Prayagraj : सड़क हादसे में पति को मृत बताकर 30 लाख रुपये का लिया बीमा क्लेम
सिविल लाइंस थाने में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। पति को सड़क हादसे में मृत बताकर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से 30 लाख रुपये का क्लेम पास करा लिया।
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सिविल लाइंस थाने में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। पति को सड़क हादसे में मृत बताकर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से 30 लाख रुपये का क्लेम पास करा लिया। शाखा प्रबंधक ने सिविल लाइंस थाने में राजीव त्रिपाठी व उनकी पत्नी दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
मूलरूप से भदोही जिले ज्ञानपुर गांव रामपुर निवासी राजीव त्रिपाठी के नाम 17 दिसंबर 2024 को 30 लाख रुपये का बीमा जारी किया गया था। जिसे एजेंट शिव कुमार रावत ने राजीव त्रिपाठी की ओर से मिले आधार कार्ड, पैन कार्ड, कैंसिल चेक, टैक्स रिटर्न फाइल, मेडिकल रिपोर्ट समेत आदि दस्तावेजों को सिविल लाइंस स्थित एलआईसी मंडल कार्यालय में प्रस्तुत किया गया था।
बीमा के अंतर्गत पहली किस्त भी जमा की गई। इसके बाद 25 जनवरी 2025 कार्यालय में सूचना मिली कि मिर्जापुर के गैपुरा में अज्ञात वाहन की टक्कर से सीमा धारक राजीव त्रिपाठी की मृत्यु हो गई है। कुछ दिन बाद ही नामित महिला दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी ने कार्यालय में राजीव की मृत्यु के सभी प्रपत्र प्रस्तुत किए। जिसमें एफआईआर की कॉपी, मृत्यु प्रमाणपत्र, पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि शामिल थे, जो देखने में बिलकुल असली प्रतीत हुए। सिविल लाइंस स्थित मंडल कार्यालय की स्वीकृति के बाद 27 जून 2025 को नामित दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी को 30 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।
दोबारा दस्तावेज लगाने पर हुआ खुलासा
एफआईआर के मुताबिक, नामित को बीमा कंपनी की ओर से किसी मद से कुछ और रकम मिलनी थी। इसलिए नामित ने फिर से कागजात जमा किए। जांच के दाैरान कागजात संदिग्ध दिखे। मामले में विंध्याचल पुलिस से संपर्क किया गया तो उन्होंने भी साफ इन्कार किया कि जिस थाने का जिक्र एफआईआर में किया गया वह अस्तित्व में ही नहीं है।
महिला के खाते में बचे सिर्फ 639 रुपये
एलआईसी अधिकारियों की जांच में पता चला कि दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी का बैंक खाता राजीव त्रिपाठी के मृत्यु के बाद छह मार्च 2025 को खोला गया था। खाते में चेक के माध्यम से 30 लाख रुपये जाते ही रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई। एक अगस्त 2025 को खाते में सिर्फ 639 रुपये ही थे। जांच में पता चला कि नंदनी अलोपीबाग की रहने वाली हैं। अधिकारियों ने मामले को सुनियोजित आर्थिक धोखाधड़ी बताया है। शाखा प्रबंधक ने पुलिस से प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से कराने की मांग की है। सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि शाखा प्रबंधन की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।