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सर्विस रिकॉर्ड से संतुष्ट अधिकारी दे सकता है अनिवार्य सेवानिवृत्ति
Wed, 22 Apr 2020 09:48 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 22 Apr 2020 09:48 PM IST
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- फोटो : court
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सक्षम अधिकारी किसी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश उसके सेवा रिकार्ड पर विचार कर संतुष्ट होने पर दे सकता है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश पारित करने से पूर्व उस कर्मचारी को सुनवाई का अवसर देना जरूरी नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने एकल जज के आदेश के खिलाफ यूपी राज्य विद्युत परिषद की अपील को मंजूर करते हुए एकल जज के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश के खिलाफ याची की याचिका भी खारिज कर दी। यह निर्णय जस्टिस विश्वनाथ सोमद्दर व जस्टिस डॉ वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यूपी राज्य विद्युत परिषद की विशेष अपील स्वीकार करते हुए दिया है।
याची रघुराज सिंह के खिलाफ स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति पर बोर्ड के आदेश से 23 फरवरी 1994 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश पारित किया गया था। इस आदेश को याचिका दायर कर चुनौती दी थी। एकल जज ने याची के पक्ष में निर्णय देकर सेवानिवृत्ति आदेश को गलत माना था तथा कहा था कि रिकार्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं था, जिससे यह कहा जा सके कि याची की जनहित में सेवा की आवश्यकता नहीं है। विशेष अपील में विभाग का कहना था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति पर तथा बोर्ड के आदेश के बाद पारित किया गया है।
कहा गया था कि याची के खिलाफ कार्य में शिथिलता, घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता आदि की रिपोर्ट है। इन सभी रिपोर्ट पर विचार कर संतुष्ट होने पर ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश पारित किया गया है। कहा यह भी गया था कि सारे तथ्य जवाब में लगाए गए थे, लेकिन एकल जज ने इस पर विचार किए बगैर अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश को गलत करार दिया था। विशेष अपील बेंच ने एकल जज के आदेश को रद्द कर दिया तथा कहा कि रेगुलेशन 1975 के 2(बी) के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश पारित किया गया है।
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यह प्रावधान फंडामेंटल रूल 56 (जे) व 56 (सी) मिलता जुलता है। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी कर्मचारी के सर्विस रिकार्ड से संतुष्ट हो जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दे सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट की तमाम नजीरों का उल्लेख किया है तथा कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। याची को आदेश पारित होने से पूर्व सुनवाई का अवसर देना जरूरी नहीं है।
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याची रघुराज सिंह के खिलाफ स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति पर बोर्ड के आदेश से 23 फरवरी 1994 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश पारित किया गया था। इस आदेश को याचिका दायर कर चुनौती दी थी। एकल जज ने याची के पक्ष में निर्णय देकर सेवानिवृत्ति आदेश को गलत माना था तथा कहा था कि रिकार्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं था, जिससे यह कहा जा सके कि याची की जनहित में सेवा की आवश्यकता नहीं है। विशेष अपील में विभाग का कहना था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति पर तथा बोर्ड के आदेश के बाद पारित किया गया है।
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कहा गया था कि याची के खिलाफ कार्य में शिथिलता, घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता आदि की रिपोर्ट है। इन सभी रिपोर्ट पर विचार कर संतुष्ट होने पर ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश पारित किया गया है। कहा यह भी गया था कि सारे तथ्य जवाब में लगाए गए थे, लेकिन एकल जज ने इस पर विचार किए बगैर अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश को गलत करार दिया था। विशेष अपील बेंच ने एकल जज के आदेश को रद्द कर दिया तथा कहा कि रेगुलेशन 1975 के 2(बी) के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश पारित किया गया है।
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यह प्रावधान फंडामेंटल रूल 56 (जे) व 56 (सी) मिलता जुलता है। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी कर्मचारी के सर्विस रिकार्ड से संतुष्ट हो जनहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दे सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट की तमाम नजीरों का उल्लेख किया है तथा कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। याची को आदेश पारित होने से पूर्व सुनवाई का अवसर देना जरूरी नहीं है।