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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भी जातीय फैक्टर, अपनों को जोड़े रखने की चुनौती

Tue, 22 Jun 2021 01:21 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 22 Jun 2021 01:21 AM IST
सार

  • जिला पंचायत सदस्य के निर्वाचन में तीन बिरादरी के लोगों की प्रभावी संख्या
  • अनुसूचित जाति के सदस्यों की बढ़ी भूमिका, दिग्गजों को साधने की कवायद शुरू

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Caste factor even in the election of the post of District Panchayat President, the challenge of keeping loved ones connected
prayagraj news : भाजपा प्रत्याशी डॉ. वीके सिंह और सपा प्रत्याशी मालती यादव। - फोटो : prayagraj

विस्तार

जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी जाति बड़ा फैक्टर बनने जा रहा है। इसमें तीन जातियों की प्रभावी संख्या है। इस आधार पर भाजपा और सपा दोनों ही तरफ से जीत के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में जीत के दावों तथा जातीय समीकरण के बीच अनुसूचित जाति वर्ग के जिला पंचायत सदस्यों की भूमिका बढ़ गई है। इस जातीय समीकरण को साधने के लिए दिग्गज नेताओं की घेराबंदी भी शुरू हो गई है।

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जिले में कुल 84 जिला पंचायत सदस्य हैं। इस चुनाव में जाति फैक्टर को इससे ही समझा जा सकता है कि सपा और भाजपा दोनों दलों की ओर से सदस्यों की जातिवार सूची तैयार की गई है। यादव बिरादरी के 20 से अधिक सदस्य निर्वाचित हुए हैं। वहीं पटेल बिरादरी के 13 सदस्य निर्वाचित हुए हैं। अनुसूचित जाति के सदस्यों की संख्या 22 है। सर्वण बिरादरी के निर्वाचित सदस्यों की संख्या करीब एक दर्जन है। इसे ध्यान में रखकर चुनाव की रणनीति बनाई जा रही है। साथ ही जीत के दावे किए जा रहे हैं।

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prayagraj news : भाजपा प्रत्याशी घोषित होने पर डॉ. वीके सिंह का मुंह मीठा कराते डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य। - फोटो : prayagraj

हालांकि, जाति के आधार पर मतों के ध्रुवीकरण की कवायद के बीच सपा और भाजपा के सामने एका बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ गई है। खासतौर पर, यमुनापार के दो दिग्गज नेताओं की भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। कई निर्वाचित सदस्यों पर इनका अधिक प्रभाव होने की बात कही जा रही है। इनमें से एक सपा के वरिष्ठ नेता है तो दूसरे भाजपा में हैं। जानकारों का कहना है कि सियासी पृष्टभूमि को देखते हुए दोनों ही नेताओं को जातीय ध्रुवीकरण की राजनीति रास नहीं आएगी। ऐसे में दोनों दलों के सामने इन नेताओं को भी मनाने की चुनौती है। इसके अलावा जीत के लिए 43 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। ऐसे में अनुसूचित जाति के निर्वाचित 22 सदस्यों के रुख पर सभी की नजर है।

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prayagraj news : डॉ. वीके सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित किया। - फोटो : prayagraj

केशरी और रेखा के बगैर 21 वर्ष बाद होगा अध्यक्ष का चुनाव

जिला पंचायत अध्यक्ष के 26 वर्ष के इतिहास में 21 वर्ष बाद ऐसा होगा जब सांसद केशरी देवी पटेल और रेखा सिंह के बिना चुनाव होगा। जिला पंचायत का गठन 1995 में हुआ था। इससे पहले जिला परिषद हुआ करता था। 1995 के चुनाव में जनता दल के विश्राम दास अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उन्होंने कांग्रेस समर्थित पूर्व सांसद राम निहोर राकेश की पत्नी को हराया था।

इसके बाद वर्ष 2000 के चुनाव में केशरी देवी पटेल अध्यक्ष निर्वाचित हुईं थीं। इसके बाद 2005 के चुनाव से ही केशरी देवी और रेखा सिंह के बीच मुकाबला होता रहा। केशरी देवी बसपा तथा रेखा सिंह सपा के समर्थन से चुनाव लड़ती रहीं और 2020 तक यह सिलसिला चला। हालांकि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में दोनों नेता इस समय भाजपा में हैं और करीब 21 वर्ष बाद इनमें से कोई अध्यक्ष पद का चुनाव भी नहीं लड़ रहा। हालांकि, रेखा सिंह जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई हैं और भाजपा की ओर से उन्हें प्रबल उम्मीदवार भी माना जा रहा था लेकिन भाजपा ने वीके सिंह को मैदान में उतार दिया है।

गंगापार के खाते में पहली बार आएगी अध्यक्ष की कुर्सी

जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पहली गंगा पार के खाते में आएगी। पहले निर्वाचित अध्यक्ष विश्राम दास मेजा के थे तो इनके बाद इस कुर्सी पर लंबे समय तक काबिज रहने वाली रेखा सिंह भी मांडा तथा केशरी देवी पटेल करछना से सदस्य निर्वाचित होती रहीं। वहीं इस बार भाजपा समर्थित वीके सिंह और सपा की मालती यादव दोनों ही उम्मीदवार हंडिया के अलग-अलग वार्ड से सदस्य निर्वाचित हुए हैं।

वीके सिंह ने लिए नामांकन फार्म

भाजपा समर्थित वीके सिंह ने सोमवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन फार्म लिए। उन्होंने चार सेट में फार्म लिए। सपा समर्थित मालती यादव पहले ही फार्म ले चुकी हैं। नामांकन 26 जून को होगा।
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