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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Bageshwar government said: Hanumanji's life is not an ideal, it is a lifeline to overcome crisis.

बागेश्वर सरकार बोले : हनुमानजी का जीवन एक आदर्श नहीं, संकट से उबरने की संजीवनी है

Mon, 27 Jan 2025 07:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 27 Jan 2025 07:58 PM IST
सार

आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) ने सोमवार को हनुमंत कथा सुनाई। यह कथा अरैल स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में चल रही है। सोमवार को पवन पुत्र के अतुलित गुणों बखान करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हनुमानजी का जीवन मानव के लिए केवल एक आदर्श नहीं बल्कि एक संजीवनी है जो हर संकट से उबरने का संदेश देती है।

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Bageshwar government said: Hanumanji's life is not an ideal, it is a lifeline to overcome crisis.
आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लेते सांसद अरुण गोविल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) ने सोमवार को हनुमंत कथा सुनाई। यह कथा अरैल स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम में चल रही है। सोमवार को पवन पुत्र के अतुलित गुणों बखान करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हनुमानजी का जीवन मानव के लिए केवल एक आदर्श नहीं बल्कि एक संजीवनी है जो हर संकट से उबरने का संदेश देती है। कहा कि हनुमंत कथा एक दिव्य उपहार है, जो जीवन के संघर्षों, चुनौतियों और परेशानियों से निपटने के लिए अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान करती है। हनुमान जी की कथा केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यथार्थ है, जो हमें अपने जीवन को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करती है। हनुमान जी की भक्ति, उनकी शक्ति और उनका समर्पण हमें यह सिखाता हैं कि हम किसी भी संकट से जूझते हुए अगर सच्चे हृदय से भक्ति करें, तो हम हर मुश्किलों से पार पा सकते हैं। 

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आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण ने कहा कि जीवन का वास्तविक बल केवल प्रभु श्रीराम हैं। जीवन में चार बल होते हैं तप का बल, शक्ति का बल, धन का बल लेकिन प्रभु भक्तों के पास तो प्रभु के श्रीनाम का परम बल होता है। भगवान की कृपा से हमें संगम में तट पर तीन दिनों तक श्री हनुमत कथा में डुबकी लगाने का अवसर प्राप्त हो रहा है। कथा हमें संसार के संगम से पार जाने की युक्ति प्रदान करती है। संगम में स्नान करने से तन की शुद्धि व पापों से मुक्ति होती है और कथा रूपी संगम में डुबकी लगाने से मन की शुद्धि होती है।
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साध्वी भगवती ने कहा- भारत की सनातन संस्कृति सबसे उत्तम

डॉ साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज हम सभी को यह दिव्य अवसर प्राप्त हुआ है। हमें भक्ति की शक्ति में डुबकी लगाने का अवसर प्राप्त हो रहा है। साध्वी जी ने कहा कि अमेरिका ने मुझे जीवन दिया लेकिन भारत ने मुझे जान दी। गुरु कृपा से मैं भारत में रहती हूं, परन्तु अब मुझे ऐसा लगता है कि अब भारत मुझ में रहता है। हनुमान जी मेरी प्रेरणा हैं। वे मेरे ईष्ट देवता हैं। हमें अपने जीवन में बड़ा नहीं बल्कि बढ़िया बनना चाहिए। भारत की सनातन संस्कृति और गुरु परंपरा ही सबसे बढ़िया है। उन्होंने कहा कि आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन संस्कृति को पूरे विश्व के प्रचारित व प्रसारित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है।

रामायण में भगवान श्रीराम का किरदान निभाने वाले सांसद अरुण गोविल ने कहा कि महाकुंभ पवित्रता का महोत्सव है। महाकुंभ जैसी पवित्रता कहीं भी नहीं देखी। महाकुंभ एकता, दिव्यता और समरसता का महोत्सव है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य बागेश्वर जी के पावन सान्निध्य में हनुमत कथा में आकर ऐसा लग रहा है जैसे यही धरती पर स्वर्ग है। 

स्वामी चिदानंद बोले- सेवा के लिए ही हुआ हनुमानजी का अवतार

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि महाबली हनुमान जी अपने लिए नहीं जिये, अपने लिए कुछ भी तो नहीं किया उन्होंने सब कुछ प्रभु के लिए और जो भी है वह सब भी प्रभु का इस भाव से जो किया। वह भी सब प्रभु को ही समर्पित कर दिया। तेरा तुझको सौंपते क्या लागत है मोर। समाज को जरूरत है ऐसे ही विचारों की, जहां ’राम काज कीन्हें बिना, मोहि कहां विश्राम।’ जब तक राम काज; सेवा कार्य पूर्ण न हो विश्राम कहाँ, सुख कहाँ, चैन कहा।  कहा कि श्री हनुमन जी सभी के ऊपर ऐसी कृपा करें की जीवन में न अहम रहे, न वहम रहे, बस ’सेवा, समर्पण एवं त्याग से युक्त यह जीवन प्रभु को अर्पित हो और हम सब भी सादगी, सरलता और हनुमान जी जैसी उदारता के साथ समाज और समष्टि की सेवा में अपने को समर्पित करें यही तो है जीवन का सार और यही महाकुंभ में हो रही हनुमत कथा का संदेेश भी है। सेवा व समर्पण के माध्यम से ही हनुमान जी का सभी के हृदय में अवतरण हो। इसके पूर्व साध्वी भगवती सरस्वती जी और आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने दीप प्रज्वलित कर दिव्य हनुमत कथा का शुभारम्भ किया।

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