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यूपी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. कफील के निलंबन आदेश पर लगाई रोक, योगी सरकार से जवाब तलब
Tue, 14 Sep 2021 10:36 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 14 Sep 2021 10:36 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. कफील अहमद खान को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कफील के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
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डॉ कफील खान (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के डॉ. कफील अहमद खान को बड़ी राहत देते हुए उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। निलंबन आदेश 31 जुलाई 19 को पारित किया गया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
कोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 11 नवंबर को होगी। कोर्ट ने याची के खिलाफ विभागीय जांच कार्यवाही एक माह में पूरी करने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट मांगी है।
याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की एकल पीठ सुनवाई कर रही है। कफील खान 2018 में महानिदेशक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध थे तो उसी समय बहराइच में इंसेफेलाइटिस बीमारी के कारण एक हफ्ते में 70 बच्चों की मौत हो गई तो कफील इलाज करने के लिए वहां गए।
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उनको बिना अनुमति लिए जबरन बच्चों का इलाज करने व सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में निलंबित कर दिया गया, जिसे चुनौती दी गई है। याची का कहना था कि निलंबन के दो साल बाद भी जांच प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। ऐसे में उसका निलंबन वापस लिया जाए। जब वह पहले से ही एक मामले में निलंबित है तो दूसरे मामले में निलंबित करने का कोई औचित्य नहीं है।
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कोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 11 नवंबर को होगी। कोर्ट ने याची के खिलाफ विभागीय जांच कार्यवाही एक माह में पूरी करने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट मांगी है।
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याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की एकल पीठ सुनवाई कर रही है। कफील खान 2018 में महानिदेशक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध थे तो उसी समय बहराइच में इंसेफेलाइटिस बीमारी के कारण एक हफ्ते में 70 बच्चों की मौत हो गई तो कफील इलाज करने के लिए वहां गए।
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उनको बिना अनुमति लिए जबरन बच्चों का इलाज करने व सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में निलंबित कर दिया गया, जिसे चुनौती दी गई है। याची का कहना था कि निलंबन के दो साल बाद भी जांच प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। ऐसे में उसका निलंबन वापस लिया जाए। जब वह पहले से ही एक मामले में निलंबित है तो दूसरे मामले में निलंबित करने का कोई औचित्य नहीं है।
सरकारी वकील का कहना था कि 27 अगस्त 21 को जांच रिपोर्ट पेश कर दी गई है। याची को आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया गया है। सरकार को जांच के दौरान कर्मचारी को निलंबित करने का अधिकार है। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और सरकार से जवाब तलब किया है।