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जसरा सब्जी मंडी में लगी भीषण आग में दर्जनों दुकाने स्वाहा
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जसरा सब्जी मंडी में लगी भीषण आग, दर्जनों दुकानें जलीं
शाम को एक दुकान से भड़की आग घंटे भर में कई दुकानों को लिया आगोश में
आधा दर्जन फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद पाया लपटों पर काबू
अब तक के आंकड़े के मुताबिक 25 लाख से ज्यादा का सामान जलकर हुआ राख
अमर उजाला ब्यूरो
जसरा। क्षेत्र के अमरेहा गांव के सामने स्थित सब्जी मंडी जसरा स्थल पर अज्ञात स्थिति में लगी भीषण आग एक दर्जन से ज्यादा आढ़तियों की दुकान जलकर राख हो गई। इस आग में तकरीबन 25 लाख से ज्यादा का सामान स्वाहा हो गया। 28 मार्च की देर शाम लगी आग को काबू पाने में आधा दर्जन से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मोर्चा संभाला, तब पर भी आग की लपटों पर काबू पाने में घंटों लग गए।
यमुनापार की सबसे बड़ी सब्जी मंडी जसरा मंडी स्थल पर बृहस्पतिवार की शाम छह बजे के करीब एक दुकान में आग लग गई। जो देखते ही देखते इतनी तेजी से फैली कि एक-एक करके पूरी मंडी की दर्जनों दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। जिससे दुकान में रखी सब्जी व बारदाना जलकर राख हो गया। आग की लपटों को देखकर वहां भगदड़ मच गई। आग की लपटे आसमान चूमने लगी। लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड व पुलिस को सूचना दी गई। आग की लपटों को देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। आग की लपटों की वजह से उसमें रखा एक गैस सिलिंडर भी ब्लास्ट कर गया। जिससे तेज धमाका हुआ। मंडी में आढ़त की दुकानों पर रखी सब्जियां, प्लास्टिक एवं सुतली की बोरियों की वजह से आग की लपटों पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। एक दर्जन से ज्यादा दुकानों में धधक रही आग की लपटों को काबू करने के लिए पहले फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां बुलाई गई लेकिन जब लपटे नहीं थमी तो दो बड़ी गाड़ियां बुलाई गईं। उसके बाद फिर दो गाड़ियां बुलाई गईं, तब जाकर किसी तरह से आग की लपटों पर काबू पाया जा सका। आग बुझने के बावजूद देर रात तक दमकल कर्मी वहां डटे रहे। दुकानदारों और खुद फायर ब्रिगेड के लोगों को डर था कि कहीं फिर कहीं कोई दबी चिंगारी न भड़क उठे।
नैनी से लेकर करछना तक के आढ़तियों की आढ़त हुई स्वाहा
जसरा। सब्जी मंडी में पवन कुमार एंड ब्रदर्स फर्म की सब्जी गोदाम भी यहीं पर है। सबसे ज्यादा इन्हीं का नुकसान बताया जा रहा है। इसके मालिक पवन कुमार केसरवानी पुत्र मक्खन लाल केशरवानी निवासी जसरा ने बताया की लगभग 1500 कैरेट प्याज, अदरक व लहसुन, एक ट्रक से ऊपर जलकर राख हो गए। उनका तकरीबन 12 लाख के आस-पास अकेले नुकसान हुआ बताया जा रहा है। इनाके अलावा दिनेश भारतीय पुत्र गुलाब चंद निवासी जगोटी, करछना, संगम लाल कुशवाहा निवासी अरैल, नैनी, राकेश मौर्य पुत्र भाई लाल निवासी अमरेहा, घूरपुर, जगन्नाथ मौर्य पुत्र विंध्यवासिनी मौर्या निवासी अमरेहा, जसरा, महेंद्र सोनकर, रमाकांत कुशवाहा पुत्र राम लखन निवासी अमरेहा, संतलाल निवासी अमरेहा, गंगा भारतीया समेत एक दर्जन से ज्यादा दुकानदारों की दुकानें जलकर खाक हो गईं। अभी कई दुकानदार तो मंडी पहुंचे ही नहीं हैं।
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बाल्टी से पानी भर-भरकर लोग बुझाते रहे आग
जसरा(ब्यूरो)। आग में स्वाहा हुई दुकानों के मालिकों का पूरी दुकान के साथ-साथ सब्जी तोलने के कांटे, तराजू, बटखरा के अलावा दुकानों में रखी सब्जियां जलकर नष्ट हो गई। मौके पर भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी रही। पास के गांव के सैंकड़ों लोग बाल्टी से पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास करते रहे। घटना की सूचना पर थानाध्यक्ष घूरपुर बृजेश सिंह भी मौके पर पहुंच गए। मंडी सचिव दिलीप सिंह भी आग की सूचना पर मंडी स्थल पहुंच गए तथा नुकसान का जायजा लिया।
