फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Broken swing, even jogging track

टूटे झूले, जॉगिंग ट्रैक भी लगे उखड़ने

Thu, 10 May 2018 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 10 May 2018 01:38 AM IST
विज्ञापन
Broken swing, even jogging track
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद सरकार चंद्रशेखर आजाद पार्क की मरम्मत के लिए बजट का इंतजाम नहीं हो पाया है। ऐसे में शहरियों में पांच रुपये प्रवेश शुल्क लिए जाने जाने का सिलसिला जारी है। इस राशि का भी समुचित इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि पार्क में जॉगिंग ट्रैक उखड़ रहा है और झूले एक-एक कर टूटते जा रहे हैं। सबसे अधिक निराशा बच्चों में है। क्योंकि झूलों का आकर्षण ही उनको पार्क की ओर खींच कर ले जाता है। दो वर्ष पहले ही पार्क का सौंदर्यीकरण किया गया। इसके साथ बच्चों के पार्क में भी एक से से लेकर 10 साल तक बच्चों के लिए अलग-अलग झूले लगाए गए। बच्चों के फिसलने के लिए कई तरह के स्लोप भी लगाए गए हैं। अब स्कूल बंद होने वाले हैं। ऐसे में इसमें भीड़ और बढ़ेगी लेकिन, अब बच्चे अभी से निराश हैं। नन्हें बच्चों के प्यारे ‘छोटे हाथी’ की दशा भी खराब है तो अन्य स्लाइडर भी उखड़ने लगे हैं।
विज्ञापन


अभी कुछ महीने पहले ही जॉगिंग ट्रैक नए सिरे से बनाए गए हैं। उनकी रंगाई भी की गई लेकिन, फिर से उखड़ने लगे हैं। पानी के बौछार के लिए लगे स्प्रिंक्लर के खराब होने जाने से जॉगिंग ट्रैक को और खतरा बन गया है। सौंदर्यीकरण के बाद आजाद पार्क में बनी झील आकर्षण का मुख्य केंद्र रही, लेकिन कुछ ही महीनों में झील सूख गई। झील में जमा पानी बदला नहीं गया और बदबू फैलने लगी। इसकी वजह से लोगों ने उधर, जाना ही छोड़ दिया। अब तो झील पूरी तरह सूख गई है। उसमें लगे दो फाउंटेन भी बंद हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अब यह पार्क का सबसे उपेक्षित क्षेत्र बन गया है। हालांकि, अफसरों का कहना है कि झील को नए सिरे से संवारा जा रहा है। वह पहले से भी अधिक आकर्षक होगी।
विज्ञापन


पांच रुपये के टिकट से उद्यान प्रशासन को एक वर्ष में 1.30 करोड़ रुपये की कमाई हुई। चूंकि आजाद पार्क में गार्डेनिंग आदि के लिए सरकार से अलग से बजट मिलता है। टिकट से मिली राशि पार्क में हुए नए कार्यों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। अफसरों का कहना है कि यह राशि इसके लिए पर्याप्त है। उनका कहना है कि जॉकिंग ट्रैक के रखरखाव पर एक वर्ष में 15 से 20 लाख रुपये खर्च होंगे। सुरक्षा, शौचालय, सफाई, फाउंटेन का मरम्मत आदि पर खर्च के लिए यह राशि पर्याप्त है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आजाद पार्क के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी शहरियाें पर डाल दी गई है। पार्क की सुरक्षा पर वर्ष में 60 लाख रुपये खर्च होंगे। यह राशि टिकट से ही जुटाई जानी है। इसके लिए इसी महीने टेंडर होने की उम्मीद है। हालांकि, सुरक्षा के दावों की पोल बाल पार्क में लगे झूलों से खुल जाती है। प्रतिबंध के बावजूद वयस्क भी अधिक उम्र के लड़के-लड़कियां झूलों का उपयोग करती हैं। एक गार्ड है जो उन्हें रोकता है लेकिन कोई असर नहीं होता। कई बार तो युवक गार्ड के साथ बदतमीजी तक कर देते हैं।


‘सिक्योरिटी एजेंसी के चयन के लिए जल्द टेंडर होना है। बच्चों के पार्क में लगे झूलों की मरम्मत भी इसी सप्ताह करा ली जाएगी। छुट्टियों को देखते हुए इसकी प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है।’
- उमेश उत्तम, अधीक्षक, चंद्रशेखर आजाद पार्क
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed