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सूफी से सजी शाम, भजनों पर भावविभोर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 Feb 2016 01:01 AM IST
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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से माघ मेले के परेड मैदान पर बृहस्पतिवार से 11 दिनी ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ के तहत गायन, वादन, नृत्य की त्रिवेणी बही तो हर कोई संगीत सरिता में सराबोर हुआ। गायक कलाकार प्रेम प्रकाश दूबे के ‘जय गणेश जय गणेश देवा’ और ‘प्रयाग नगरी बसै संगम तीरे, त्रिवेणी की धार बहे धीरे-धीरे’ से शुरुआत के बाद मंच सूफियाना गायकी के नाम हुआ। प्रतिभाशाली युवा गायकों जलज और कबीर के सूफी गायन से समां बांधा और ‘दमा-दम मस्त कलंदर’, ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाय के’ और ‘सांसों की माला से सुमिरू पिय का नाम’ सुनाकर गायकी का जादू बिखेरा और तालियां बटोरीं।
लोक रंग मेंअसम के लोक कलाकारों ने भोरताल नृत्य से असमी जीवन की आध्यात्मिकता को चित्रित किया। वहीं गुजराती कलाकारों ने नवरात्र के अवसर पर होने वाला गरबा और गोपियों- कृष्ण की रासलीला पर केंद्रित डांडिया प्रस्तुत कर मुग्ध किया। राजस्थान से आए शंकरदास और कामड़ समुदाय की कलाकारों का ‘तेरहताली’ नृत्य सराहा गया। अरुणाचल प्रदेश की निशि जनजाति की महिलाओं के कृषि कार्य नृत्य ‘जू-जू-जा-जा’ नृत्य ने मंत्रमुग्ध किया।
मप्र की विनीता दोहरे और दल ने जन्म से लेकर वैवाहिक, मांगलिक और नवरात्र पर होने वाले ‘नौरता’ लोकनृत्यों से दर्शकों का मन मोह लिया। तमिल का ‘थपट्टा गुल्लू’ नृत्य भी खूब पसंद किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि मंडलायुक्त राजन शुक्ल ने कहा, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को एक साथ एक मंच पर लाने का काम सराहनीय है। इससे पहले उन्होंने दीप जलाकर उद्घाटन किया। केंद्र निदेशक गौरव कृष्ण बंसल ने स्वागत और संजय पुरुषार्थी ने संचालन किया।
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शुक्रवार को पहले सत्र में दिन में दो बजे से श्रुति चौहान, किशन लाल, कौशल्या देवी, विकास श्रीवास्तव, ओम प्रकाश पटेल के सुगम संगीत, बीन वादन, लोकगीत, निर्गुण गीत आदि की प्रस्तुति होगी। वहीं शाम छह बजे से दूसरे सत्र में भूपेंद्र शुक्ला का भजन, अजिता श्रीवास्तव का कजरी गायन, विनीता दोहरे का नारैता लोकनृत्य, मुकेा दरबार का भगौरिया लोकनृत्य, शंकरदास की तेरहताली का प्रदर्शन किया जाएगा।
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लोक रंग मेंअसम के लोक कलाकारों ने भोरताल नृत्य से असमी जीवन की आध्यात्मिकता को चित्रित किया। वहीं गुजराती कलाकारों ने नवरात्र के अवसर पर होने वाला गरबा और गोपियों- कृष्ण की रासलीला पर केंद्रित डांडिया प्रस्तुत कर मुग्ध किया। राजस्थान से आए शंकरदास और कामड़ समुदाय की कलाकारों का ‘तेरहताली’ नृत्य सराहा गया। अरुणाचल प्रदेश की निशि जनजाति की महिलाओं के कृषि कार्य नृत्य ‘जू-जू-जा-जा’ नृत्य ने मंत्रमुग्ध किया।
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मप्र की विनीता दोहरे और दल ने जन्म से लेकर वैवाहिक, मांगलिक और नवरात्र पर होने वाले ‘नौरता’ लोकनृत्यों से दर्शकों का मन मोह लिया। तमिल का ‘थपट्टा गुल्लू’ नृत्य भी खूब पसंद किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि मंडलायुक्त राजन शुक्ल ने कहा, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को एक साथ एक मंच पर लाने का काम सराहनीय है। इससे पहले उन्होंने दीप जलाकर उद्घाटन किया। केंद्र निदेशक गौरव कृष्ण बंसल ने स्वागत और संजय पुरुषार्थी ने संचालन किया।
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शुक्रवार को पहले सत्र में दिन में दो बजे से श्रुति चौहान, किशन लाल, कौशल्या देवी, विकास श्रीवास्तव, ओम प्रकाश पटेल के सुगम संगीत, बीन वादन, लोकगीत, निर्गुण गीत आदि की प्रस्तुति होगी। वहीं शाम छह बजे से दूसरे सत्र में भूपेंद्र शुक्ला का भजन, अजिता श्रीवास्तव का कजरी गायन, विनीता दोहरे का नारैता लोकनृत्य, मुकेा दरबार का भगौरिया लोकनृत्य, शंकरदास की तेरहताली का प्रदर्शन किया जाएगा।