कोरोना : खतरा बढ़ने के बावजूद नहीं हो पा रही है सख्ती, लापरवाही पड़ न जाए भारी
कोरोना सेल निष्क्रिय है और थानों में स्थापित की गई कोविड हेल्प डेस्क भी गायब है। नाइट कर्फ्यू का भी सख्ती से पालन नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में इस बात की भी आशंका है कि यह लापरवाही भारी भी पड़ सकती है।
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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर हर तरफ शोर मचा हुआ है। जिले में भी संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन जिला पुलिस की ओर से अभी इसे लेकर सतर्कता नहीं दिख रही है। हाल यह है कि पहली और दूसरी लहर के दौरान की की गई व्यवस्थाएं भी मौजूदा समय में बंद हैं। कोरोना सेल निष्क्रिय है और थानों में स्थापित की गई कोविड हेल्प डेस्क भी गायब है। नाइट कर्फ्यू का भी सख्ती से पालन नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में इस बात की भी आशंका है कि यह लापरवाही भारी भी पड़ सकती है।
कोरोना सेल
कोरोना की पहली लहर में ही जिला स्तर पर कोरोना सेल का गठन किया गया था। जिले भर में कोविड गाइडलाइन उल्लंघन के मामलों में हुई कार्रवाई का लेखा-जोखा यह सेल रखती थी। पुलिसकर्मियों में कोरोना संक्रमण की स्थिति का रिकॉर्ड रखना भी इसी सेल में तैनात पुलिसकर्मियों केजिम्मे था। पूर्व की दो लहरों के दौरान इस सेल ने प्रभावी रूप से कार्य किया और यही वजह रही कि कोविड गाइडलाइन का पालन कराने में पुलिस काफी हद तक कारगर भी रही। लेकिन सच्चाई यह है कि इस बार यह सेल अब तक सक्रिय नहीं की जा सकी है। हाल यह है कि कोविड गाइडलाइन के उल्लंघन को लेकर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसका आंकड़ा किसी के पास नहीं है।
कोविड हेल्प डेस्क
पूर्व की दो लहरों के दौरान कोरोना संक्रमण का शिकार बहुत से पुलिसकर्मी भी हुए। कई बार ऐसा हुआ जब ड्यूटी के साथ-साथ थानों में आने वाले वादकारियों के संपर्क में आने से भी पुलिसकर्मियों में संक्रमण फैला। इसी को देखते हुए जिले के प्रत्येक थानों, पुलिस कार्यालयों में कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना की गई थी। जिसमें बाकायदा थर्मल स्कैनिंग की भी व्यवस्था थी। लेकिन अब थानों से यह कोविड हेल्प डेस्क गायब है। यहां तक कि पुलिस कार्यालयों में भी यह डेस्क नहीं है।
कोविड टास्क फोर्स
कोविड गाइडलाइन का पालन कराने के लिए पूर्व में कोविड टास्क फोर्स का गठन किया गया था। लॉकडाउन से लेकर कोविड गाइडलाइन के एक-एक बिंदु पर प्रभावी कार्रवाई करना इस फोर्स की जिम्मेदारी थी। टास्क फोर्स की ही देन थी कि कंटेनमेंट जोन में कोविड गाइडलाइन क ा पालन बेहद सख्ती से कराया गया। जिससे संक्रमण को फैलने से रोका गया। लेकिन मौजूदा समय में कोविड टास्क फोर्स का भी कुछ अता-पता नहीं है।
मास्क, नाइट कर्फ्यू को लेकर सख्ती नहीं
अन्य इंतजामों के साथ ही कोविड से बचाव के लिए पुलिस की ओर से अभी सख्ती भी नहीं की जा रही है। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों में लोग बेरोकटोक बिना मास्क के घूम रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा जा रहा है और नाइट कर्फ्यू को लेकर भी गंभीरता नहीं बरती जा रही है। आवाजाही पर प्रतिबंध भी सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे तक ही सीमित है। पुराने शहर समेत शहर के तमाम इलाकों में रात 10 बजे के बाद भी लोग बेवजह घूमते नजर आते हैं।
जिम्मेदार दे रहे गोलमोल जवाब
कोविड संक्रमण से बचाव को लेकर बरती जा रही लापरवाही के आरोपों पर जिम्मेदार अफसर गोलमोल जवाब देते हैं। एसपी प्रोटोकॉल और कोविड संबंधी कार्रवाई के नोडल रविशंकर निम कहते हैं कि थानों में कोविड हेल्प डेस्क जल्द ही दोबारा से क्रियान्वित की जाएगी। कोरोना सेल के सवाल पर वह इसे पूरी तरह से सक्रिय बताते हैं। लेकिन कोविड गाइडलाइन के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई के कितने आंकड़े सेल ने एकत्रित किए, इस बारे में वह जवाब नहीं दे पाए।