एक चिंगारी के तांडव ने खोली कई विसंगतियों की पोल
मंडी की 500 दुकानों के मध्य नहीं लगा है एक भी फायर एक्यूपमेंट
दो दशक पुरानी सब्जी मंडी में प्रतिदिन लगता है हजारों लोगों का मजमा
हमीरपुर, महोबा तक की जाती है इस मंडी की सब्जियों की सप्लाई
सूर्य प्रकाश त्रिपाठी/आनंद जायसवाल
नैनी/जसरा। यमुनापार की सबसे बड़ी मंडी मानी जाने वाली जसरा सब्जी मंडी में गुरुवार की शाम भड़की आग की चिंगारी में लाखों स्वाहा होने के साथ-साथ यहां व्याप्त कई विसंगतियों की पोल भी खोलकर रख दी। मसलन करीब 500 से ज्यादा छोटी-बड़ी आढ़त की दुकानों वाली इस मंडी में 150 से ज्यादा लाइसेंसधारी दुकानदार हैं। बावजूद इसके यहां फायर एक्यूपमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है। हैरानी की बात यह है कि करीब 20 से 25 साल पुरानी इस सब्जी मंडी में आज तक मंडी परिषद से लेकर यहां के दुकानदारों तक ने ध्यान नहीं दिया।
यमुनापार की पुरानी बाजारों में से एक जसरा बाजार में आज से करीब 40 साल पहले 80 के दशक में अमरेहा गांव के सामने एक गल्ला मंडी बनाई गई थी। जिसका मकसद यमुनापार के किसानों को अनाज को थोक भाव में बेचने की व्यवस्था करना था लेकिन मंडी समिति की ओर से बनाई गई इस मंडी में न तो अढ़तियां आए और न ही किसान, जिसकी वजह से यह कई वर्षों तक वीरान पड़ी रही। इस बीच जसरा बाजार में लगने वाली सब्जी मंडी के दुकानदारों और किसानों से तहबाजारी वसूलने वाले ठेकेदारों और उनके गुर्गों से आए दिन विवाद होने लगा। बढ़ते उपद्रव को देखते हुए तत्कालीन एसडीएम ने पहल करके मंडी समिति के अधिकारियों को तैयार किया और वर्ष 1997-98 में इस गल्ला मंडी को सब्जी मंडी के लिए खोल दिया गया। तब से आज 20 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। इस मंडी से चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, नैनी, करछना, मीरजापुर तक सब्जियां सप्लाई की जाती हैं। यहां तक मुंडेरा के व्यापारी भी कई सब्जियां इसी मंडी से मंगाते हैं। वर्तमान में यहां पर डेढ़ से दौ सौ लाइसेंसी दुकानें हैं। फुटकर और बिना लाइसेंसी दुकानों को मिला दें तो यह आंकड़ा 500 के पार पहुंच जाता है। जिसमें कई तो अस्थाई हैं, जो टीन छप्पर बांस बल्ली के सहारे बनी हुई हैं। लेकिन यहां पर आग लगने की हालत में अग्रिशमन जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं पानी के नाम पर ही मंडी में कोई व्यवस्था नहीं है। ठेले खोमचे वाले बोतल व पैकेट में भले पानी बेचते दिख जाएं। इसी तरह इस मंडी में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।
पति से दुखी विवाहिता ने जहर खाकर दी जान
बारा (ब्यूरो)। क्षेत्र के हरदी केवटान बस्ती में गुरुवार को दोपहर बाद एक विवाहिता ने घरेलू कलह से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लिया। घरवाले उसे अस्पताल ले गए, जहां देर शाम उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची बारा पुलिस से मायके पक्ष के लोगों ने दहेज को लेकर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए पति व सास के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की। थाना क्षेत्र के पिपराव गांव की रीता बिंद (20) की शादी पिछले वर्ष हरदी केवटान बस्ती निवासी देशराज बिंद के साथ हुई थी। मायके पक्ष के मुताबिक शादी के बाद से ही पति व सास दहेज के लिए अक्सर मारपीट करते थे। बीती रात भी पति ने उसे पीटा था। सूचना पर उसकी मां ने रात्रि में ही हरदी गांव में उसके पास आ गई थी। गुरुवार की सुबह रीता को उसकी मां समझा-बुझाकर वापस अपने घर चली गई थी। मां के जाने के बाद ही रीता ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ी तो घरवाले पास के अस्पताल ले गए। उसकी मौत से इंस्पेक्टर जेपी शाही ने बताया की मृतका के भाई सुशील कुमार ने पति व सास के खिलाफ तहरीर दी है। लाश पुलिस के कब्जे में है। शुक्रवार को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजी जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाई की जाएगी।
