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आंबेडकर विश्वविद्यालय की फर्जी बीएड डिग्री मामले में फैसला सुरक्षित
Fri, 29 Jan 2021 08:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 29 Jan 2021 08:12 PM IST
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
- फोटो : अमर उजाला
आंबेडकर विश्वविद्यालय से सत्र 2004- 05 में बीएड की डिग्री को अवैध करार दिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे बेसिक शिक्षा परिषद के सैकड़ों अध्यापकों को बर्खास्त कर दिया गया है और उनसे भुगतान किए गए वेतन की वसूली की जा रही है। बर्खास्त अध्यापकों ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दाखिल कर इसे चुनौती दी है।
एकल जज ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर इन अध्यापकों की बीएसए द्वारा की गई बर्खास्तगी को सही ठहराया था । एकल जज के इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई है। कहा गया कि बीएसए का बर्खास्तगी आदेश एस आई टी की रिपोर्ट के आधार पर पारित किया गया है, जो गलत है । यह भी दलील दी गई कि पुलिस रिपोर्ट को अध्यापकों की बर्खास्तगी का आधार नहीं बनाया जा सकता है । कहा गया था कि बीएसए ने बर्खास्तगी से पूर्व सेवा नियमावली के कानून का पालन नहीं किया ।
जबकि सरकार की तरफ से बहस की गई कि इन अध्यापकों की बर्खास्तगी एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर की गई है । परन्तु एसआईटी की रिपोर्ट हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में आई है । हाईकोर्ट ने इस मामले में जाँच कर एस आई टी को रिपोर्ट देने को कहा था । बहस यह भी की गई थी कि फर्जी डिग्री या मार्कशीट के आधार पर सेवा में आने वालों की बर्खास्तगी के लिए सेवा नियमों का पालन करना जरूरी नहीं है । बहरहाल, कोर्ट ने इस मामले में निर्णय सुरक्षित कर लिया है तथा सभी पक्षों के वकीलों को एक सप्ताह में लिखित बहस देने की छूट दी है ।
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एकल जज ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर इन अध्यापकों की बीएसए द्वारा की गई बर्खास्तगी को सही ठहराया था । एकल जज के इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई है। कहा गया कि बीएसए का बर्खास्तगी आदेश एस आई टी की रिपोर्ट के आधार पर पारित किया गया है, जो गलत है । यह भी दलील दी गई कि पुलिस रिपोर्ट को अध्यापकों की बर्खास्तगी का आधार नहीं बनाया जा सकता है । कहा गया था कि बीएसए ने बर्खास्तगी से पूर्व सेवा नियमावली के कानून का पालन नहीं किया ।
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जबकि सरकार की तरफ से बहस की गई कि इन अध्यापकों की बर्खास्तगी एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर की गई है । परन्तु एसआईटी की रिपोर्ट हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में आई है । हाईकोर्ट ने इस मामले में जाँच कर एस आई टी को रिपोर्ट देने को कहा था । बहस यह भी की गई थी कि फर्जी डिग्री या मार्कशीट के आधार पर सेवा में आने वालों की बर्खास्तगी के लिए सेवा नियमों का पालन करना जरूरी नहीं है । बहरहाल, कोर्ट ने इस मामले में निर्णय सुरक्षित कर लिया है तथा सभी पक्षों के वकीलों को एक सप्ताह में लिखित बहस देने की छूट दी है ।
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