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रासायनिक रंगों से बचाएं त्वचा व आंखें
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Thu, 09 Mar 2017 12:46 AM IST
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इलाहाबाद
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रंग पर्व पर रासायनिक रंगों से आंखों और त्वचा को बचाने के लिए सावधानी बहुत जरूरी है। बाजार में हर्बल रंगों की उपलब्धता है। थोड़ी सी समझदारी दिखाएं तो रसोई में उपलब्ध वस्तुओं से हर्बल रंग बनाए जा सकते हैं। इन रंगों का प्रयोग सेहत के साथ पर्यावरण के लिए ठीक है। रंग खेलते समय बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
होली पर अधिकांश लोग रासायनिक रंगों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें सबसे खतरनाक हरा रंग होता है। इसमें शीशे की मात्रा ज्यादा होती है। इसी तरह अन्य रंगों में लेड, मरकरी, आर्सेनिक जैसे (हैवी मेटल) रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। ज्यादा असरकारक और तेज चढ़ने वाले रंगों में खतरनाक रासायनिक पदार्थों की मिलावट का बड़ा कारण मुनाफाखोरी भी है। रासायनिक रंग आंखों में पड़ जाएं तो रोशनी जाने का खतरा भी हो सकता है। त्वचा में रासायनिक रंग विपरीत प्रभाव डालते हैं।
शरीर में होती है खुजली, पड़ते हैं चकत्ते
रासायनिक रंगों के लगने से त्वचा पर जलन होती है। चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में खुजली होने लगती है। रंग लगने और धोने के बाद चकत्ते पड़ जाते हैं। चेहरे पर दाने भी निकल आते हैं। अपरस की संभावना बढ़ जाती है, जो आगे महीनों या सालों तक परेशानी का कारण बन जाते है। कभी-कभी किसी की त्वचा पर पड़े दाग से स्किन का कलर बदल जाता है।
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घर में ही बनाए हर्बल रंग
कृषि विश्वविद्यालय (शुआट्स) के डॉ. पुनीत अरोरा के मुताबिक हल्दी, चंदन, पलाश या अन्य फूलों के साथ चुकंदर, मेहंदी, पालक से घर में ही हर्बल रंग बनाए जा सकते हैं। आंख और त्वचा रोग विशेषज्ञों की भी सलाह है कि होली खेलने के लिए हर्बल कलर का प्रयोग किया जा सकता है।
सावधानी ही बचाव
0 मनोहरदास नेत्र चिकित्सालय के निदेशक व वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि रासायनिक रंगों का असर आंखों पर तेजी से होता है। होली खेलते समय आंखों में रंग न पड़े इसके प्रति सचेत रहना होगा। यदि रंग आंखों में पड़ जाए तो तुरंत ठंडे पानी से छींटे मारकर धोने के बाद चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
0 त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक रस्तोगी के मुताबिक रासायनिक रंग त्वचा के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। रंग खेलने से पहले कोल्ड क्रीम या चिकनाई शरीर और चेहरे पर लगा लें। खुजली होने या चकत्ते पड़ जाएं तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। इस मामले में लापरवाही बरती तो रंगों के असर से पड़े दाग परेशानी का कारण बन सकते हैं।
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होली पर अधिकांश लोग रासायनिक रंगों का इस्तेमाल करते हैं, उनमें सबसे खतरनाक हरा रंग होता है। इसमें शीशे की मात्रा ज्यादा होती है। इसी तरह अन्य रंगों में लेड, मरकरी, आर्सेनिक जैसे (हैवी मेटल) रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। ज्यादा असरकारक और तेज चढ़ने वाले रंगों में खतरनाक रासायनिक पदार्थों की मिलावट का बड़ा कारण मुनाफाखोरी भी है। रासायनिक रंग आंखों में पड़ जाएं तो रोशनी जाने का खतरा भी हो सकता है। त्वचा में रासायनिक रंग विपरीत प्रभाव डालते हैं।
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शरीर में होती है खुजली, पड़ते हैं चकत्ते
रासायनिक रंगों के लगने से त्वचा पर जलन होती है। चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में खुजली होने लगती है। रंग लगने और धोने के बाद चकत्ते पड़ जाते हैं। चेहरे पर दाने भी निकल आते हैं। अपरस की संभावना बढ़ जाती है, जो आगे महीनों या सालों तक परेशानी का कारण बन जाते है। कभी-कभी किसी की त्वचा पर पड़े दाग से स्किन का कलर बदल जाता है।
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घर में ही बनाए हर्बल रंग
कृषि विश्वविद्यालय (शुआट्स) के डॉ. पुनीत अरोरा के मुताबिक हल्दी, चंदन, पलाश या अन्य फूलों के साथ चुकंदर, मेहंदी, पालक से घर में ही हर्बल रंग बनाए जा सकते हैं। आंख और त्वचा रोग विशेषज्ञों की भी सलाह है कि होली खेलने के लिए हर्बल कलर का प्रयोग किया जा सकता है।
सावधानी ही बचाव
0 मनोहरदास नेत्र चिकित्सालय के निदेशक व वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि रासायनिक रंगों का असर आंखों पर तेजी से होता है। होली खेलते समय आंखों में रंग न पड़े इसके प्रति सचेत रहना होगा। यदि रंग आंखों में पड़ जाए तो तुरंत ठंडे पानी से छींटे मारकर धोने के बाद चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
0 त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक रस्तोगी के मुताबिक रासायनिक रंग त्वचा के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। रंग खेलने से पहले कोल्ड क्रीम या चिकनाई शरीर और चेहरे पर लगा लें। खुजली होने या चकत्ते पड़ जाएं तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। इस मामले में लापरवाही बरती तो रंगों के असर से पड़े दाग परेशानी का कारण बन सकते हैं।