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कुंभ मेला 2019: कुंभ का अर्थ और महत्व समझें युवा- आनंद गिरी
Sun, 03 Mar 2019 06:35 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 03 Mar 2019 06:35 PM IST
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योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा है कि गंगा हमें धर्म चिंतन अध्यात्म से जोड़ती है। सदियों में गंगा अपने निर्मल अमृत से मानव का सृजन एवं संरक्षण कर रही है। यह धर्म एवं मोक्ष प्रदायिनी है। गंगा सेना शिविर में शनिवार को हुए युवा कुंभ में ‘धर्म, संस्कृति, परंपरा एवं अर्थव्यवस्था में कुंभ का योगदान’ विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि युवाओं को कुंभ के महत्व को जानते, समझते हुए उसे आत्मसात करना चाहिए। यह अद्वितीय कुंभ पर्व है जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं ने आकर डुबकी लगाई और अमृत पान किया। ऐसा अद्भुत संयोग सिर्फ प्रयागराज की भूमि पर ही संभव हुआ।
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कहा, युवा देश के भविष्य हैं, परंपरा निर्माण में उन्हें आगे आना होगा ताकि देश में आस्था, धर्म, योग, परंपरा जीवित रहे। वरिष्ठ समाजसेवी फूल चंद्र दुबे ने कहा कि कुंभ समाज को जोड़ने का प्रमुख कारक है। युवाओं की सहभागिता से ही गंगा अविरल निर्मल बनेगी। जययोद्धा आर्य शेखर ने गंगाजल के बाजारीकरण पर चिंता जताई। कहा, गंगा केवल कागजों पर ही स्वच्छ निर्मल हो रही है। कोलकाता विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रांतिक चक्त्रस्वर्ती ने कहा, कुंभ जनमानस की आस्था का संगम है। प्रत्येक युवा को धर्म की रक्षा के लिए आगे आना होगा। उत्तराखंड से लेकर गंगासागर तक गंगा आस्था की प्रतिमूर्ति है। स्वागत एवं संचालन संयोजक विजय दिवेदी ने किया। कार्यक्त्रस्म में प्रशांत पांडे, हरिओम त्रिपाठी, शरद आदि मौजूद थे।
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