इलाहाबाद विवि : रिसर्च के लिए भटकने की जरूरत नहीं, सबकुछ शोधचक्र में
इविवि का भी अलग लॉगिन बनेगा। शोधचक्र में रिसर्च स्कॉलर का पूरा डाटा रहेगा। शोध के टॉपिक से संबंधित साहित्य, सेमिनार, कांफ्रेंस, वर्कशॉप आदि की सूचनाएं शोधार्थी को उनके लॉगिन पर नोटिफिकेशन के माध्यम से लगातार मिलती रहेंगी, जिसका इस्तेमाल शोधार्थी अपने रिसर्च को पूरा करने में कर सकेंगे।
विस्तार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के शोधार्थियों को अपना रिसर्च पूरा करने के लिए अब भटकने की जरूरत नहीं। उन्हें शोधचक्र में रिसर्च के लिए सभी आवश्यक सामग्री मिल जाएगी। इविवि और इंफॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी नेटवर्क के बीच शोधचक्र पर समझौता होने के बाद शोधार्थियों और उनके सुपरवाइजरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके तहत प्रत्येक शोधार्थी और सुपरवाइजर का अलग-अलग लॉगिन बनाया जाएगा। इविवि का भी अलग लॉगिन बनेगा। शोधचक्र में रिसर्च स्कॉलर का पूरा डाटा रहेगा। शोध के टॉपिक से संबंधित साहित्य, सेमिनार, कांफ्रेंस, वर्कशॉप आदि की सूचनाएं शोधार्थी को उनके लॉगिन पर नोटिफिकेशन के माध्यम से लगातार मिलती रहेंगी, जिसका इस्तेमाल शोधार्थी अपने रिसर्च को पूरा करने में कर सकेंगे।
सिर्फ यही नहीं, शोधचक्र के माध्यम से शोधार्थी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मिलने वाली छात्रवृत्ति के बारे में भी पूरी जानकारी मिल सकेगी। मसलन, छात्रवृत्ति स्वीकृत हुई या नहीं, अगर स्वीकृत हो गई है तो खाते में कब तक आ जाएगी। इसी तरह कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल सकेंगी।
वहीं, सुपरवाइजर अपने लॉगिन के माध्यम से यह जान सकेंगे कि उनके शोधार्थी के रिसर्च की क्या स्थिति है। शोधार्थी भी रिसर्च से जुड़े प्रश्न अपने लॉगिन के माध्यम से सुपरवाइजर से पूछ सकेंगे और सुपरवाइजर को भी लॉगिन के जरिए जवाब देना होगा। जो सुपरवाइजर रिसर्च कर रहे हैं, उन्हें भी रिसर्च के टॉपिक से संबंधित नोटिफिकेशन नियमित रूप से मिलते रहेंगे।
पंजीकृत शोधार्थियों को क्लाउड कंप्यूटिंग के जरिए दो जीबी का स्टोरेज दिया जाएगा। इविवि के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. बीके सिंह ने बताया कि इससे शोधार्थियों और उनके सुपरवाइजरों को काफी सुविधाएं मिलेंगी। इविवि के लॉगिन से शोधार्थी और सुपरवाइजर दोनों की मॉनीटरिंग होगी।
शोधार्थियों का वेरिफिकेशन शुरू
डॉ. बीके सिंह के अनुसार वेरिफिकेशन के लिए शोधाार्थियों को लाइब्रेरी में बुलाया जा रहा है। यह डाटा तैयार किया जा रहा है कि शोधार्थी के रूप में उनका रजिस्ट्रेशन कब हुआ। अब तक 20 फीसदी वेरिफिकेशन पूरा कर लिया गया है। अभी गर्मी की छुट्टियां चल रहीं हैं। जुलाई में विश्वविद्यालय खुलने पर प्रक्रिया तेज होगी। जुलाई के अंत तक वेरिफिकेशन पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सभी के लॉगिन बनाए जाएंगे।