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हाईकोर्ट : सरकारी वकील के बजाय स्टेनोग्राफर से जवाबी हलफनामा तैयार कराने पर कोर्ट नाराज, प्रमुख सचिव न्याय तलब
Sat, 03 Feb 2024 12:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 03 Feb 2024 12:33 PM IST
सार
कोर्ट ने प्रमुख सचिव से राज्य विधि अधिकारियों से ही जवाबी हलफनामे तैयार कराने एवं स्टेनोग्राफर द्वारा तैयार करने को प्रतिबंधित करने के उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने दिनेश पांडेय की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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अदालत।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य विधि अधिकारियों के बजाय मुख्य स्थाई अधिवक्ता कार्यालय के स्टेनोग्राफर द्वारा विभाग से प्राप्त कथन के आधार पर जवाबी हलफनामे तैयार करने पर नाराजगी जताई है और प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय को 19 फरवरी को तलब किया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव से राज्य विधि अधिकारियों से ही जवाबी हलफनामे तैयार कराने एवं स्टेनोग्राफर द्वारा तैयार करने को प्रतिबंधित करने के उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने दिनेश पांडेय की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची का शस्त्र लाइसेंस उसके खिलाफ आपराधिक केस के कारण निरस्त कर दिया गया।ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद लाइसेंस निरस्त करने के आदेश के खिलाफ कमिश्नर के समक्ष अर्जी दी। कमिश्नर ने आपराधिक केस में याची को बरी करने के आदेश पर विचार किए बगैर अपील खारिज कर दी।जिसपर यह याचिका दायर की गई। राज्य सरकार की तरफ से दाखिल जवाबी हलफनामे में याची को बरी किए जाने के तथ्य का कोई जवाब नहीं दिया।वल्कि इसका जिक्र तक नहीं किया।
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कोर्ट ने कहा नियमानुसार मुख्य स्थाई अधिवक्ता,अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता या स्थाई अधिवक्ता द्वारा जवाबी हलफनामा तैयार कराया जाना चाहिए। हलफनामे को देखने से लगता है कि मुख्य स्थाई अधिवक्ता कार्यालय के स्टेनोग्राफर ने विभाग की टिप्पणी के आधार पर टाइप कर दिया। इसपर कोर्ट ने विधि परामर्शी प्रमुख सचिव न्याय से रिपोर्ट मांगी है।
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यहां यह भी उल्लेखनीय है कि न्याय विभाग ने अपर महाधिवक्ताओं व मुख्य स्थाई व अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ताओं के विभाग नियत करते हुए प्रभावी पैरवी करने की बहुत पहले ही अधिसूचना जारी की है। जिसमें साफ निर्देश है कि सरकार की तरफ से याचिकाएं व अपीलें मुख्य स्थाई अधिवक्ताओं द्वारा ही तैयार की जाएगी, ताकि सरकार प्रभावी पक्ष रख सके।