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इविवि कॉलेजों के छात्रों के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार
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ऑक्टा की बैठक में उठा पीजी के छात्रों को कम अंक देने का मुद्दा
शिक्षकों ने कुलपति से मिलकर शिकायत दर्ज कराने का लिया निर्णय
प्रयागराज, 5 दिसंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों में पढ़ने वाले पीजी के छात्रों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। कुछ विभागाध्यक्ष पीजी के विद्यार्थियों को एक निश्चित सीमा से अधिक अंक नहीं देते हैं। बृहस्पतिवार को हुई ऑक्टा की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई और शिक्षकों ने निर्णय लिया कि अगर मुद्दे पर आपसी बातचीत से हल नहीं निकलता है तो कुलपति से मिलकर शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में हुई बैठक के दौरान ऑक्टा के सचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ विभाग जानबूझकर कॉलेजों के छात्रों को नंबर देने में दोहरा मापदंड अपनाते हैं। कुछ सदस्यों ने कहा कि अच्छे विद्यार्थियों को भी साइंस के प्रैक्टिकल में जानबूझकर कम नंबर दिए जा रहे हैं। डॉ धीरज चौधरी ने विश्वविद्यालय के कुछ विभागों में शोध के लिए महाविद्यालयों के शिक्षकों के अंतर्गत नामांकन कराने वाले विद्यार्थियों के फॉर्म पर अनावश्यक आपत्ति लगाने का मुद्दा उठाया। कई अन्य शिक्षकों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए इस पर कुलपति से बात करने की मांग की।
सदस्यों ने महाविद्यालयों में कैश के तहत प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। ऑक्टा महासचिव ने इस संदर्भ में बताया कि फॉर्म कल ही रजिस्ट्रार के पास पहुंचा है और उन्होंने एक-दो दिन में नोटिफिकेश जारी करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा डॉ. सरिता श्रीवास्तव, डॉ. आनंद, डॉ. नीलिमा ने कॉलेज के विद्यार्थियों की मार्कशीट में अनियमितता एवं गलतियों का मुद्दा उठाया। इस मसले पर परीक्षा नियंत्रक से वार्ता करने का निर्णय लिया गया। सभी सदस्यों ने प्रोन्नति के तीन वर्ष बाद भी कॉलेजों के 109 शिक्षकों का एरियर न मिलने पर असंतोष जताया। बैठक की अध्यक्षता ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह ने की।
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नए शिक्षकों ने की उम्र सीमा समाप्त करने की मांग
ऑक्टा कार्यकारिणी की बैठक से पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह, महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने नए शिक्षकों के साथ बैठक की। नए शिक्षकों ने ऑक्टा का सदस्य बनने, पदाधिकारियों एवं स्थानीय इकाई के लिए चुनाव लड़ने के लिए उम्र सीमा समाप्त किए जाने की मांग की। महासचिव कहा कि ऑक्टा में जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वह कार्यकारिणी और आम सभा में होते हैं। नए शिक्षक ऑक्टा का सदस्य बनकर सामान्य सभा के माध्यम से नियमों में परिवर्तन कर सकते हैं।
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शिक्षकों ने कुलपति से मिलकर शिकायत दर्ज कराने का लिया निर्णय
प्रयागराज, 5 दिसंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों में पढ़ने वाले पीजी के छात्रों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। कुछ विभागाध्यक्ष पीजी के विद्यार्थियों को एक निश्चित सीमा से अधिक अंक नहीं देते हैं। बृहस्पतिवार को हुई ऑक्टा की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई और शिक्षकों ने निर्णय लिया कि अगर मुद्दे पर आपसी बातचीत से हल नहीं निकलता है तो कुलपति से मिलकर शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में हुई बैठक के दौरान ऑक्टा के सचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ विभाग जानबूझकर कॉलेजों के छात्रों को नंबर देने में दोहरा मापदंड अपनाते हैं। कुछ सदस्यों ने कहा कि अच्छे विद्यार्थियों को भी साइंस के प्रैक्टिकल में जानबूझकर कम नंबर दिए जा रहे हैं। डॉ धीरज चौधरी ने विश्वविद्यालय के कुछ विभागों में शोध के लिए महाविद्यालयों के शिक्षकों के अंतर्गत नामांकन कराने वाले विद्यार्थियों के फॉर्म पर अनावश्यक आपत्ति लगाने का मुद्दा उठाया। कई अन्य शिक्षकों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए इस पर कुलपति से बात करने की मांग की।
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सदस्यों ने महाविद्यालयों में कैश के तहत प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। ऑक्टा महासचिव ने इस संदर्भ में बताया कि फॉर्म कल ही रजिस्ट्रार के पास पहुंचा है और उन्होंने एक-दो दिन में नोटिफिकेश जारी करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा डॉ. सरिता श्रीवास्तव, डॉ. आनंद, डॉ. नीलिमा ने कॉलेज के विद्यार्थियों की मार्कशीट में अनियमितता एवं गलतियों का मुद्दा उठाया। इस मसले पर परीक्षा नियंत्रक से वार्ता करने का निर्णय लिया गया। सभी सदस्यों ने प्रोन्नति के तीन वर्ष बाद भी कॉलेजों के 109 शिक्षकों का एरियर न मिलने पर असंतोष जताया। बैठक की अध्यक्षता ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह ने की।
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नए शिक्षकों ने की उम्र सीमा समाप्त करने की मांग
ऑक्टा कार्यकारिणी की बैठक से पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह, महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने नए शिक्षकों के साथ बैठक की। नए शिक्षकों ने ऑक्टा का सदस्य बनने, पदाधिकारियों एवं स्थानीय इकाई के लिए चुनाव लड़ने के लिए उम्र सीमा समाप्त किए जाने की मांग की। महासचिव कहा कि ऑक्टा में जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वह कार्यकारिणी और आम सभा में होते हैं। नए शिक्षक ऑक्टा का सदस्य बनकर सामान्य सभा के माध्यम से नियमों में परिवर्तन कर सकते हैं।