा था ‘पकड़’
एसटीएफ के साथ बिहार और एमपी पुलिस ने की संयुक्त कार्रवाई, पांच गिरफ्तार
इलाहाबाद। एसटीएफ ने रीवा के एक नामी ठेकेदार को अपहर्ताओं के चंगुल से बचाते हुए अपहरणकर्ताओं के पास से 40 लाख रुपये बरामद कर लिए। ठेकेदार का 55 दिन पहले अपहरण कर बिहार के मुजफ्फरपुर में रखा गया था। अपहर्ताओं ने ‘पकड़’ के घर वालों से इलाहाबाद स्टेशन पर रुपये लेकर पहुंचने को कहा था। इसके बाद ही एसटीएफ की टीम इस मामले के खुलासे में लग गई।
रीवा के बड़े ठेकेदार संत बहादुर सिंह का 23 जुलाई को एक कार से अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद से ही उनका कुछ पता नहीं था। कुछ दिन पहले अपहर्ताओं ने संत बहादुर के पिता दिलराज सिंह चौहान से संपर्क कर 40 लाख की फिरौती मांगी। घर वालों ने पुलिस से शिकायत की। अपहर्ताओं की तलाश शुरू हो गई। कुछ दिन पहले अपहर्ताओं का फोन दिलराज के पास आया कि वह पैसे लेकर इलाहाबाद जंक्शन पहुंच जाए। इसके बाद वह बताएगा कि क्या करना है। एमपी पुलिस ने एसटीएफ से संपर्क किया। डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह के नेतृत्व में टीम घर वालों के साथ लग गई। बिहार पुलिस को भी एलर्ट कर दिया था। पुलिस ने शनिवार की सुबह बिहार के कैमूर जिले से अपहर्ता बलविंदर सिंह निवासी मदनपुर औरंगाबाद और नारायण लोहार निवासी कुँआ इंदौर को गिरफ्तार कर लिया गया। घर वालों ने उन्हें 40 लाख रुपये सौंपे थे। पूछताछ में पता चला कि संतबहादुर का अपहरण कर बिहार से मुजफ्फपुर जिले में खालिद अंसारी के घर रखा गया था। बिहार पुलिस ने सूचना मिलते ही संतराज को सकुशल मुक्त करा लिया। मौके से नालंदा के अंकित कुमार, अजीत सिंह और छपरा के सैलम रजा को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद तुरंत संत बहादुर के घर वालों को उनके सकुशल होने की सूचना दी गई। घर वाले और पुलिस टीम मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हो गए। एसटीएफ के डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि बलविंदर पर लूट और अपहरण से संबंधित 39 मुकदमे बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में दर्ज हैं। वह रीवा जेलसे 2016 में फरार हो गया था। इसके बाद से ही उसकी तलाश की जा रही है। फरारी के दौरान ही उसने लूट और अपहरण की कई वारदातों को अंजाम दिया।

छकाता रहा अपहर्ता, चलती ट्रेन से रुपये फेंकने को कहा
संत बहादुर सिंह के अपहर्ताओं ने बेहद पेशेवर और फिल्मी अंदाज में तीन राज्यों की पुलिस को कई दिन तक छकाया। घर वाले रुपये लेकर ट्रेन पर बैठ गए। एसटीएफ और एमपी पुलिस की टीम भी दूसरी बोगी में बैठ उन पर नजर जमाए रही। अपहर्ता ने घर वालों से इलाहाबाद जंक्शन से पुरुषोत्तम एक्सप्रेस पर बैठ जाने को कहा। एक बोगी में संतराज के पिता और बहनोई बैठे थे। दूसरे में एसटीएफ और एमपी पुलिस के अधिकारी। ट्रेन पश्चिम बंगाल के पुरुलिया पहुंच गई लेकिन कोई फोन नहीं आया। पुरुलिया में कहा गया कि वापस लौटो धनबाद आओ। सभी बाई रोड धनबाद पहुंचे। वहां अपहर्ताओं ने दून एक्सप्रेस से मुगलसराय पहुंचने को कहा। ट्रेन रास्ते में थी कि फिर फोन आया कि अगले स्टेशन पर उतरकर बाई रोड धनबाद पहुंचो। वहां पहुंचने पर हावड़ा मुंबई ट्रेन में बैठने को कहा गया। फिर कहा गया कि कैमूर में कुदरा स्टेशन के पास एक लड़का सफेद कपड़ा पहन कर खड़ा है। चलती ट्रेन से रुपये उसकी तरफ फेंक दो। घर वालों ने चलती ट्रेन से 40 लाख फेंके। अपहर्ता बलविंदर ने जैसे ही रुपये उठाए, एसटीएफ ने चेन पुलिंग के ट्रेन रुकवा दी और पीछा शुरू कर दिया। बिहार पुलिस की मदद से बलविंदर और उसके साथी नारायण को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया गया।

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