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प्रतियोगियों का किताबी वार, उजागर करेंगे आयोग की अनियमितता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 02 Aug 2015 11:41 PM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और प्रतियोगियों के बीच अब नई लड़ाई शुरू होने जा रही है। सड़क से लेकर कानूनी लड़ाई में चारों तरफ से घिरे आयोग के अध्यक्ष की ओर से दो साल की उपलब्धियां गिनाने की तैयारी है तो इसके जवाब में प्रतियोगियों ने भी आयोग की भर्तियों में अनियमितताओं पर किताब लिखने का निर्णय लिया है। 18 खंड वाली इस पुस्तक को लिखने की शुरुआत भी हो चुकी है, जिसमें डॉ. अनिल यादव की नियुक्ति, उनके कार्यकाल में भर्तियों में हुई गड़बड़ी, आंदोलनों आदि का विस्तृत विवरण होगा। यह पुस्तक कुछ दिनों में ही बाजार में उपलब्ध होगी। इतना ही नहीं प्रतियोगी पहले पेज पर इस बात की शपथ भी लेंगे कि इस पुस्तक में लिखी हर लाइन सच है। गलत होने पर वे कानूनी कार्रवाई के लिए उपलब्ध होंगे।
प्रतियोगियों को जानकारी हुई है कि आयोग अध्यक्ष की ओर से दो साल में हुए कार्यों को सार्वजनिक करने की तैयारी है। इसके लिए सभी अनुभागों से जानकारी मांगी गई है। आयोग अध्यक्ष पर भर्तियों में जाति विशेष को तवज्जों दिए जाने का आरोप है। इससे बचाव के लिए बैकलाग के पदों का विवरण तैयार किया जा रहा है। इसकी जानकारी होने के बाद प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से एक पुस्तक छापने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रतियोगियों की टीम बनाई गई है। प्रतियोगियों का कहना है कि पुस्तक में डॉ. अनिल यादव की नियुक्ति, समाजवादी पार्टी से उनके जुड़ाव को साक्ष्य के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। पुस्तक में डॉ. अनिल की ओर से लाए गए विवादित प्रस्तावों और उसके पीछे की मंशा, पीसीएस, लोअर सबऑर्डिनेट समेत सभी भर्तियों के परिणाम के डिटेल, आरटीआई ऐक्ट का उल्लंघन आदि का विस्तार से जिक्र होगा। समिति के अवनीश ने बताया कि पहले इसकी एक हजार प्रति छापी जाएगी।
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प्रतियोगियों को जानकारी हुई है कि आयोग अध्यक्ष की ओर से दो साल में हुए कार्यों को सार्वजनिक करने की तैयारी है। इसके लिए सभी अनुभागों से जानकारी मांगी गई है। आयोग अध्यक्ष पर भर्तियों में जाति विशेष को तवज्जों दिए जाने का आरोप है। इससे बचाव के लिए बैकलाग के पदों का विवरण तैयार किया जा रहा है। इसकी जानकारी होने के बाद प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से एक पुस्तक छापने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रतियोगियों की टीम बनाई गई है। प्रतियोगियों का कहना है कि पुस्तक में डॉ. अनिल यादव की नियुक्ति, समाजवादी पार्टी से उनके जुड़ाव को साक्ष्य के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। पुस्तक में डॉ. अनिल की ओर से लाए गए विवादित प्रस्तावों और उसके पीछे की मंशा, पीसीएस, लोअर सबऑर्डिनेट समेत सभी भर्तियों के परिणाम के डिटेल, आरटीआई ऐक्ट का उल्लंघन आदि का विस्तार से जिक्र होगा। समिति के अवनीश ने बताया कि पहले इसकी एक हजार प्रति छापी जाएगी।
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