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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court Orders for DNA investigation in the case of woman murder

Allahabad High Court :  महिला की हत्या के मामले में डीएनए जांच के आदेश

Sun, 07 Aug 2022 12:46 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 07 Aug 2022 12:46 AM IST
सार

कोर्ट ने मामले में निचली अदालत के फैसले को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद एक महीने के भीतर डीएनए टेस्ट की कार्यवाही पूरी कर ली जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने मोहन सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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Allahabad High Court Orders for DNA investigation in the case of woman murder
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के कोसीकलां थाने में हत्या के मामले में दर्ज प्राथमिकी में शिकायतकर्ता (प्राथमिकी दर्ज कराने वाले) या उसकेपरिवार के किसी भी सदस्य की डीएनए जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मामला याची के जीवन से जुड़ा हुआ है। न्याय केलिए जरूरी है तो डीएनए टेस्ट कराने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

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कोर्ट ने मामले में निचली अदालत के फैसले को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद एक महीने के भीतर डीएनए टेस्ट की कार्यवाही पूरी कर ली जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने मोहन सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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मामले में हरदेव सिंह द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी कि 21 जून 2012 को उसकी मां कुछ सामान खरीदने बाजार गई थी। रास्ते में किसी बात को लेकर हरिया के दोनों बेटों याची मोहन सिंह और टिक्की के बीच विवाद हो रहा था। जिस पर उनकी मां ने उन्हें शांत करने के लिए हस्तक्षेप किया और उन्हें झगड़ा खत्म करने के लिए कहा, गुस्साए मोहन सिंह (आरोपी आवेदक) ने उसे गोली मार दी। इससे उसकी मौत हो गई।

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मामला सत्र न्यायालय में लंबित है। आरोपी आवेदक ने सीआरपीसी की धारा 233 के तहत 16 अगस्त 2021 को सत्र न्यायालय केसमक्ष अर्जी देकर डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। उसका आरोप है कि अभियोजन ने गलत कहानी प्रस्तुत की है। घटना के दिन वह था ही नहीं। वह ऋण के भुगतान के संबंध में दिल्ली गया था। डीएनए टेस्ट से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि जांच के दौरान घटनास्थल से एकत्र किए गए रक्त के नमूने और उसकेपरिवार के सदस्यों के रक्त के नमूने एक हैं।


यह भी कहा गया है कि महिला की मौत कहीं और हुई थी। ऐसे में जांच अधिकारी ने घटनास्थल की गलत नक्ष नजर तैयार की थी। जांच अधिकारी ने मृतक के खून से सने कपड़ों के साथ खून से सने मिट्टी (कीचड़) के नमूने डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला के समक्ष नहीं भेजे। इसलिए डीएनए टेस्ट जरूरी है। सत्र न्यायालय ने अर्जी को 11 अक्तूबर को खारिज कर दिया। याची सत्र न्यायालय केफैसले को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते हुए डीएनए जांच का आदेश दे दिया।

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