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High Court : लंबित मुकदमे के दौरान नई परिस्थितियां उत्पन्न होने पर दी जा सकती है संशोधन की अनुमति
Sun, 22 Mar 2026 03:23 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 22 Mar 2026 03:23 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान कोई नया कारण या परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो उसके आधार पर संशोधन की अनुमति दी जा सकती है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान कोई नया कारण या परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो उसके आधार पर संशोधन की अनुमति दी जा सकती है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने अलीगढ़ के महेश शर्मा की याचिका स्वीकार कर ली। कहा कि वादी उस नए कारण पर अलग से मुकदमा दायर करने का हकदार है तो लंबित मुकदमे में ही संशोधन की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि न्याय के उद्देश्य पूरा हो सके।
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याची ने 2016 में बिक्री विलेख (बैनामा) रद्द करने का वाद दायर किया था पर 2021 में उसे संपत्ति से बेदखल कर दिया गया। जब उसने कब्जा वापसी के लिए मुकदमे में संशोधन की अर्जी दी तो निचली अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का रुख किया। याची की अधिवक्ता तनिषा जहांगीर मुनीर ने दलील दी कि संशोधन अर्जी पर निर्णय लेने के चरण में नए मुकदमे के लिए जो कारण प्रस्तुत किया गया है, वह प्रतिबंधित नहीं है। ट्रायल कोर्ट को इस तथ्य पर विचार करना चाहिए था।
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