काला घोड़ा शूटआउट में नाम आने के बाद बच्चा पासी बन गया ‘भाई’
धूमनगंज निवासी जिस निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी का मकान शनिवार को गिराया गया, उसका पर दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। लेकिन वह करीब 14 साल पहले मुंबई में हुए काला घोड़ा शूटआउट में नाम आने के बाद चर्चा में आया। बाद में वह अदालत से बरी हुआ, लेकिन तब तक वह छोटा राजन के गुर्गे के तौर पर जाना जाने लगा था।
सुलेमसराय से दो बार के पार्षद बच्चा पासी पर पहला मुकदमा धूमनगंज थाने में 2001 में आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज हुआ। धूमनगंज थाने में इसी साल दर्ज दूसरे केस में उस पर नशीली दवाओं की तस्करी का आरोप लगा। दो साल बाद सिविल लाइंस थाने में उस पर लगातार दो मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से एक में लूट जबकि दूसरे में डकैती का आरोप लगा। इस तरह उस पर दर्ज मुकदमों की फेहरिस्त लंबी होती गई लेकिन जरायम की दुनिया में वह चर्चित 2006 में हुआ।
मुंबई के काला घोड़ा शूट आउट में नाम आने के बाद उसका नाम अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के गुर्गे के तौर पर लिया जाने लगा। इस शूटआउट में उसके साथ ही झूंसी के राजेश यादव व खान मुबारक के भाई जफर का भी नाम आया। लेकिन बाद में अदालत से वह बरी हो गया। बता दें कि अम्तूबर 2006 में मुंबई के कालाघोड़ा इलाके में पेशी पर आए दो बंदियों को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया था। जिसे छोटा राजन गैंग का नाम आया था। इसके बाद 2007 में कचहरी लूट व हत्याकांड में भी बच्चा का नाम आया।
13 साल से पार्षद की कुर्सी पर कब्जा
कचहरी लूटकांड में नाम आने के बाद बच्चा पासी ने राजनीति का रुख किया। 2007 वह साल था था जिसमें पहली बार उसने बसपा से चुनाव लडक़र पार्षदी हथिया ली। 2012 में महिला सीट होने पर उसने अपनी पत्नी रजिता को चुनाव लड़वाया जो भारी मतों से जीतकर पार्षद बनी। 2017 में फिर से बच्चा ने किस्मत आजमाई और लगातार तीसरी बार सीट पर कब्जा जमाया। इस तरह 13 साल से पार्षदी की सीट पर उसने कब्जा बरकरार रखा है।