देश की पहली इंटरेक्टिव आजाद वीथिका जनता को समर्पित, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने किया उद्घाटन
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने शाम 4:31 बजे आजाद गैलरी का उद्घाटन किया। करीब पांच हजार स्क्वायर फीट एरिया में बनी इस आजाद गैलरी में क्रांति के प्रदर्शन हर कदम पर ध्यान खींचते हैं।
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इलाहाबाद राष्ट्रीय संग्रहालय में लंबे इंतजार के बाद सोमवार को 1857 से 1947 तक की हर क्रांति को संजोने वाली देश की पहली इंटरेक्टिव आजाद गैलरी को जनता को समर्पित कर दिया गया। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के नाम पर 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार आजाद गैलरी का रिमोट से बटन दबाकर उद्घाटन किया। इस वीथिका में सशस्त्र क्रांति से जुड़े दस्तावेजों, प्रतीकों और दृश्यों को डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने शाम 4:31 बजे आजाद गैलरी का उद्घाटन किया। करीब पांच हजार स्क्वायर फीट एरिया में बनी इस आजाद गैलरी में क्रांति के प्रदर्शन हर कदम पर ध्यान खींचते हैं। यहां क्रांतिकारियों की अमर गाथा को ग्राफिक्स, चलचित्र, अभिलेखीय दस्तावेजों, कलाकृतियों, प्रतिकृतियों के इंटरेक्टिव मल्टीमीडिया व अन्य तकनीकी माध्यमों से प्रदर्शित किया गया है।
गैलरी में प्रवेश करते ही बंगाल विभाजन की फूटती चिंगारी नजर आती है। इसके बाद कांग्रेस विभाजन, दिल्ली मेंं बम फेंकने की घटना, खुदीराम बोस और मुजफ्फरपुर बमबारी, क्रांतिकारी आंदोलन का अभ्युदय, स्वदेशी बहिष्कार आंदोलन की लपटें, भारत छोड़ो आंदोलन, आजाद हिंद फौज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राइटर्स बिल्डिंग की घटना, काकोरी कांड, चटगांव शस्त्रागार छापा, स्वतंत्रता संघर्ष के चित्रित स्मारक, डाक टिकट, साइमन कमीशन और लाला लाजपत राय की शहादत, सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने की घटना को आजाद गैलरी में संजोया गया है। यह पहली ऐसी गैलरी है, जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन की हर क्रांति को लाइट और साउंड के माध्यम दिखाया गया है।
राज्यपाल ने अपने हाथ से सजाई आजाद की कोल्ट पिस्तौल
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सेंट्रल हॉल के आधुनिकीकरण के दौरान हटाई गई चंद्रशेखर आजाद की कोल्ट पिस्तौल को अपने हाथ से गैलरी की दीर्घा में सजाया। वह जब गैलरी में पहुंचीं, तब अफसरों ने उनके हाथों से कोल्ट पिस्तौल दीर्घा में रखवाई।
10 करोड़ की लागत से इलाहाबाद म्यूजियम में आजाद गैलरी का निर्माण
05 हजार स्कवायर फीट क्षेत्रफल में 1857 से 1947 तक की हर क्रांति के दर्शन
2018 में इस गैलरी को मिली थी मंजूरी
सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक सेंगोल के प्रतीक को भी किया गया प्रदर्शित
सेंट्रल हॉल में आजाद की आदमकद प्रतिमा भी पहली बार आम जनता के दर्शनार्थ लगाई गई। इसी प्रतिमा के बगल राजदंड के रूप में सेंगोल को प्रदर्शित किया गया। वॉकिंग गोल्डेन स्टिक के रूप में संग्रहालय में रखे गए इस सेंगोल की राजदंड के रूप में पहली बार पहचान अमर उजाला की रिपोर्ट के जरिए हुई थी। इसके बाद इस सेंगोल को संस्कृति मंत्रालय ने दिल्ली म्यूजियम में सुरक्षित कर लिया था। बाद में इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों संसद में स्थापित किया गया।