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शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर गंभीर नहीं कॉलेज
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College is not serious about teachers promotion
प्रयागराज। राजकीय महाविद्यालय अपने शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर गंभीर नहीं हैं। प्रवक्ताओं के एपीआई प्रपत्रों की जांच एवं परीक्षण को गंभीरता सतर्कतापूर्वक न किए जाने के कई मामले सामने आने के बाद उच्च शिक्षा निदेशक ने सभी राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर चेतावनी जारी की है कि इस प्रकार की उदासीनता एवं शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
राजकीय महाविद्यालयों में तैनात प्रवक्ताओं के प्रमोशन से पहले उनके एकेडमिक परमॉर्मेंस इंडीकेटर (एपीआई) प्रपत्रों की जांच एवं परीक्षण किया जाता है। जांच एवं परीक्षण की जिम्मेदारी कॉलेज के प्राचार्य और महाविद्यालय स्तर पर गठित इंटरर्नल क्वालिटी असेसमेंट सेल (आईक्यूएसी) की होती है। जांच एवं परीक्षण के बाद एपीआई प्रपत्र उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजे जाते हैं और फिर निदेशालय स्तर पर गठित एपीआई समिति इनका परीक्षण करती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज की ओर से महाविद्यालयों के प्राचार्यों को जारी पत्र में कहा गया है कि एपीआई आवेदनपत्र के साथ संलग्न प्रपत्रों व अभिलेखों की जांच एवं परीक्षण गंभीरता एवं सतर्कतापूर्वक नहीं किया जा रहा है।
ऐसे में निदेशालय स्तर पर गठित एपीआई समिति को असुविधा एवं परेशानी हो रही है। ऐसे में अत्यधिक जनशक्ति एवं समय नष्ट हो रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि महाविद्यालय स्तर पर प्रपत्रों की जांच में उदासीनता बरती गई है, जो आपत्तिजनक एवं खेदजनक है। निदेशक ने अपने पत्र में कहा है कि समस्त प्राचार्यों एवं महाविद्यालय स्तर पर गठित आईक्यूएसी समिति को निर्देश दिया जाता है कि भविष्य में एपीआई प्रपत्रों को निदेशालय में अग्रसारित करने से पूर्व प्रेषित प्रपत्रों की गहनता से जांच एवं परीक्षण अपने स्तर से सुनिश्चित कर लें। इसमें किसी भी प्रकार की उदासीनता एवं शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
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राजकीय महाविद्यालयों में तैनात प्रवक्ताओं के प्रमोशन से पहले उनके एकेडमिक परमॉर्मेंस इंडीकेटर (एपीआई) प्रपत्रों की जांच एवं परीक्षण किया जाता है। जांच एवं परीक्षण की जिम्मेदारी कॉलेज के प्राचार्य और महाविद्यालय स्तर पर गठित इंटरर्नल क्वालिटी असेसमेंट सेल (आईक्यूएसी) की होती है। जांच एवं परीक्षण के बाद एपीआई प्रपत्र उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजे जाते हैं और फिर निदेशालय स्तर पर गठित एपीआई समिति इनका परीक्षण करती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज की ओर से महाविद्यालयों के प्राचार्यों को जारी पत्र में कहा गया है कि एपीआई आवेदनपत्र के साथ संलग्न प्रपत्रों व अभिलेखों की जांच एवं परीक्षण गंभीरता एवं सतर्कतापूर्वक नहीं किया जा रहा है।
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ऐसे में निदेशालय स्तर पर गठित एपीआई समिति को असुविधा एवं परेशानी हो रही है। ऐसे में अत्यधिक जनशक्ति एवं समय नष्ट हो रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि महाविद्यालय स्तर पर प्रपत्रों की जांच में उदासीनता बरती गई है, जो आपत्तिजनक एवं खेदजनक है। निदेशक ने अपने पत्र में कहा है कि समस्त प्राचार्यों एवं महाविद्यालय स्तर पर गठित आईक्यूएसी समिति को निर्देश दिया जाता है कि भविष्य में एपीआई प्रपत्रों को निदेशालय में अग्रसारित करने से पूर्व प्रेषित प्रपत्रों की गहनता से जांच एवं परीक्षण अपने स्तर से सुनिश्चित कर लें। इसमें किसी भी प्रकार की उदासीनता एवं शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
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