{"_id":"5e94bb9f8ebc3e76a4210487","slug":"businessman-said-it-is-difficult-to-spend-staff-and-shop-city-desk-news-ald273280362","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यापारी बोले, कर्मचारियों और दुकान का खर्चा चलाना हो रहा मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यापारी बोले, कर्मचारियों और दुकान का खर्चा चलाना हो रहा मुश्किल
विज्ञापन
लॉकडाउन में जिले का व्यापार व उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। जरूरी सेवाओं के लिए कुछ दुकानें और कारखाने सोशल डिस्टेंसिंग के आधार पर भले ही खुले हों लेकिन शहर का बाकी व्यापार एवं उद्योग पूरी तरह से बंद है। व्यापारिक संगठन इससे खासे हताश हैं। अधिकांश संगठन के पदाधिकारियों का यही कहना है कि छोटे एवं मझोले व्यापारियों के समक्ष अपने कर्मचारियों और दुकानों का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। इसे देखते हुए व्यापारियों ने सरकार से आपदा पैकेज मांगा है।
सिविल लाइंस व्यापार मंडल, प्रयाग व्यापार मंडल समेत तमाम व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री एवं मुख्यमंत्री से सभी छोटे एवं मझोले व्यापारियों को राहत पैकेज देने की मांग की है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का तर्क है कि कोरोना महामारी से पूरा देश जूझ रहा है। इसे मात देने के लिए लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प है। जिसे सरकार ने समय से लागू कर दिया। बीते 24 दिन के दौरान व्यापारियों के समक्ष तमाम देनदारियां आ गई। इसमें व्यापारियों के समक्ष अपने कर्मचारियों को लॉक डाउन अवधि के दौरान वेतन का भुगतान, बैंकों से व्यापार करने के लिए ऋण पर लॉकडाउन अवधि के ब्याज का भुगतान, व्यापारिक प्रतिष्ठानों के किराये का भुगतान, वेतन पर दिए जाने वाले अंशदान का भुगतान और व्यापारिक कार्य के लिए खरीदे गए वाहनों की लॉक डाउन अवधि में ऋण की किश्तों का भुगतान प्रमुख रूप से शामिल है।
सरकार से यह राहत मांग रहे व्यापारी
1. व्यापारियों के ऋण पर लॉक डाउन अवधि तक के ब्याजों के भुगतान को माफ किया जाए।
2. सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान के ऋणों का भुगतान छह माह के लिए स्थगित करने एवं इन पर देय ब्याज को भी माफ किया जाए।
3. व्यापारियों को छह माह तक जीएसटी कर के भुगतान से मुक्त किया जाए या कर प्रतिशत को आधा किया जाए।
4. लॉक डाउन अवधि के दौरान सभी सरकारी देय समाप्त किए जाए।
5. इस अवधि में वाणिज्यिक बिजली के बिलों से जुड़े फिक्स चार्ज एवं डिमांड चार्ज के भुगतान को माफ किया जाए।
सरकार द्वारा जिस तरह से समय-समय पर किसानों एवं समाज के अन्य वर्गों को राहत प्रदान की जाती है, उसी तरह से व्यापारियों को भी इस समय राहत संकुल की नितांत आवश्यकता है। अन्यथा व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे।
विज्ञापन
सुशील खरबंदा, अध्यक्ष सिविल लाइंस व्यापार मंडल
मेरा एक बैंक में चालू खाता है। लॉक डाउन की वजह से खाते में लेनदेन न हो पाने की वजह से बैंक प्रबंधन ने 4800 रुपये काट लिए। बैंक का तर्क है कि ट्रांजेक्शन न होने की वजह से बैंक ने यह राशि काटी। अब सरकार या तो हमें व्यवसाय करने दे या फिर बैंकों को निर्देश दे कि वह व्यापारियों के खाते से पैसा न काटे।
मोहम्मद कादिर, जिलाध्यक्ष प्रयाग व्यापार मंडल
00000000000000000000000
ट्रांसपोर्टरों को हर रोज लग रही करोड़ों की चपत
0 लॉक डाउन की वजह से पिछले 24 दिनों से शहर का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया है। सिर्फ आवश्यक सेवाओं में लगे छोटे-बड़े वाहनों की ही आवाजाही इन दिनों हो पा रही है। कैट प्रदेश अध्यक्ष महेेंद्र गोयल का कहना है कि जिले में ट्रांसपोर्ट गतिविधि 22 मार्च से ही तकरीबन ठप है। एक अनुमान के मुताबिक इस पेशे से जुड़े लोगों को अब तक 300 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इलाहाबाद गुडस ट्रांसपोर्ट एंड मोटर्स ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुशवाहा ने बताया कि अकेले ट्रांसपोर्ट नगर में ही तकरीबन 125 ट्रांसपोर्टरों के कार्यालय हैं। जिले भर में यह संख्या 350 से अधिक है। औसतन एक ट्रांसपोर्टर के जिम्मे पांच लोगों का खर्च रहता है। अब सब्जी एवं राशन के अलावा छोटे एवं बड़े ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। इस व्यवसाय से जुड़े मजदूरों का भी बुरा है। अधिकांश मजदूर अपने-अपने गांव चले गए हैं। ट्रांसपोर्टर कुलदीप मिश्र ने बताया कि हार्डवेयर, पेंटस, हैंडलूम, होजरी समेत तमाम चीजों की आवाजाही बंद है। बहुत से ट्रक अब भी देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं। कुछ ड्राइवर ट्रकों को ढाबे या पेट्रोल पंप में छोड़कर अपने घर चले गए हैं।
