Prayagraj : इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने 111 वर्ष पुरानी विज्ञान परिषद के परिसर को किया सील
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विज्ञान परिषद खाली करने का नोटिस काफी पहले दिया था लेकिन विज्ञान परिषद की ओर से इसके विरोध में न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। दो दिन पहले न्यायालय ने विश्वविद्यालय के पक्ष में आदेश दिया था।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार को 111 वर्ष पुरानी विज्ञान परिषद के परिसर को अपने कब्जे में लेते हुए सील कर दिया। परिषद का सामान यहीं कमरों में बंद है। विज्ञान का हिंदी भाषा में प्रचार-प्रसार के लिए इस संस्था की स्थापना 1912 में की गई थी। विवि प्रशासन का आरोप था कि जिस उद्देश्य से संस्था को यह जगह दी गई थी, वह उससे परे जाकर व्यावसायिक काम कर रही थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विज्ञान परिषद खाली करने का नोटिस काफी पहले दिया था लेकिन विज्ञान परिषद की ओर से इसके विरोध में न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। दो दिन पहले न्यायालय ने विश्वविद्यालय के पक्ष में आदेश दिया था। इसी क्रम में विश्वविद्यालय की ओर से विज्ञान परिषद को कब्जे लेने की कार्रवाई की गई। भारी फोर्स के साथ पहुंचे विश्वविद्यालय के अफसरों ने पूरे परिसर में ताला लगा दिए।
हालांकि, विज्ञान परिषद के पदाधिकारियों की ओर से इसका किसी तरह का विरोध नहीं हुआ। पदाधिकारियों का कहना था कि परिसर खाली करने का कोई मौका नहीं दिया गया। कार्रवाई की भी सूचना नहीं दी गई। परिषद के देवव्रत द्विवेदी का कहना है कि परिषद के सभी सामान भी परिसर में बंद हो गए हैं। कार्रवाई के दौरान कुलसचिव प्रोफेसर एनके शुक्ला, चीफ प्राॅक्टर प्रोफेसर राकेश सिंह, एसीपी राजेश यादव समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
नहीं लग पाई प्रदर्शनी
विज्ञान परिषद परिसर में सम्राट हर्षवर्धन शोध संस्थान तथा रामरती पटेल पीजी कॉलेज की ओर से भारतीय कला और साहित्य में राम एवं रामकथा का वैश्विक संस्कृतिकरण पर प्रभाव विषय पर गोष्ठी का आयोजन प्रस्तावित था। इस मौके पर राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय की ओर से शुक्रवार और शनिवार को प्रदर्शनी भी लगाई जानी थी लेकिन परिसर सील होने की वजह से कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।