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Allahabad high Court : डिक्री रद्द कर केस दाखिल दफ्तर करने पर पीलीभीत के तत्कालीन एसडीएम से मांगा जवाब

Fri, 22 May 2026 06:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 22 May 2026 06:45 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीलीभीत के तत्कालीन एसडीएम से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कहा है कि राज्य सरकार की अर्जी पर याची के पक्ष में पारित डिक्री रद्द किए जाने के बाद मामले को मेरिट पर सुनने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर कैसे कर दी गई।

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Allahabad High Court: The then SDM of Pilibhit was asked to respond after the decree was cancelled
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीलीभीत के तत्कालीन एसडीएम से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कहा है कि राज्य सरकार की अर्जी पर याची के पक्ष में पारित डिक्री रद्द किए जाने के बाद मामले को मेरिट पर सुनने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर कैसे कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित एसडीएम का तबादला हो चुका हो तो आदेश उन्हें उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे स्पष्टीकरण सहित व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सकें।

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यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने रानी देवी की याचिका पर दिया। याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार ने सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत अर्जी दाखिल की थी। अर्जी पर सुनवाई करते हुए एसडीएम ने याची के पक्ष में पारित डिक्री को निरस्त कर दिया। लेकिन, इसके बाद मामले की मेरिट पर आगे सुनवाई करने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर कर दी। डिक्री निरस्त होने के बाद मामले की नियमित सुनवाई होनी चाहिए थी, न कि पत्रावली बंद की जानी चाहिए थी। 

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