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इलाहाबाद हाईकोर्ट : आरोपी पर आत्मसमर्पण का दबाव बनाने के लिए परिजनों को हिरासत में रखना गैरकानूनी

Thu, 01 Oct 2026 03:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Oct 2026 03:16 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी पर आत्मसमर्पण का दबाव बनाने के लिए परिजनों को हिरासत में रखना गैरकानूनी है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने जौनपुर निवासी अरविंद यादव की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए की।

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Allahabad High Court: Detaining family members to pressure the accused into surrendering is illegal.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी पर आत्मसमर्पण का दबाव बनाने के लिए परिजनों को हिरासत में रखना गैरकानूनी है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने जौनपुर निवासी अरविंद यादव की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए की। कोर्ट ने याची को अवैध हिरासत में रखने पर सरकार पर 40 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस राशि की वसूली जॉर्जटाउन थाने के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के वेतन से की जाएगी। साथ ही तत्कालीन थाना प्रभारी योगेंद्र कुमार सिंह और विवेचक अश्वनी सविता की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने का आदेश दिया है।

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मामला जॉर्जटाउन थाना क्षेत्र का है। अरविंद के भाई सुरेश के खिलाफ जानलेवा हमले समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज था। उसे अग्रिम जमानत मिल चुकी है। याची ने दावा किया कि पुलिस उसे 23 जून को जौनपुर स्थित घर से उठाकर जॉर्जटाउन थाने ले आई। इसके बाद 26 जून की शाम करीब सात बजे छोड़ा। पुलिस उसके भाई पर आत्मसमर्पण का दबाव बनाने की कोशिश कर रही थी।
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सुनवाई के दौरान विवेचक अश्वनी सविता ने बताया कि एसएचओ योगेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर अरविंद के घर गया था। उसे मामले में पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। कोर्ट ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी जांच की। रिकॉर्ड के मुताबिक 23 जून की सुबह याची की लोकेशन जौनपुर से प्रयागराज और करीब आठ बजे जॉर्जटाउन में मिली। दोपहर करीब 12 बजे उसका मोबाइल बंद हो गया।
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27 जून की सुबह जौनपुर में ही दोबारा चालू हुआ। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज से भी 23 से 25 जून तक उसकी थाने में मौजूदगी की पुष्टि हुई। कोर्ट ने कहा कि इन साक्ष्यों और सुपुर्दगी-नामा से यह स्पष्ट है कि याची को कम से कम 23 से 26 जून तक चार दिन पुलिस की अवैध हिरासत में रखा गया।

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