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हाईकोर्ट : सीएमओ मेरठ को दो महीने में दावे के निस्तारण का निर्देश
Tue, 06 Dec 2022 12:24 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 06 Dec 2022 12:24 AM IST
सार
तर्क दिया कि याची मृतक की विवाहित बेटी है। उसने अपने पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया लेकिन सीएमओ मेरठ ने उसे खारिज कर दिया। कहा. विवाहिता बेटी यह दावा नहीं कर सकती है जबकि, सुप्रीम कोर्ट ने विमला श्रीवास्तव के केस में विवाहिता बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने की व्यवस्था बनाई है।
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- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ की याची अरुणा की अनुकंपा नियुक्ति के दावे को दो महीने में निस्तारित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सीएमओ मेरठ आदेश की प्रति मिलने के दो महीने के भीतर दावे का निस्तारण करें। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने अरुणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची की ओर से अधिवक्ता योगेंद्र पाल सिंह ने बहस की।
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तर्क दिया कि याची मृतक की विवाहित बेटी है। उसने अपने पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया लेकिन सीएमओ मेरठ ने उसे खारिज कर दिया। कहा. विवाहिता बेटी यह दावा नहीं कर सकती है जबकि, सुप्रीम कोर्ट ने विमला श्रीवास्तव के केस में विवाहिता बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने की व्यवस्था बनाई है। लिहाजा, याची भी इस व्यवस्था के तहत लाभ पाने की हकदार है। कोर्ट ने विमला श्रीवास्तव केस में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के तहत सीएमओ मेरठ के दावे का निस्तारण करने का निर्देश दिया।
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