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इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ का मुद्दा कार्य परिषद में ले जाने की तैयारी
Tue, 21 May 2019 01:54 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 21 May 2019 01:54 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद का मॉडल लागू करने की तैयारी से माहौल गरमा गया है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे को कार्य परिषद में ले सकता है। ऐसे में सबकी नजर विश्वविद्यालय की आगामी कार्य परिषद की बैठक पर टिकी है। बैठक की तिथि जल्द घोषित की जा सकती है।
सात सात पहले पांच दिसंबर 2011 को इविवि की एकेडमिक कौंसिल की बैठक के दौरान विश्वविद्यालय में छात्र परिषद का मॉडल लागू किए जाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि इस निर्णय के बाद जबर्दस्त विरोध हुआ था और 22 दिसंबर को 2011 को विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र परिषद के गठन का निर्णय वापस लेते हुए छात्रसंघ की बहाली की घोषणा करनी पड़ी थी।
अब विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद का मॉडल फिर से लागू किए जाने की तैयारी चल रही है लेकिन इसके लिए कार्य परिषद की मंजूरी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि इविवि प्रशासन जल्द ही कार्य परिषद की बैठक बुला सकता है और छात्र परिषद के गठन पर निर्णय ले सकता है। हालांकि अभी सुगबुगाहट ही है और इसको लेकर छात्र नेताओं का विरोध तेज हो गया है। ऐसे में सबकों अब कार्य परिषद की बैठक का इंतजार है।
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छह साल तक प्रतिबंधित रहे छात्रसंघ की बहाली के बाद वर्ष 2012 में हुआ पहला चुनाव ही विवादों में फंस गया था। इसमें अध्यक्ष का चुनाव निरस्त कर दिया गया था जबकि दो छात्र नेता जेल से चुनाव लड़े थे। बहाली के बाद वर्ष 2012 में छात्रसंघ चुनाव के बदलावों के साथ कराया गया और यही बदलाव छात्रसंघ के लिए घातक साबित हुआ। इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए दिनेश यादव का चुनाव हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था।
दिनेश यादव एमए में फेल हो गए थे जबकि लिंगदोह की सिफारिशों के अनुसार कोई अभ्यर्थी फेल है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता। इसके अलावा जेल में रहने हुए छात्र नेता अच्युतानंद शुक्ला ने उपाध्यक्ष और अभिषेक सिंह उर्फ माइकल ने महामंत्री पद के लिए पर्चा भरा था। अच्युतानंद चुनाव हार गया था और माइकल को जीत हासिल हुई थी। पिछले साल नवंबर में अच्युतानंद की पीसीबी हॉस्टल में गोली मारकर हत्या कर दी गई और माइकल इस वक्त जेल में है।
छात्रसंघ बचाने के लिए छात्र अब कोर्ट की शरण में जाएंगे। यह निर्णय सोमवार को छात्रसंघ भवन पर आयोजित मौजूद एवं पूर्व पदाधिकारियों और वरिष्ठ छात्र नेताओं की बैठक में लिया गया। छात्रों ने कहा कि जिस तरह ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में गुंडागर्दी, खरीद-फरोख्त और गुटबाजी होती है, छात्र परिषद का मॉडल लागू हुआ तो ऐसी ही स्थित होगी। यह छात्रों के सीधे मताधिकार और लोकतंत्र पर हमला है। छात्र कोर्ट जाकर अपना पक्ष रखेंगे।
छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों के कई शिक्षकों पर महिला उत्पीड़न का मामला चल रहा है लेकिन इविवि प्रशासन इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा और इसके खिलाफ आवाज उठाने पर छात्रसंघ को भंग करने की तैयारी कर रहा है। इसके खिलाफ छात्र आंदोलन करेंगे। बैठक में विश्व विदित सिंह, अरविंद यादव, रजनीश सिंह रिशू, सत्यम कुशवाहा, विजय सिंह बघेल, सोनू यादव, सौरभ सिंह, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष पृथ्वी प्रकाश आदि मौजद रहे। उधर, दिशा छात्र संगठन की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ पर्चा वितरण अभियान की शुरुआत की गई।
संगठन के सदस्यों ने छात्रसंघ को भंग करके छात्र परिषद के गठन किए जाने की तैयारी पर अपना विरोध दर्ज कराया। सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ सभी को एकजुट होना पड़ेगा। साथ ही छात्रसंघ को एमपी, एमएलए का ट्रेनिंग सेंटर बनाने के बजाय छात्रहितों के संघर्ष का मंच बनाना होगा। बैठक में अंगद, अमित आदि मौजूद रहे। उधर, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के छात्र नेता विष्णु कांत मिश्र ने भी छात्र परिषद का विरोध करते हुए कहा है कि ऐसा हुआ तो यह विश्वविद्यालय और कॉलेजों के लिए घातक साबित होगा।
