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Prayagraj : मरीजों के इंतजार में खड़ी 55 लाख की एंबुलेंस का निकला दम, समाप्त हो गया फिटनेस

Mon, 21 Oct 2024 05:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 21 Oct 2024 05:11 PM IST
सार

औसतन एंबुलेंस को एक लाख 20 हजार किलोमीटर चलना था। ऐसे में क्या दस साल के अंदर एसआरएन में गिने-चुने ही गंभीर मरीज आए। सूत्रों की मानें तो वीआईपी की सेवा की वजह से इसमें मरीज नहीं ढोए गए। वहीं, पांच महीने पहले एसआरएन में दो मरीजों को अस्पताल से घर और घर से अस्पताल पहुंचाने का काम किया गया।

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Ambulance worth Rs 55 lakh waiting for patients died, fitness ended
मेडिकल कॉलेज परिसर में खड़ी एंबुलेंस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में मरीजों के इंतजार में खड़ी एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस (एएलएस) का दम निकल गया। दिसंबर 2014 में प्रदेश सरकार ने सौंपी थी, लेकिन 7000 किमी चलने के बाद इसका जून 2024 में फिटनेस समाप्त हो गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर शुरुआत में ही यह एसआरएन अस्पताल को क्यों नहीं सौंपी गई।

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औसतन एंबुलेंस को एक लाख 20 हजार किलोमीटर चलना था। ऐसे में क्या दस साल के अंदर एसआरएन में गिने-चुने ही गंभीर मरीज आए। सूत्रों की मानें तो वीआईपी की सेवा की वजह से इसमें मरीज नहीं ढोए गए। वहीं, पांच महीने पहले एसआरएन में दो मरीजों को अस्पताल से घर और घर से अस्पताल पहुंचाने का काम किया गया। इस दौरान स्टॉर्ट करने में परेशानी होने पर एसआरएन भी इसे लेने में कतराने लगा। क्योंकि, इसके अभिलेख भी पूरे नहीं हैं।
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वहीं, तीन जून 2024 को एंबुलेंस का फिटनेस समाप्त होने के बाद दोबारा कराने की जरूरत भी नहीं समझी गई। ऐसे में यह वापस एमएलएन मेडिकल कॉलेज परिसर में ले जाकर खड़ी कर दी गई। वैसे सरकारी दस्तावेजों में इसकी मियाद नौ साल 10 महीने में पूरी हो गई।

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एएलएस में मरीज संग भेजा गया था ऑक्सीजन प्लांट टेक्नीशियन

एमएलएन मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ.वत्सला मिश्रा के निर्देश पर 18 जून 2024 को आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज मालती देवी को उनके घर एंबुलेंस से भेजा जा रहा था। इस दौरान एंबुलेंस को स्टॉर्ट करने में काफी दिक्कत आई। इसके अलावा एंबुलेंस का लाइफ सपोर्ट यंत्र व एसी भी काम नहीं कर रहा था। घंटों परेशान होने के बाद अस्पताल की छवि धूमिल न हो, इसके लिए अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट टेक्नीशियन को एएलएस में मरीज के साथ भेजा गया।

क्या होती है लाइफ सपोर्ट सिस्टम एंबुलेंस

1-इसमें उन्नत चिकित्सा उपकरण जैसे वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, और जरूरी दवाएं होती हैं।
2-इसमें पैरामेडिक्स होते हैं, जो आपातकालीन देखभाल करते हैं।
3-यह एंबुलेंस गंभीर परिस्थितियों को संभालती है।
4-इसमें उन्नत वायुमार्ग प्रबंधन, अंतःशिरा चिकित्सा, हृदय की निगरानी और दवा प्रशासन जैसी सुविधाएं होती हैं।
5-मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे एएलएस एंबुलेंस से उच्च चिकित्सा संस्थान पहुंचाया जाता है।

ऐसा कुछ नहीं है। कई एंबुलेंस पुरानी हो चुकी है, इसलिए नई आ रही हैं। सभी एंबुलेंस मरीजों को अस्पताल लाने और ले जाने का काम करती हैं। - डॉ.वत्सला मिश्रा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

एंबुलेंस की दस साल की अवधि पूरी हो गई हो या फिर 1.65 लाख किलोमीटर चली हो। इन दोनों में से किसी भी एक स्थिति में उसको समाप्त किया जा सकता है। - राजीव चतुर्वेदी, एआरटीओ प्रशासन

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