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शाम को एक दुकान से भड़की आग घंटे भर में कई दुकानों को लिया आगोश में
आधा दर्जन फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद पाया लपटों पर काबू
अब तक के आंकड़े के मुताबिक 25 लाख से ज्यादा का सामान जलकर हुआ राख
अमर उजाला ब्यूरो
जसरा। क्षेत्र के अमरेहा गांव के सामने स्थित सब्जी मंडी जसरा स्थल पर अज्ञात स्थिति में लगी भीषण आग एक दर्जन से ज्यादा आढ़तियों की दुकान जलकर राख हो गई। इस आग में तकरीबन 25 लाख से ज्यादा का सामान स्वाहा हो गया। 28 मार्च की देर शाम लगी आग को काबू पाने में आधा दर्जन से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मोर्चा संभाला, तब पर भी आग की लपटों पर काबू पाने में घंटों लग गए।
यमुनापार की सबसे बड़ी सब्जी मंडी जसरा मंडी स्थल पर बृहस्पतिवार की शाम छह बजे के करीब एक दुकान में आग लग गई। जो देखते ही देखते इतनी तेजी से फैली कि एक-एक करके पूरी मंडी की दर्जनों दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। जिससे दुकान में रखी सब्जी व बारदाना जलकर राख हो गया। आग की लपटों को देखकर वहां भगदड़ मच गई। आग की लपटे आसमान चूमने लगी। लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड व पुलिस को सूचना दी गई। आग की लपटों को देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। आग की लपटों की वजह से उसमें रखा एक गैस सिलिंडर भी ब्लास्ट कर गया। जिससे तेज धमाका हुआ। मंडी में आढ़त की दुकानों पर रखी सब्जियां, प्लास्टिक एवं सुतली की बोरियों की वजह से आग की लपटों पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। एक दर्जन से ज्यादा दुकानों में धधक रही आग की लपटों को काबू करने के लिए पहले फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां बुलाई गई लेकिन जब लपटे नहीं थमी तो दो बड़ी गाड़ियां बुलाई गईं। उसके बाद फिर दो गाड़ियां बुलाई गईं, तब जाकर किसी तरह से आग की लपटों पर काबू पाया जा सका। आग बुझने के बावजूद देर रात तक दमकल कर्मी वहां डटे रहे। दुकानदारों और खुद फायर ब्रिगेड के लोगों को डर था कि कहीं फिर कहीं कोई दबी चिंगारी न भड़क उठे।
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नैनी से लेकर करछना तक के आढ़तियों की आढ़त हुई स्वाहा
जसरा। सब्जी मंडी में पवन कुमार एंड ब्रदर्स फर्म की सब्जी गोदाम भी यहीं पर है। सबसे ज्यादा इन्हीं का नुकसान बताया जा रहा है। इसके मालिक पवन कुमार केसरवानी पुत्र मक्खन लाल केशरवानी निवासी जसरा ने बताया की लगभग 1500 कैरेट प्याज, अदरक व लहसुन, एक ट्रक से ऊपर जलकर राख हो गए। उनका तकरीबन 12 लाख के आस-पास अकेले नुकसान हुआ बताया जा रहा है। इनाके अलावा दिनेश भारतीय पुत्र गुलाब चंद निवासी जगोटी, करछना, संगम लाल कुशवाहा निवासी अरैल, नैनी, राकेश मौर्य पुत्र भाई लाल निवासी अमरेहा, घूरपुर, जगन्नाथ मौर्य पुत्र विंध्यवासिनी मौर्या निवासी अमरेहा, जसरा, महेंद्र सोनकर, रमाकांत कुशवाहा पुत्र राम लखन निवासी अमरेहा, संतलाल निवासी अमरेहा, गंगा भारतीया समेत एक दर्जन से ज्यादा दुकानदारों की दुकानें जलकर खाक हो गईं। अभी कई दुकानदार तो मंडी पहुंचे ही नहीं हैं।
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बाल्टी से पानी भर-भरकर लोग बुझाते रहे आग
जसरा(ब्यूरो)। आग में स्वाहा हुई दुकानों के मालिकों का पूरी दुकान के साथ-साथ सब्जी तोलने के कांटे, तराजू, बटखरा के अलावा दुकानों में रखी सब्जियां जलकर नष्ट हो गई। मौके पर भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी रही। पास के गांव के सैंकड़ों लोग बाल्टी से पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास करते रहे। घटना की सूचना पर थानाध्यक्ष घूरपुर बृजेश सिंह भी मौके पर पहुंच गए। मंडी सचिव दिलीप सिंह भी आग की सूचना पर मंडी स्थल पहुंच गए तथा नुकसान का जायजा लिया।
एक चिंगारी के तांडव ने खोली कई विसंगतियों की पोल