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सात सात पहले पांच दिसंबर 2011 को इविवि की एकेडमिक कौंसिल की बैठक के दौरान विश्वविद्यालय में छात्र परिषद का मॉडल लागू किए जाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि इस निर्णय के बाद जबर्दस्त विरोध हुआ था और 22 दिसंबर को 2011 को विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र परिषद के गठन का निर्णय वापस लेते हुए छात्रसंघ की बहाली की घोषणा करनी पड़ी थी।
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अब विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद का मॉडल फिर से लागू किए जाने की तैयारी चल रही है लेकिन इसके लिए कार्य परिषद की मंजूरी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि इविवि प्रशासन जल्द ही कार्य परिषद की बैठक बुला सकता है और छात्र परिषद के गठन पर निर्णय ले सकता है। हालांकि अभी सुगबुगाहट ही है और इसको लेकर छात्र नेताओं का विरोध तेज हो गया है। ऐसे में सबकों अब कार्य परिषद की बैठक का इंतजार है।
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छह साल तक प्रतिबंधित रहे छात्रसंघ की बहाली के बाद वर्ष 2012 में हुआ पहला चुनाव ही विवादों में फंस गया था। इसमें अध्यक्ष का चुनाव निरस्त कर दिया गया था जबकि दो छात्र नेता जेल से चुनाव लड़े थे। बहाली के बाद वर्ष 2012 में छात्रसंघ चुनाव के बदलावों के साथ कराया गया और यही बदलाव छात्रसंघ के लिए घातक साबित हुआ। इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए दिनेश यादव का चुनाव हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था।
दिनेश यादव एमए में फेल हो गए थे जबकि लिंगदोह की सिफारिशों के अनुसार कोई अभ्यर्थी फेल है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता। इसके अलावा जेल में रहने हुए छात्र नेता अच्युतानंद शुक्ला ने उपाध्यक्ष और अभिषेक सिंह उर्फ माइकल ने महामंत्री पद के लिए पर्चा भरा था। अच्युतानंद चुनाव हार गया था और माइकल को जीत हासिल हुई थी। पिछले साल नवंबर में अच्युतानंद की पीसीबी हॉस्टल में गोली मारकर हत्या कर दी गई और माइकल इस वक्त जेल में है।
छात्रसंघ बचाने के लिए छात्र अब कोर्ट की शरण में जाएंगे। यह निर्णय सोमवार को छात्रसंघ भवन पर आयोजित मौजूद एवं पूर्व पदाधिकारियों और वरिष्ठ छात्र नेताओं की बैठक में लिया गया। छात्रों ने कहा कि जिस तरह ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में गुंडागर्दी, खरीद-फरोख्त और गुटबाजी होती है, छात्र परिषद का मॉडल लागू हुआ तो ऐसी ही स्थित होगी। यह छात्रों के सीधे मताधिकार और लोकतंत्र पर हमला है। छात्र कोर्ट जाकर अपना पक्ष रखेंगे।
छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों के कई शिक्षकों पर महिला उत्पीड़न का मामला चल रहा है लेकिन इविवि प्रशासन इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा और इसके खिलाफ आवाज उठाने पर छात्रसंघ को भंग करने की तैयारी कर रहा है। इसके खिलाफ छात्र आंदोलन करेंगे। बैठक में विश्व विदित सिंह, अरविंद यादव, रजनीश सिंह रिशू, सत्यम कुशवाहा, विजय सिंह बघेल, सोनू यादव, सौरभ सिंह, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष पृथ्वी प्रकाश आदि मौजद रहे। उधर, दिशा छात्र संगठन की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ पर्चा वितरण अभियान की शुरुआत की गई।
संगठन के सदस्यों ने छात्रसंघ को भंग करके छात्र परिषद के गठन किए जाने की तैयारी पर अपना विरोध दर्ज कराया। सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ सभी को एकजुट होना पड़ेगा। साथ ही छात्रसंघ को एमपी, एमएलए का ट्रेनिंग सेंटर बनाने के बजाय छात्रहितों के संघर्ष का मंच बनाना होगा। बैठक में अंगद, अमित आदि मौजूद रहे। उधर, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के छात्र नेता विष्णु कांत मिश्र ने भी छात्र परिषद का विरोध करते हुए कहा है कि ऐसा हुआ तो यह विश्वविद्यालय और कॉलेजों के लिए घातक साबित होगा।