विज्ञापन
सिविल लाइंस व्यापार मंडल, प्रयाग व्यापार मंडल समेत तमाम व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री एवं मुख्यमंत्री से सभी छोटे एवं मझोले व्यापारियों को राहत पैकेज देने की मांग की है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का तर्क है कि कोरोना महामारी से पूरा देश जूझ रहा है। इसे मात देने के लिए लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प है। जिसे सरकार ने समय से लागू कर दिया। बीते 24 दिन के दौरान व्यापारियों के समक्ष तमाम देनदारियां आ गई। इसमें व्यापारियों के समक्ष अपने कर्मचारियों को लॉक डाउन अवधि के दौरान वेतन का भुगतान, बैंकों से व्यापार करने के लिए ऋण पर लॉकडाउन अवधि के ब्याज का भुगतान, व्यापारिक प्रतिष्ठानों के किराये का भुगतान, वेतन पर दिए जाने वाले अंशदान का भुगतान और व्यापारिक कार्य के लिए खरीदे गए वाहनों की लॉक डाउन अवधि में ऋण की किश्तों का भुगतान प्रमुख रूप से शामिल है।
विज्ञापन
सरकार से यह राहत मांग रहे व्यापारी
1. व्यापारियों के ऋण पर लॉक डाउन अवधि तक के ब्याजों के भुगतान को माफ किया जाए।
2. सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान के ऋणों का भुगतान छह माह के लिए स्थगित करने एवं इन पर देय ब्याज को भी माफ किया जाए।
3. व्यापारियों को छह माह तक जीएसटी कर के भुगतान से मुक्त किया जाए या कर प्रतिशत को आधा किया जाए।
4. लॉक डाउन अवधि के दौरान सभी सरकारी देय समाप्त किए जाए।
5. इस अवधि में वाणिज्यिक बिजली के बिलों से जुड़े फिक्स चार्ज एवं डिमांड चार्ज के भुगतान को माफ किया जाए।
सरकार द्वारा जिस तरह से समय-समय पर किसानों एवं समाज के अन्य वर्गों को राहत प्रदान की जाती है, उसी तरह से व्यापारियों को भी इस समय राहत संकुल की नितांत आवश्यकता है। अन्यथा व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे।
विज्ञापन
सुशील खरबंदा, अध्यक्ष सिविल लाइंस व्यापार मंडल
मेरा एक बैंक में चालू खाता है। लॉक डाउन की वजह से खाते में लेनदेन न हो पाने की वजह से बैंक प्रबंधन ने 4800 रुपये काट लिए। बैंक का तर्क है कि ट्रांजेक्शन न होने की वजह से बैंक ने यह राशि काटी। अब सरकार या तो हमें व्यवसाय करने दे या फिर बैंकों को निर्देश दे कि वह व्यापारियों के खाते से पैसा न काटे।
मोहम्मद कादिर, जिलाध्यक्ष प्रयाग व्यापार मंडल
00000000000000000000000
ट्रांसपोर्टरों को हर रोज लग रही करोड़ों की चपत
0 लॉक डाउन की वजह से पिछले 24 दिनों से शहर का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो गया है। सिर्फ आवश्यक सेवाओं में लगे छोटे-बड़े वाहनों की ही आवाजाही इन दिनों हो पा रही है। कैट प्रदेश अध्यक्ष महेेंद्र गोयल का कहना है कि जिले में ट्रांसपोर्ट गतिविधि 22 मार्च से ही तकरीबन ठप है। एक अनुमान के मुताबिक इस पेशे से जुड़े लोगों को अब तक 300 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इलाहाबाद गुडस ट्रांसपोर्ट एंड मोटर्स ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुशवाहा ने बताया कि अकेले ट्रांसपोर्ट नगर में ही तकरीबन 125 ट्रांसपोर्टरों के कार्यालय हैं। जिले भर में यह संख्या 350 से अधिक है। औसतन एक ट्रांसपोर्टर के जिम्मे पांच लोगों का खर्च रहता है। अब सब्जी एवं राशन के अलावा छोटे एवं बड़े ट्रकों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। इस व्यवसाय से जुड़े मजदूरों का भी बुरा है। अधिकांश मजदूर अपने-अपने गांव चले गए हैं। ट्रांसपोर्टर कुलदीप मिश्र ने बताया कि हार्डवेयर, पेंटस, हैंडलूम, होजरी समेत तमाम चीजों की आवाजाही बंद है। बहुत से ट्रक अब भी देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं। कुछ ड्राइवर ट्रकों को ढाबे या पेट्रोल पंप में छोड़कर अपने घर चले गए हैं।