मंडी की 500 दुकानों के मध्य नहीं लगा है एक भी फायर एक्यूपमेंट
दो दशक पुरानी सब्जी मंडी में प्रतिदिन लगता है हजारों लोगों का मजमा
हमीरपुर, महोबा तक की जाती है इस मंडी की सब्जियों की सप्लाई
सूर्य प्रकाश त्रिपाठी/आनंद जायसवाल
नैनी/जसरा। यमुनापार की सबसे बड़ी मंडी मानी जाने वाली जसरा सब्जी मंडी में गुरुवार की शाम भड़की आग की चिंगारी में लाखों स्वाहा होने के साथ-साथ यहां व्याप्त कई विसंगतियों की पोल भी खोलकर रख दी। मसलन करीब 500 से ज्यादा छोटी-बड़ी आढ़त की दुकानों वाली इस मंडी में 150 से ज्यादा लाइसेंसधारी दुकानदार हैं। बावजूद इसके यहां फायर एक्यूपमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है। हैरानी की बात यह है कि करीब 20 से 25 साल पुरानी इस सब्जी मंडी में आज तक मंडी परिषद से लेकर यहां के दुकानदारों तक ने ध्यान नहीं दिया।
यमुनापार की पुरानी बाजारों में से एक जसरा बाजार में आज से करीब 40 साल पहले 80 के दशक में अमरेहा गांव के सामने एक गल्ला मंडी बनाई गई थी। जिसका मकसद यमुनापार के किसानों को अनाज को थोक भाव में बेचने की व्यवस्था करना था लेकिन मंडी समिति की ओर से बनाई गई इस मंडी में न तो अढ़तियां आए और न ही किसान, जिसकी वजह से यह कई वर्षों तक वीरान पड़ी रही। इस बीच जसरा बाजार में लगने वाली सब्जी मंडी के दुकानदारों और किसानों से तहबाजारी वसूलने वाले ठेकेदारों और उनके गुर्गों से आए दिन विवाद होने लगा। बढ़ते उपद्रव को देखते हुए तत्कालीन एसडीएम ने पहल करके मंडी समिति के अधिकारियों को तैयार किया और वर्ष 1997-98 में इस गल्ला मंडी को सब्जी मंडी के लिए खोल दिया गया। तब से आज 20 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। इस मंडी से चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, नैनी, करछना, मीरजापुर तक सब्जियां सप्लाई की जाती हैं। यहां तक मुंडेरा के व्यापारी भी कई सब्जियां इसी मंडी से मंगाते हैं। वर्तमान में यहां पर डेढ़ से दौ सौ लाइसेंसी दुकानें हैं। फुटकर और बिना लाइसेंसी दुकानों को मिला दें तो यह आंकड़ा 500 के पार पहुंच जाता है। जिसमें कई तो अस्थाई हैं, जो टीन छप्पर बांस बल्ली के सहारे बनी हुई हैं। लेकिन यहां पर आग लगने की हालत में अग्रिशमन जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं पानी के नाम पर ही मंडी में कोई व्यवस्था नहीं है। ठेले खोमचे वाले बोतल व पैकेट में भले पानी बेचते दिख जाएं। इसी तरह इस मंडी में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।
पति से दुखी विवाहिता ने जहर खाकर दी जान
बारा (ब्यूरो)। क्षेत्र के हरदी केवटान बस्ती में गुरुवार को दोपहर बाद एक विवाहिता ने घरेलू कलह से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लिया। घरवाले उसे अस्पताल ले गए, जहां देर शाम उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची बारा पुलिस से मायके पक्ष के लोगों ने दहेज को लेकर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए पति व सास के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की। थाना क्षेत्र के पिपराव गांव की रीता बिंद (20) की शादी पिछले वर्ष हरदी केवटान बस्ती निवासी देशराज बिंद के साथ हुई थी। मायके पक्ष के मुताबिक शादी के बाद से ही पति व सास दहेज के लिए अक्सर मारपीट करते थे। बीती रात भी पति ने उसे पीटा था। सूचना पर उसकी मां ने रात्रि में ही हरदी गांव में उसके पास आ गई थी। गुरुवार की सुबह रीता को उसकी मां समझा-बुझाकर वापस अपने घर चली गई थी। मां के जाने के बाद ही रीता ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ी तो घरवाले पास के अस्पताल ले गए। उसकी मौत से इंस्पेक्टर जेपी शाही ने बताया की मृतका के भाई सुशील कुमार ने पति व सास के खिलाफ तहरीर दी है। लाश पुलिस के कब्जे में है। शुक्रवार को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजी जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाई की जाएगी।