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इलाहाबाद विश्वविद्यालयः क्रेट में भी गरीब सवर्ण आरक्षण, पर नहीं बढ़ेंगी सीटें

Sun, 10 Mar 2019 07:38 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 10 Mar 2019 07:38 PM IST
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Allahabad University: Even poor senior reservation will not increase in Crete
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
नए सत्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के साथ संघटक कॉलेजों में भी पीएचडी प्रवेश के लिए संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) का आयोजन किया जाएगा। खास यह कि क्रेट में दस फीसदी गरीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था भी लागू होगी लेकिन सीटों की संख्या नहीं बढे़ेगी। ऐसे में अनारक्षित श्रेणी की सीटों पर इसका प्रभाव पड़ने के आसार हैं।
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नए सत्र 2019-20 से इविवि के संघटक कॉलेजों में भी पीएचडी में प्रवेश होगा। पीएचडी की सीटों की संख्या सुपरवाइजर की सीटों की संख्या के आधार पर निर्धारित की जाती हैं। इविवि में एक प्रोफेसर के निर्देशन में अधिकतम दस छात्र, एसोसिएट प्रोफेसर के निर्देशन में आठ और असिस्टेंट प्रोफेसर के निर्देशन में अधिकतम पांच छात्र शोध कर सकते हैं। ऐसे में पीएचडी में प्रवेश के लिए सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकती लेकिन इविवि प्रवेश परीक्षाओं से संबंधित अफसरों का कहना है कि क्रेट में दस फीसदी गरीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था लागू होगी।
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यूजीसी की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के आरक्षण पर 10 फीसदी गरीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था का कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। सीटें भी नहीं बढ़नी हैं, सो अनारक्षित श्रेणी की सीटों में ही कटौती होने के आसार हैं। वहीं, अन्य पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया पर 10 फीसदी गरीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था लागू किए जाने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी ताकि वहां अनारक्षित सीटों पर भी कोई प्रभाव न पड़े। हालांकि विधि, बीटेक जैसे पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ाए जाने पर इविवि प्रशासन निर्णय नहीं ले सकता है। विधि विभाग में प्रवेश के लिए सीटों की संख्या बार कौंसिल ऑफ इंडिया और बीटेक सीटों की संख्या एनसीटीई निर्धारित करता है, सो वहां भी गरीब सवर्ण आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है।
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इविवि की प्रवेश परीक्षा किसी एजेंसी के माध्यम से कराई जाती है। इसके लिए टेंडर निकाला गया था, जिसकी अंतिम तिथि चार मार्च निर्धारित थी लेकिन तय तिथि तक टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित संख्या से भी कम एजेंसियां शामिल हुईं। इसे देखते हुए टेंडर की तिथि अब 14 मार्च तक बढ़ा दी गई है। 15 मार्च को टेंडर खुलेगा। अगर पर्याप्त संख्या में एजेंसियां टेंडर डालती हैं तो 15 मार्च को तय हो जाएगा कि इस बार प्रवेश परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी किस एजेंसी को मिलेगी।


इविवि प्रशासन लोकसभा चुनाव की घोषणा का भी इंतजार कर रहा था ताकि चुनाव कार्यक्रम को देखते हुए प्रवेश परीक्षा का कार्यक्रम निर्धारित किया जाए। चुनाव तिथियों की घोषणा होने के बाद अब परीक्षा कार्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया में तेजी आने के आसार हैं।
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