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High Court : एसिड अटैक पीड़िता को मुआवजा ही काफी नहीं, पुनर्वास की व्यवस्था सरकार का कर्तव्य

Wed, 20 May 2026 07:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 20 May 2026 07:22 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एसिड अटैक पीड़िता को मुआवजा दे देना ही काफी नहीं है। सरकार का कर्तव्य है कि पीड़िता दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हो सके और समाज में सम्मान से जी सके, इसके लिए पुनर्वास की व्यवस्था करे।

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Compensation alone is not enough for acid attack victims, government duty to provide rehabilitation facilities
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एसिड अटैक पीड़िता को मुआवजा दे देना ही काफी नहीं है। सरकार का कर्तव्य है कि पीड़िता दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हो सके और समाज में सम्मान से जी सके, इसके लिए पुनर्वास की व्यवस्था करे। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने 25 मई को सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश पर नीति तैयार न करने के मामले में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) व प्रमुख सचिव (महिला एवं बाल कल्याण विभाग) को अदालत में पेश होने के लिए कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने फर्रुखाबाद निवासी युवती की याचिका पर दिया है।

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पीड़िता ने इलाज, गरिमापूर्ण जीवन के लिए अतिरिक्त मुआवजे और सरकारी नौकरी की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने पाया कि साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तेजाब पीड़िताओं के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया था। इसके बाद भी राज्य ने कोई नीति तैयार नहीं की।
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कोर्ट ने कहा-छह लाख रुपये बेहद मामूली

कोर्ट ने पाया कि पीड़िता घटना के समय 24 वर्ष की थी। नौ साल में उसे पीड़ित मुआवजा योजना और अन्य राहत कोष से छह लाख रुपये की ही मदद मिल सकी है। तेजाब हमले के शिकार लोगों को जीवनभर शारीरिक अक्षमता, मानसिक आघात, सामाजिक लांछन, रोजगार के अवसरों की कमी और विवाह जैसी खुशियों से वंचित होना पड़ता है। ऐसे में छह लाख रुपये उनके जीवनभर के संघर्षों और चिकित्सा खर्चों के सामने बेहद मामूली हैं।
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सवाल...मुआवजा राशि बढ़ाने पर सरकार क्या ठोस नीतिगत कदम उठाने जा रही

राज्य सरकार का यह दायित्व है कि वह ऐसी पीड़िताओं के लिए मुफ्त और निरंतर चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, शैक्षणिक सहायता और रोजगार के विशेष अवसर उपलब्ध कराए। हाईकोर्ट ने दोनों वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को तलब किया है। पूछा है कि एसिड अटैक पीड़िताओं के संपूर्ण पुनर्वास, मुफ्त इलाज और उनकी चोट की गंभीरता के आधार पर मुआवजे की राशि को तार्किक रूप से बढ़ाने के लिए सरकार ने क्या ठोस नीतिगत कदम उठाने जा रही है।

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